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सर्वे रिपोर्ट में लक्ष्मणझूला पुल जर्जर, पुल पर कैसे होगी आवाजाही
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लक्ष्मणझूला पुल की मियाद खत्म हो चुकी है। इस पुल पर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही अब खतरे से खाली नहीं है। इस बात का खुलासा लोक निर्माण विभाग की सर्वे रिपोर्ट में भी हो चुका है। उसके बाद भी तपोवन और लक्ष्मणझूला के व्यापारी लक्ष्मणझूला पुल को खोलने की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में यदि फिर से पुल पर आवाजाही हुई और इस दौरान कोई घटना घटित हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, इसका कोई जवाब नहीं दे रहा है।
टिहरी और पौड़ी जनपद की सीमा को जोड़ने के लिए वर्ष 1929 में गंगा नदी के ऊपर लक्ष्मणझूला पुल का निर्माण हुआ था। पुल बनने के बाद वर्ष 1930 में पुल पर आवाजाही शुरू हुई थी। करीब 89 साल बाद पुल की मियाद खत्म होने लगी। दुर्घटना की आशंका के चलते पुल का तकनीकी सर्वे किया गया। सर्वे के आधार पर तत्कालीन अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के आदेश पर जुलाई 2019 को पुल पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई थी। पुल पर आवाजाही न हो इसके लिए पुल के दोनों ओर डिवाइडर लगा दिए गए थे, लेकिन तब भी स्थानीय व्यापारियों और लोगों की जोर जबरदस्ती के कारण अगस्त 2019 में झूला पुल को फिर से आवाजाही के लिए खोल दिया गया। करीब ढाई वर्ष तक देशी, विदेशी पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर पुल पर आवाजाही कर रहे थे।
अप्रैल में झूला पुल की तार टूटने से टिहरी जिलाधिकारी ईवा श्रीवास्तव के आदेश पर 16 अप्रैल की रात को पुल पर आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंध कर दिया गया था। तब से झूला पुल पर आवाजाही बंद है। इस पर भी स्थानीय व्यापारी नाखुश हैं। व्यापारी पुल को खोलने की मांग कर रहे हैं।
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टिहरी और पौड़ी जनपद की सीमा को जोड़ने के लिए वर्ष 1929 में गंगा नदी के ऊपर लक्ष्मणझूला पुल का निर्माण हुआ था। पुल बनने के बाद वर्ष 1930 में पुल पर आवाजाही शुरू हुई थी। करीब 89 साल बाद पुल की मियाद खत्म होने लगी। दुर्घटना की आशंका के चलते पुल का तकनीकी सर्वे किया गया। सर्वे के आधार पर तत्कालीन अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के आदेश पर जुलाई 2019 को पुल पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई थी। पुल पर आवाजाही न हो इसके लिए पुल के दोनों ओर डिवाइडर लगा दिए गए थे, लेकिन तब भी स्थानीय व्यापारियों और लोगों की जोर जबरदस्ती के कारण अगस्त 2019 में झूला पुल को फिर से आवाजाही के लिए खोल दिया गया। करीब ढाई वर्ष तक देशी, विदेशी पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर पुल पर आवाजाही कर रहे थे।
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अप्रैल में झूला पुल की तार टूटने से टिहरी जिलाधिकारी ईवा श्रीवास्तव के आदेश पर 16 अप्रैल की रात को पुल पर आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंध कर दिया गया था। तब से झूला पुल पर आवाजाही बंद है। इस पर भी स्थानीय व्यापारी नाखुश हैं। व्यापारी पुल को खोलने की मांग कर रहे हैं।
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