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Rishikesh News: लकड़ी तस्करों को कोर्ट तक लेकर जाएगा विभाग

Mon, 28 Aug 2023 12:46 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 28 Aug 2023 12:46 AM IST
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In the case of illegal felling of trees in the Kanasar range
देवदार और कैल की लकड़ी की बरामदगी का बड़ा साक्ष्य विभाग के हाथ
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आरोपियों से पूछताछ के लिए 12 सवालों की सूची तैयार

कनासर रेंज में पेड़ों के अवैध कटान के मामले में वन विभाग लकड़ी तस्करों पर नजीर देने वाली कार्रवाई करने जा रहा है। अटकलें लगाई जा रही थी कि लकड़ी तस्करों पर अब तक का सबसे भारी भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन पहली बार वन विभाग के पास तस्करों के ठिकानों से लकड़ी बरामद होने का पुख्ता सबूत हैं। ऐसे में विभाग जांच पूरी होने के बाद मामले को न्यायालय तक ले जाकर आरोपियों को सजा दिलाने की तैयारी कर चुका है।

कनासर रेंज में पेड़ों के अवैध कटान का मामला नया नहीं है। अंदरखाने अधिकारी भी मानते हैं कि देवदार, कैल जैसे कीमती पेडों का अवैध कटान पहले भी होता रहा है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटान हो रहा था, इसकी अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। पूर्व में कभी वन विभाग को तस्करों के घरों से लकड़ी बरामद नहीं हुई थी। यह पहला मामला है कि वन विभाग को तस्करों के मकानों, स्कूलों आदि स्थानों से करीब 4100 स्लीपर बरामद हुए हैं।
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विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय वन अधिनियम के तहत होने वाली कार्रवाई में साक्ष्य कि अहम भूमिका होती है। अधिकांश मामलों में साक्ष्य नहीं मिलने का फायदा आरोपी को मिल जाता है। इस बार मौके से लकड़ी बरामद हुई है। विभाग के पास पर्याप्त साक्ष्य है तो वह इस बार जुर्माने से रिकवरी के बजाय सीधा आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी कर रहा है।
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इसके लिए न्यायालय में वाद दायर करने को लेकर विधि सलाहकारों से भी बातचीत की जा रही है। आरोपियों के ठिकानों पर दबिश देने के साथ ग्रामीणों और मुखबिरों के माध्यम से विभाग यह संदेश लकड़ी तस्करों तक भी पहुंचा चुका है। यही कारण है लकड़ी तस्कर अपने घरों को छोड़कर फरार हो गए हैं।





आरोपियों से पूछताछ के लिए 12 सवालों की सूची तैयार

- जांच अधिकारी मुकुल कुमार ने आरोपियों को उप वन प्रभागीय कार्यालय, कालसी में प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। सूत्रों के अनुसार आरोपियों के लिए 12 सवालों की सूची तैयार की गई है, हालांकि सवालों की संख्या को पूछताछ में सामने आने वाल तथ्यों के आधार पर बढ़ाया भी जा सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार वन अधिकारी के समक्ष दिए गया बयान न्यायालय में स्वीकार्य होता है। ऐसे में आरोपियों के बयान और जांच रिपोर्ट मामले में सबसे अहम होगी।





वन विभाग के बीच ही है तस्करों का मुखबिर

वन विभाग की टीम लगातार दो दिनों से मशक, रजाणू और बिन्सौन में लकड़ी तस्करों के ठिकानों पर दबिश दे रही है। यही नहीं कुछ आरोपियों के विकासनगर में छिपे होने की सूचना है। सूचना के आधार पर टीम ने विकासनगर में आरोपियों की तलाश के लिए अभियान चलाया था। टीम दबिश और रेकी की कार्रवाई पर जाने के लिए निजी वाहनों का प्रयोग कर रही है, लेकिन विभाग का ही कोई कर्मचारी जंगलात चौकी पार करने से पहले ही लकड़ी तस्करों को टीम के आने की सूचना दे रहा है। टीम को इस बात का शक हो चुका है और अधिकारी, विभागीय जयचंद को खोजकर कार्रवाई करने तैयारी कर रहे हैं।






एफआईआर और गिरफ्तारी से कमजोर होगा वाद



सूत्रों के अनुसार विभाग अगर पुलिस में एफआईआर करता तो आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया जाता। इसके बाद आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता। विभागीय सूत्रों के अनुसार वन अधिनियम के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों में आरोपी को जमानत मिल जाती है। अगर आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया जाए तो 48 घंटे में उसको न्यायालय के समक्ष पेश करना होगा, जहां से उसको फिर से जमानत मिल सकती है। विभाग नोटिस के बाद आरोपियों के अपना पक्ष न रखने की स्थिति में उनको फरार घोषित करने और कुर्की की कार्रवाई के लिए भी विधि राय ले रहा है।
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