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Rishikesh News: गंगा आरती में शामिल होकर नाना पाटेकर ने महसूस किया था भीतर का बदलाव
Thu, 08 Oct 2026 06:50 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Thu, 08 Oct 2026 06:50 PM IST
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- 29 सितंबर 2022 को ऋषिकेश पहुंचे थे अभिनेता, परमार्थ निकेतन की गंगा आरती में हुए थे शामिल
ऋषिकेश। अभिनय की दुनिया में अपने सशक्त और संवेदनशील किरदारों से अलग पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर का ऋषिकेश से भी एक भावनात्मक रिश्ता रहा। गंगा की निर्मल धारा और आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत नाना पाटेकर ने स्वयं स्वीकार किया था कि ऋषिकेश में गंगा आरती में शामिल होने के बाद उन्होंने अपने भीतर एक बदलाव महसूस किया।
29 सितंबर 2022 को ऋषिकेश पहुंचे नाना पाटेकर ने परमार्थ निकेतन में आयोजित गंगा आरती में भाग लिया था। मां गंगा की आरती और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया। इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि गंगा आरती में शामिल होने के बाद उन्हें अपने भीतर बदलाव महसूस हुआ। नाना पाटेकर का यह कथन केवल एक अभिनेता की आध्यात्मिक अनुभूति नहीं बल्कि गंगा और ऋषिकेश की उस शक्ति का एहसास भी था, जो देश-दुनिया से आने वाले लोगों को भीतर तक छूती है। परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर आरती के दौरान उन्होंने जिस श्रद्धा और आत्मीयता के साथ इस आध्यात्मिक अनुभव को महसूस किया वह उनकी ऋषिकेश यात्रा की एक खास स्मृति बन गया।
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ऋषिकेश। अभिनय की दुनिया में अपने सशक्त और संवेदनशील किरदारों से अलग पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर का ऋषिकेश से भी एक भावनात्मक रिश्ता रहा। गंगा की निर्मल धारा और आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत नाना पाटेकर ने स्वयं स्वीकार किया था कि ऋषिकेश में गंगा आरती में शामिल होने के बाद उन्होंने अपने भीतर एक बदलाव महसूस किया।
29 सितंबर 2022 को ऋषिकेश पहुंचे नाना पाटेकर ने परमार्थ निकेतन में आयोजित गंगा आरती में भाग लिया था। मां गंगा की आरती और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया। इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि गंगा आरती में शामिल होने के बाद उन्हें अपने भीतर बदलाव महसूस हुआ। नाना पाटेकर का यह कथन केवल एक अभिनेता की आध्यात्मिक अनुभूति नहीं बल्कि गंगा और ऋषिकेश की उस शक्ति का एहसास भी था, जो देश-दुनिया से आने वाले लोगों को भीतर तक छूती है। परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर आरती के दौरान उन्होंने जिस श्रद्धा और आत्मीयता के साथ इस आध्यात्मिक अनुभव को महसूस किया वह उनकी ऋषिकेश यात्रा की एक खास स्मृति बन गया।
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