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एसटीपी प्लांट की क्षमता पर सवाल, 20 महीने बाद भी नहीं हुआ हस्तांतरण

Tue, 13 Sep 2022 12:13 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 13 Sep 2022 12:13 AM IST
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Question on capacity of STP plant, transfer not done even after 20 months
करीब 20 महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऋषिकेश में लक्कड़घाट, मुनिकीरेती के चंद्रेश्वर नगर और ढालवाला के चोरपानी में तीन एसटीपी प्लांट और पंपिंग स्टेशनों का वर्चुअल लोकापर्ण किया था। लोकापर्ण के बाद यह प्लांट अपनी क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में इन पपिंग स्टेशनों को जल निगम जल संस्थान को हस्तांतरित नहीं कर पा रहा है।
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31 दिसंबर 2020 को लक्कड़घाट में 158 करोड़ की लागत से बना 26 एमएलडी क्षमता का एसटीपी, चंद्रेश्वरनगर में 41 करोड़ की लागत से बना 7.5 एमएलडी क्षमता का एसटीपी और सीवेज पंपिंग स्टेेशन, ढालवाला के चोरपानी 39 करोड़ की लागत से बना पांच एमएलडी क्षमता का एसटीपी का लोकापर्ण हुआ था। इन प्लांटों के निर्माण पूरा करने में करीब दो साल लगे थे। इन प्लाटों की क्षमता अगले 15 वर्षों की आवश्यकता के अनुसार रखी गई। लेकिन लक्कड़घाट एसटीपी प्लांट को छोड़ दिया जाए तो चोरपानी और चंद्रेश्वर नगर में यह प्लांट पीक अवर्स में ओवर फ्लो हो रहे हैं। चोरपानी में एसटीपी प्लांट से मल को चंद्रभागा नदी में बहाने पर ढालवाला के लोग पूर्व में प्लांट में जाकर विरोध दर्ज करा चुके हैं।
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वहीं चंद्रेश्वर के लोग भी नालियों में बह रहे सीवर को पंपिंग स्टेशन अंदर न लेने का आरोप लगा रहे हैं। चंद्रेश्वर के स्थानीय निवासी सतीश भारद्वाज, मदन सिंह, दशरथ, गंगा जयसवाल, प्रेमा देवी ने भी का आरोप लगाया था कि यहां पर जो प्लांट लगाया गया है वह अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं करता।
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सीवेज पंपिंग स्टेशन संचालन में हीलाहवाली
जल निगम ने चंद्रेश्वरनगर में बनाया गए सीवेज पंपिंग स्टेशन का हस्तांतरण तो जल संस्थान को कर दिया। लेकिन जल संस्थान (अनुरक्षण इकाई गंगा) की ओर से इस एसपीएस के संचालन में भी हीलाहवाली बरती जा रही है। जल संस्थान की ओर से जिस संस्था को इसका काम सौंप रखा है वह ठीक से काम नहीं कर पा रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने दो सितंबर को दोपहर को पौने एक बजे एसपीएस का निरीक्षण किया तो वहां पर पंप ऑपेटिंग की जो डेली डिटेल रिपोर्ट तैयार की गई थी, कहीं ऑपरेटर के हस्ताक्षर थे, कहीं पर नहीं थे, कहीं पर ड्यूटी पर आने वाले कर्मचारी के दो घंटे पहले कोरे कॉलम मेें हस्ताक्षर करवा दिए गए थे।
फेल हुई स्वीडन की तकनीक
चंद्रेश्वर नगर में 41 करोड़ की लागत से बना 7.5 एमएलडी क्षमता के एसटीपी प्लांट को लेकर नमामि गंगे के तत्कालीन अधिकारियों का कहना था कि यह प्लांट स्वीडन की तकनीक से तैयार किया गया है। यह प्रोजेक्ट (एसटीपी) देश का पहला प्रोजेक्ट होगा जो वर्टिकल डायरेक्शन में तैयार हुआ है। विश्वविद्यालयों और पड़ोसी राज्यों के जल संस्थान, जल निगम के अधिकारी एसटीपी का मॉडल देखने के लिए आ रहे हैं। वर्टिकल डायरेक्टशन एसटीपी की स्थापना के क्षेत्र में किसी कमाल से कम नहीं बताया जा रहा था। यह एसटीपी महज 970 वर्गमीटर में सात मंजिल का बनाया गया है। अब एसटीपी की प्लांट की क्षमता पर सवाल उठने के बाद जल निगम के अधिकारियों से जवाब देते नहीं बन रहा है।
सर्वहारा नगर में पंपिंग स्टेशन का भी अधूरा निर्माण
जल निगम की ओर से सर्वहारा नगर में सीवर पंपिंग स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस प्लांट का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया।

चोरपानी, चंद्रेश्वरनगर और लक्कड़घाट एसटीपी अभी जल संस्थान को हस्तांतरित नहीं हुई है। चंद्रेश्वर नगर स्थित पंपिंग स्टेशन जल संस्थान को हस्तांतरित कर दिया है। सर्वहारानगर में भी एसपीएस का जल्द पूरा हो जाएगा। लक्कड़घाट एसटीपी में कुछ और काम होने है। जल्द ही चोरपानी, चंद्रेश्वरनगर एसटीपी जल संस्थान को हस्तांतरित किए जाएंगे।
सचिन, परियोजना प्रबंधक निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) हरिद्वार
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