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Rishikesh News: लाभार्थी के बजाय दूसरे व्यक्ति खाते में कर दिया भुगतान
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पौड़ी जनपद के यमकेश्वर ब्लॉक में मनरेगा योजना के तहत सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) में बकरीबाड़ा में हजारों रुपये का घोटाला सामने आया है। विभागीय अधिकारियों ने योजना का भुगतान लाभार्थी के बजाय दूसरे व्यक्ति के निजी खाते में कर दिया है। जबकि लाभार्थी भुगतान के लिए विभाग के चक्कर काट रहा है।
यमकेश्वर ब्लॉक के तल्ला बणास के तोक गांव सौलीवाला निवासी मोहन सिंह बिष्ट ने खंड विकास कार्यालय से सूचना मांगी थी। मोहन सिंह ने बताया कि उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में मनरेगा के तहत बकरीबाड़ा योजना का लाभ लिया था। उन्हें योजना के तहत 34 हजार 900 रुपये का भुगतान होना था।
योजना के प्रथम चरण में विभाग की ओर से उन्हें करीब 19 हजार 341 रुपये का भुगतान किया गया था। शेष भुगतान उन्हें सामग्री के बिल जमा करने के बाद होना था। उन्होंने ऋषिकेश के मुख्य बाजार से सामग्री खरीदी। कहा जब वह बिलों को लेकर यमकेश्वर खड़ विकास कार्यालय में गए तो संबंधित अधिकारियों ने उन्हें बिल बाद में जमा करने की बात कही।
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इसके बाद वह दोबारा खंड विकास कार्यालय में बिलों को जमा करने गए। लेकिन विभागीय अधिकारी ने उन्हें शेष भुगतान देने से मना कर दिया। जब उन्हें संशय हुआ तो उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना में बिलों की प्रतिलिपि मांगी। बिल की जो प्रतिलिपि उन्हें राणा ट्रेडर्स व प्रीति आर्टस के बिलों की प्रतिलिपि दी गई। जबकि इन फर्म से उन्होंने कोई सामग्री नहीं खरीदी है। साथ ही विभाग ने जो भुगतान किया है वह फर्म के खाते में जमा करने के बजाय निजी खातों में जमा की है।
भूमि विकास में भी हुआ घोटाला
सौलीवाला गांव निवासी मोहन बिष्ट ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021-22 में उनके साथ मनरेगा योजना के तहत भूमि विकास के कार्यों में भी घोटाला हुआ है। कहा उन्होंने भूमि विकास के दौरान 36 दिन कुशल श्रमिक के रूप में काम किया था। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उनका 24 दिन का भुगतान अकुशल श्रमिक के रूप में किया है। कहा कुशल श्रमिक के रूप में उन्हें 404 रुपये प्रतिदिन का भुगतान होना था, लेकिन उनका भुगतान अकुशल श्रमिक के रूप में केवल 202 रुपये भुगतान किया गया है। जिसमें उनके सैकड़ों रुपये विभागीय अधिकारियों ने बंदरबांट कर दिए।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने जो बिल और दस्तावेज जमा किए हैं, उन्हीं के आधार पर लाभार्थी का भुगतान किया गया है। भुगतान नियमानुसार किया गया है। -दृष्टि आनंद, खंड विकास अधिकारी, यमकेश्वर
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यमकेश्वर ब्लॉक के तल्ला बणास के तोक गांव सौलीवाला निवासी मोहन सिंह बिष्ट ने खंड विकास कार्यालय से सूचना मांगी थी। मोहन सिंह ने बताया कि उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में मनरेगा के तहत बकरीबाड़ा योजना का लाभ लिया था। उन्हें योजना के तहत 34 हजार 900 रुपये का भुगतान होना था।
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योजना के प्रथम चरण में विभाग की ओर से उन्हें करीब 19 हजार 341 रुपये का भुगतान किया गया था। शेष भुगतान उन्हें सामग्री के बिल जमा करने के बाद होना था। उन्होंने ऋषिकेश के मुख्य बाजार से सामग्री खरीदी। कहा जब वह बिलों को लेकर यमकेश्वर खड़ विकास कार्यालय में गए तो संबंधित अधिकारियों ने उन्हें बिल बाद में जमा करने की बात कही।
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इसके बाद वह दोबारा खंड विकास कार्यालय में बिलों को जमा करने गए। लेकिन विभागीय अधिकारी ने उन्हें शेष भुगतान देने से मना कर दिया। जब उन्हें संशय हुआ तो उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना में बिलों की प्रतिलिपि मांगी। बिल की जो प्रतिलिपि उन्हें राणा ट्रेडर्स व प्रीति आर्टस के बिलों की प्रतिलिपि दी गई। जबकि इन फर्म से उन्होंने कोई सामग्री नहीं खरीदी है। साथ ही विभाग ने जो भुगतान किया है वह फर्म के खाते में जमा करने के बजाय निजी खातों में जमा की है।
भूमि विकास में भी हुआ घोटाला
सौलीवाला गांव निवासी मोहन बिष्ट ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021-22 में उनके साथ मनरेगा योजना के तहत भूमि विकास के कार्यों में भी घोटाला हुआ है। कहा उन्होंने भूमि विकास के दौरान 36 दिन कुशल श्रमिक के रूप में काम किया था। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उनका 24 दिन का भुगतान अकुशल श्रमिक के रूप में किया है। कहा कुशल श्रमिक के रूप में उन्हें 404 रुपये प्रतिदिन का भुगतान होना था, लेकिन उनका भुगतान अकुशल श्रमिक के रूप में केवल 202 रुपये भुगतान किया गया है। जिसमें उनके सैकड़ों रुपये विभागीय अधिकारियों ने बंदरबांट कर दिए।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने जो बिल और दस्तावेज जमा किए हैं, उन्हीं के आधार पर लाभार्थी का भुगतान किया गया है। भुगतान नियमानुसार किया गया है। -दृष्टि आनंद, खंड विकास अधिकारी, यमकेश्वर