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उत्तराखंडी लोक वाद्य यंत्रों की सात दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
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ऋषिकेश। नगर निगम ऋषिकेश, नमामि गंगे प्रकोष्ठ उमंग और हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंडी लोक वाद्यों पर केंद्रित कार्यशाला ‘हिमालयी निनाद’ का शनिवार को शुभारंभ हो गया। इस सात दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन नगर निगम मेयर अनिता ममगाईं ने किया। जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार व नमामि गंगे के संयुक्त सचिव जगमोहन गुप्ता ने भी कार्यशाला में उपस्थित होकर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।
गौरा देवी चौक के पास स्थित जीएमवीएन गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यशाला में मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि उत्तराखंड की लुप्त हो रही वादन कला की संस्कृति को जागृत करने के लिए यह अनोखा प्रयास किया जा रहा है। लोक कला के संरक्षण के लिए किया जा रहा यह प्रयास कलाकारों का मनोबल बढ़ाने में सहयोग करेगा।
कार्यक्रम के संयोजक गणेश खुगशाल गणी ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वोकल फोर लोकल के लिए नगर निगम ने पर्वतीय अंचल की लोक संस्कृति के प्रतीक यहां के लोक वाद्यों की धुनों को संजोने के लिए नायाब पहल की है। गणी ने बताया कि कार्यशाला पूरी होने पर गंगा घाट पर कार्यक्रम आयोजित कर एक प्रस्तुतिकरण किया जाएगा, जिसमें सभी कलाकार उत्तराखंडी वेशभूषा में अपनी प्रस्तुति देंगे। कार्यशाला में ढोली गजेंद्र लाल ढांढरी पौड़ी से, दमौ वादक अजय चंद्रबदनी टिहरी से, मशकवीन वादक विनोद चंद्रबदनी से, नगाड़ा वादक गोविंद लाल भरतपुर रामनगर से, रौंटी वादक सुरेंद्र प्रकाश जखल अल्मोड़ा से, रणसिंहा वादक अनिल वर्मा और मुन्ना दास चकराता से, डौंर वादक पवन चौहान चौंदकोट नौगांवखाल से, थाली वादक सौरभ नेगी धरासू मवालस्यूं, हुड़का वादक सुरेंद्र बैसवाल सिल्ला भटवेड़ी देहरादून से, बांसुरी वादक कैलाश ध्यानी गिंवाली लैंसडौन और कार्यशाला निर्देशक मोछंग वादक रामचरण जुयाल पौड़ी से आकर प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम में डॉ. सर्वेश उनियाल, राज्य परियोजना प्रबंधन ग्रुप नमामि गंगे उत्तराखंड के संदीप उनियाल, नमामि गंगे की सह संयोजक नेहा नेगी आदि ने प्रतिभाग किया।
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गौरा देवी चौक के पास स्थित जीएमवीएन गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यशाला में मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि उत्तराखंड की लुप्त हो रही वादन कला की संस्कृति को जागृत करने के लिए यह अनोखा प्रयास किया जा रहा है। लोक कला के संरक्षण के लिए किया जा रहा यह प्रयास कलाकारों का मनोबल बढ़ाने में सहयोग करेगा।
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कार्यक्रम के संयोजक गणेश खुगशाल गणी ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वोकल फोर लोकल के लिए नगर निगम ने पर्वतीय अंचल की लोक संस्कृति के प्रतीक यहां के लोक वाद्यों की धुनों को संजोने के लिए नायाब पहल की है। गणी ने बताया कि कार्यशाला पूरी होने पर गंगा घाट पर कार्यक्रम आयोजित कर एक प्रस्तुतिकरण किया जाएगा, जिसमें सभी कलाकार उत्तराखंडी वेशभूषा में अपनी प्रस्तुति देंगे। कार्यशाला में ढोली गजेंद्र लाल ढांढरी पौड़ी से, दमौ वादक अजय चंद्रबदनी टिहरी से, मशकवीन वादक विनोद चंद्रबदनी से, नगाड़ा वादक गोविंद लाल भरतपुर रामनगर से, रौंटी वादक सुरेंद्र प्रकाश जखल अल्मोड़ा से, रणसिंहा वादक अनिल वर्मा और मुन्ना दास चकराता से, डौंर वादक पवन चौहान चौंदकोट नौगांवखाल से, थाली वादक सौरभ नेगी धरासू मवालस्यूं, हुड़का वादक सुरेंद्र बैसवाल सिल्ला भटवेड़ी देहरादून से, बांसुरी वादक कैलाश ध्यानी गिंवाली लैंसडौन और कार्यशाला निर्देशक मोछंग वादक रामचरण जुयाल पौड़ी से आकर प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम में डॉ. सर्वेश उनियाल, राज्य परियोजना प्रबंधन ग्रुप नमामि गंगे उत्तराखंड के संदीप उनियाल, नमामि गंगे की सह संयोजक नेहा नेगी आदि ने प्रतिभाग किया।
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