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Rishikesh News: एम्स में माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी से जुड़ी बारीकियां सीखीं

Mon, 10 Aug 2026 07:15 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Updated Mon, 10 Aug 2026 07:15 PM IST
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Learned the nuances of microvascular surgery at AIIMS
- वर्ल्ड प्लास्टिक सर्जरी डे पर आयोजित कार्यशाला में माइक्रोसर्जिकल तकनीकों का हुआ प्रशिक्षण
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ऋषिकेश। वर्ल्ड प्लास्टिक सर्जरी डे पर एम्स के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी पर कार्यशाला आयोजित की। इसमें जटिल चोटों, कैंसर के बाद अंगों के पुनर्निर्माण और क्षतिग्रस्त अंगों की कार्यक्षमता बहाल करने से जुड़ी आधुनिक माइक्रोसर्जिकल तकनीकों का रेजिडेंट्स और सर्जिकल ट्रेनीज को विशेषज्ञों की निगरानी में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। मुख्य अतिथि एम्स निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने कहा कि माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी ने रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी में बड़ा बदलाव किया है। जीवित ऊतकों को उनकी रक्त आपूर्ति के साथ स्थानांतरित कर जटिल मरीजों के अंगों का आकार और कार्यक्षमता बहाल की जा सकती है। उन्होंने नियमित कार्यशाला और सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण पर जोर दिया। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) विशाल मागो ने चेहरे और पैरों की जटिल समस्याओं के उपचार में माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की भूमिका बताते हुए नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करने की बात कही। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और विशेष माइक्रोसर्जिकल उपकरणों से माइक्रोवैस्कुलर एनास्टोमोसिस यानी रक्त वाहिकाओं को जोड़ने की तकनीक का व्यावहारिक अभ्यास किया। इसका उद्देश्य चिकित्सकों की तकनीकी दक्षता बढ़ाकर मरीजों के उपचार परिणाम बेहतर करना रहा।कार्यक्रम में डीन एकेडमिक्स प्रो. (डॉ.) सौरभ वार्ष्णेय, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी सत्य श्री, डॉ. देबरती, डॉ. मधुबरी वाथुल्या, डॉ. अक्षय कपूर आदि मौजूद रहे।


जटिल चोटों से अंग बचाने तक उपयोगी
विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी में माइक्रोसर्जिकल तकनीक बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। जटिल चोटों, कैंसर के बाद शरीर के अंगों के पुनर्निर्माण, अंगों को बचाने (लिम्ब साल्वेज) और अंगों की कार्यक्षमता बहाल करने जैसे मामलों में इसका इस्तेमाल महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। इस तकनीक के जरिये शरीर के एक हिस्से से जीवित ऊतक को उसकी रक्त आपूर्ति के साथ दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना संभव हुआ है।
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