{"_id":"6ad37c4e432c71002f03837c","slug":"report-animal-deaths-to-the-forest-department-within-24-hours-rishikesh-news-c-38-1-rks1010-147793-2026-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rishikesh News: पशु हानि पर 24 घंटे के भीतर वन विभाग को दें सूचना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rishikesh News: पशु हानि पर 24 घंटे के भीतर वन विभाग को दें सूचना
Sat, 17 Oct 2026 07:16 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 17 Oct 2026 07:16 PM IST
विज्ञापन
समय पर साक्ष्य नहीं मिलने से अटक रहा मुआवजा, लालढांग रेंज के रेंजर अनुराग जोशी ने की अपील
यमकेश्वर। जंगली जानवरों के हमले में पालतू पशुओं की मौत होने पर पशुपालकों को 24 घंटे के भीतर वन विभाग को सूचना देनी होगी। समय पर जानकारी नहीं मिलने से पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुट पाते, जिससे मुआवजे की प्रक्रिया प्रभावित होती है। लालढांग रेंज के रेंजर अनुराग जोशी ने पशुपालकों से अपील की है कि ऐसी घटना होने पर तत्काल नजदीकी वन चौकी, रेंज कार्यालय या वन कर्मी को सूचित करें। वन विभाग के अनुसार, विकासखंड में कई पशुपालक पशु हानि होने पर समय से सूचना नहीं देते हैं। रेंजर अनुराग जोशी ने बताया कि मुआवजे के लिए पशु का सिर और धड़ मिलना प्रमुख साक्ष्य है। देरी होने पर बाघ, गुलदार और जंगली सूअर जैसे जानवर शव के बड़े हिस्से को खा जाते हैं या उसे नष्ट कर देते हैं। इससे मौके पर पहुंचने वाली वन विभाग की टीम को घटना की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल पाते। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान वन कर्मियों को जीपीएस फोटो और पंचनामा तैयार करना होता है। पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर मुआवजे की फाइल आगे नहीं बढ़ पाती और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि घटना की सूचना तुरंत दें, ताकि टीम समय पर मौके पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य जुटा सके और पीड़ित को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।
विज्ञापन
यमकेश्वर। जंगली जानवरों के हमले में पालतू पशुओं की मौत होने पर पशुपालकों को 24 घंटे के भीतर वन विभाग को सूचना देनी होगी। समय पर जानकारी नहीं मिलने से पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुट पाते, जिससे मुआवजे की प्रक्रिया प्रभावित होती है। लालढांग रेंज के रेंजर अनुराग जोशी ने पशुपालकों से अपील की है कि ऐसी घटना होने पर तत्काल नजदीकी वन चौकी, रेंज कार्यालय या वन कर्मी को सूचित करें। वन विभाग के अनुसार, विकासखंड में कई पशुपालक पशु हानि होने पर समय से सूचना नहीं देते हैं। रेंजर अनुराग जोशी ने बताया कि मुआवजे के लिए पशु का सिर और धड़ मिलना प्रमुख साक्ष्य है। देरी होने पर बाघ, गुलदार और जंगली सूअर जैसे जानवर शव के बड़े हिस्से को खा जाते हैं या उसे नष्ट कर देते हैं। इससे मौके पर पहुंचने वाली वन विभाग की टीम को घटना की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल पाते। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान वन कर्मियों को जीपीएस फोटो और पंचनामा तैयार करना होता है। पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर मुआवजे की फाइल आगे नहीं बढ़ पाती और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि घटना की सूचना तुरंत दें, ताकि टीम समय पर मौके पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य जुटा सके और पीड़ित को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।