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उत्तराखंड में नशीली दवाओं का उपयोग प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक
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एम्स ऋषिकेश में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विचार व्यक्त करते विशेषज्ञ चिकित्सक।।
- फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। उत्तराखंड राज्य में नशीली दवाओं का उपयोग प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है। हालांकि, सामाजिक कलंक और नशे की लत के कारण उपचार की मांग बहुत कम है, जिसे एक नैतिक विफलता माना जाता है। लेकिन एक बार इलाज के लिए लाए जाने के बाद रोगी के स्वास्थ्य में सुधार होने लगता है। यह बात एम्स में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी में निकलकर सामने आई। संगोष्ठी का विषय सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य : अधिक से अधिक निवेश, ज्यादा से ज्यादा पहुंच’ रखा गया था।
जिसमें बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य विश्वव्यापी बीमारी है, जिसके मद्देनजर वर्ष-1992 से विश्वभर में हर वर्ष 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
मानसिक बीमारियों में चिंता विकार, डिप्रेसिव डिसऑर्डर, बाइपोलर डिसऑर्डर, साइकॉटिक डिसऑर्डर और सब्सटेंस यूज्ड डिसऑर्डर शामिल हैं, जिनमें से सब्सटेंस यूज्ड डिसऑर्डर सबसे आम बीमारी है। एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. रवि गुप्ता व नशे की लत के विशेषज्ञ डॉ. अनिरुद्ध बसु ने बताया कि नशीली दवाओं और शराब का सेवन बड़ी समस्या है। मादक द्रव्यों के सेवन या लत को वर्तमान में मस्तिष्क तंत्रिका सर्किट का एक विकार माना जाता है, जो प्रतिकूल पारिवारिक या सामाजिक परिस्थितियों से बिगड़ जाता है। इसकी बड़ी युवा आबादी और उच्च बेरोजगारी के कारण युवा विशेषरूप से कमजोर हैं।
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मरीजों के लिए हेल्पलाइन नंबर
एम्स निदेशक प्रो रवि कांत ने बताया कि एम्स ऋषिकेश ने ड्रग ट्रीटमेंट सेंटर (डीटीसी) परियोजना विकसित की है। इस परियोजना के तहत सभी आधुनिक उपचार, अनुभवी चिकित्सक और दवाएं वर्तमान में संस्थान में शराब से संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए उपलब्ध हैं। जिनमें अधिकांश दवाएं मरीजों को मुफ्त में दी जाती हैं।
निदेशक ने बताया कि शराब और नशीली दवाओं की समस्या से जूझ रहे मरीज डीटीसी हेल्पलाइन नंबर- 7456897874 पर ( सोमवार से शुक्रवार सुबह 8-30 से सांय 5-30 बजे और शनिवार को सुबह 8.30 बजे से 2 बजे तक) दूरभाष संपर्क कर सकते हैं।
--विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस... जोड़
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जीवन की हर समस्या को एक चुनौती की तरह लीजिए: स्वामी चिदानंद
ऋषिकेश। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि बीमारी चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, बीमारी तो बीमारी है, जो हमारे स्वास्थ्य और गतिविधियों को प्रभावित करती है। इसलिए उसका इलाज होना चाहिए। जिस प्रकार हम शारीरिक समस्याओं पर खुलकर बात करते हैं और उनका इलाज कराते हैं, उसी प्रकार मानसिक समस्याओं पर भी खुलकर बात की जाए, ताकि उसका भी इलाज किया जा सके।
मानसिक रोगी के साथ करें सामान्य व्यवहार
एसआरएचयू में चलाया गया जागरूकता अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
डोईवाला। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर एसआरएचयू के हिमालयन अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से जागरूकता अभियान को चलाया गया। लोगों को मानसिक रोग के लक्षण और बचाव के विषय में जानकारियां दी गई।
शनिवार को मनोचिकित्सा विभाग की ओर ओपीडी में आने वाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। विभाग के डॉ. प्रियरंजन अविनाश ने कहा कि वर्तमान में कई कारणों से लोग तनाव और अन्य मानसिक बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। कई बार यह रोग इतना बढ़ जाता है कि रोगी का आत्महत्या के ख्याल आने लगते है। डॉ. रोबिन विक्टर ने कहा कि मानसिक रोगी के साथ सामान्य व्यवहार करना चाहिए। मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति की देखभाल करनी चाहिए। कहा कि यदि कोई व्यक्ति उदास रहता है, परिवार से अलग रहता है, मूड बार बार बदलता है और असामान्य बर्ताव करता है तो उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। इस दौरान डॉ. रूपाली रोहतगी, डॉ. शर्मी नेगी, डॉ. अरजिंदर पाल, डॉ. अंशु आदि ने भी लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।
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जिसमें बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य विश्वव्यापी बीमारी है, जिसके मद्देनजर वर्ष-1992 से विश्वभर में हर वर्ष 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
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मानसिक बीमारियों में चिंता विकार, डिप्रेसिव डिसऑर्डर, बाइपोलर डिसऑर्डर, साइकॉटिक डिसऑर्डर और सब्सटेंस यूज्ड डिसऑर्डर शामिल हैं, जिनमें से सब्सटेंस यूज्ड डिसऑर्डर सबसे आम बीमारी है। एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. रवि गुप्ता व नशे की लत के विशेषज्ञ डॉ. अनिरुद्ध बसु ने बताया कि नशीली दवाओं और शराब का सेवन बड़ी समस्या है। मादक द्रव्यों के सेवन या लत को वर्तमान में मस्तिष्क तंत्रिका सर्किट का एक विकार माना जाता है, जो प्रतिकूल पारिवारिक या सामाजिक परिस्थितियों से बिगड़ जाता है। इसकी बड़ी युवा आबादी और उच्च बेरोजगारी के कारण युवा विशेषरूप से कमजोर हैं।
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मरीजों के लिए हेल्पलाइन नंबर
एम्स निदेशक प्रो रवि कांत ने बताया कि एम्स ऋषिकेश ने ड्रग ट्रीटमेंट सेंटर (डीटीसी) परियोजना विकसित की है। इस परियोजना के तहत सभी आधुनिक उपचार, अनुभवी चिकित्सक और दवाएं वर्तमान में संस्थान में शराब से संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए उपलब्ध हैं। जिनमें अधिकांश दवाएं मरीजों को मुफ्त में दी जाती हैं।
निदेशक ने बताया कि शराब और नशीली दवाओं की समस्या से जूझ रहे मरीज डीटीसी हेल्पलाइन नंबर- 7456897874 पर ( सोमवार से शुक्रवार सुबह 8-30 से सांय 5-30 बजे और शनिवार को सुबह 8.30 बजे से 2 बजे तक) दूरभाष संपर्क कर सकते हैं।
--विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस... जोड़
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जीवन की हर समस्या को एक चुनौती की तरह लीजिए: स्वामी चिदानंद
ऋषिकेश। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि बीमारी चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, बीमारी तो बीमारी है, जो हमारे स्वास्थ्य और गतिविधियों को प्रभावित करती है। इसलिए उसका इलाज होना चाहिए। जिस प्रकार हम शारीरिक समस्याओं पर खुलकर बात करते हैं और उनका इलाज कराते हैं, उसी प्रकार मानसिक समस्याओं पर भी खुलकर बात की जाए, ताकि उसका भी इलाज किया जा सके।
मानसिक रोगी के साथ करें सामान्य व्यवहार
एसआरएचयू में चलाया गया जागरूकता अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
डोईवाला। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर एसआरएचयू के हिमालयन अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से जागरूकता अभियान को चलाया गया। लोगों को मानसिक रोग के लक्षण और बचाव के विषय में जानकारियां दी गई।
शनिवार को मनोचिकित्सा विभाग की ओर ओपीडी में आने वाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। विभाग के डॉ. प्रियरंजन अविनाश ने कहा कि वर्तमान में कई कारणों से लोग तनाव और अन्य मानसिक बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। कई बार यह रोग इतना बढ़ जाता है कि रोगी का आत्महत्या के ख्याल आने लगते है। डॉ. रोबिन विक्टर ने कहा कि मानसिक रोगी के साथ सामान्य व्यवहार करना चाहिए। मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति की देखभाल करनी चाहिए। कहा कि यदि कोई व्यक्ति उदास रहता है, परिवार से अलग रहता है, मूड बार बार बदलता है और असामान्य बर्ताव करता है तो उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। इस दौरान डॉ. रूपाली रोहतगी, डॉ. शर्मी नेगी, डॉ. अरजिंदर पाल, डॉ. अंशु आदि ने भी लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।