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यमकेश्वर ब्लॉक में स्वरोजगार की अलख जगा रहे राजीव
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मशरूम दिखाते राजीव।
- फोटो : RISHIKESH
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यमकेश्वर ब्लॉक के जुड्डा गांव निवासी राजीव भंडारी बीते चार वर्षों से स्वरोजगार की अलख जगा रहे हैं। वह मशरूम उत्पादन कर दूसरे गांव के ग्रामीणों और युवाओं को भी इससे जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वह कई युवाओं को इसके लिए प्रशिक्षण भी दे चुके हैं।
राजीव भंडारी ने बताया कि वह बीते चार वर्षों से आस्टर प्रजाति के मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने बिना किसी शासन-प्रशासन की मदद से यह मुकाम हासिल किया है। बताया कि अब यह परिवार की आजीविका का एक अच्छा साधन बन गया है। बताया कि उनसे सीखकर पोखरी, दमराड़ा, तलाईं आदि गांव के ग्रामीणों ने भी यह लघु रोजगार शुरू कर दिया है। बताया कि उनके द्वारा उत्पादित मशरूम की सप्लाई नीलकंठ क्षेत्र के आसपास दुकानों में होती है। बताया कि वह आस्टर (ढिंगरी) प्रजाति के मशरूम का उत्पादन करते हैं। इस प्रजाति के मशरूम की कीमत बाजार में 100 से 150 रुपये प्रति किग्रा है। बताया कि 30 से 35 दिन में मशरूम तैयार हो जाता है।
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लॉकडाउन में कई युवाओं ने लिया प्रशिक्षण
राजीव ने बताया कि लॉकडाउन में विभिन्न देशों में निजी कंपनी में कार्य कर रहे युवा अपने घर आ गए। रोजगार की तलाश में युवा स्वरोजगार से जुड़ने के लिए मशरूम उत्पादन की विधि सीखने लगे। इस दौरान उन्होंने यमकेश्वर ब्लॉक के 10 से 15 युवाओं को मशरूम उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। इसमें से पांच युवा इस मुहिम को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं।
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राजीव भंडारी ने बताया कि वह बीते चार वर्षों से आस्टर प्रजाति के मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने बिना किसी शासन-प्रशासन की मदद से यह मुकाम हासिल किया है। बताया कि अब यह परिवार की आजीविका का एक अच्छा साधन बन गया है। बताया कि उनसे सीखकर पोखरी, दमराड़ा, तलाईं आदि गांव के ग्रामीणों ने भी यह लघु रोजगार शुरू कर दिया है। बताया कि उनके द्वारा उत्पादित मशरूम की सप्लाई नीलकंठ क्षेत्र के आसपास दुकानों में होती है। बताया कि वह आस्टर (ढिंगरी) प्रजाति के मशरूम का उत्पादन करते हैं। इस प्रजाति के मशरूम की कीमत बाजार में 100 से 150 रुपये प्रति किग्रा है। बताया कि 30 से 35 दिन में मशरूम तैयार हो जाता है।
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लॉकडाउन में कई युवाओं ने लिया प्रशिक्षण
राजीव ने बताया कि लॉकडाउन में विभिन्न देशों में निजी कंपनी में कार्य कर रहे युवा अपने घर आ गए। रोजगार की तलाश में युवा स्वरोजगार से जुड़ने के लिए मशरूम उत्पादन की विधि सीखने लगे। इस दौरान उन्होंने यमकेश्वर ब्लॉक के 10 से 15 युवाओं को मशरूम उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। इसमें से पांच युवा इस मुहिम को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं।
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