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Rishikesh News: आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ पारंपरिक चिकित्सा में आगे बढ़ रहा एम्स
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Iआयुष विभाग में आर्युवेद, योगा, सिद्धा, होम्योपैथी व यूनानी चिकित्सा पद्धति की सेवाएं उपलब्धI
एम्स ऋषिकेश में मरीजों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ ही पारंपरिक चिकित्सा (आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी ) पद्धति उपलब्ध करा रहा है। जिससे मरीजों को स्वास्थ्य लाभ लेने में दोहरा फायदा हो रहा है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के लिए एम्स के आयुष विभाग में इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग की स्थापना की गई है।
वर्तमान में भागदौड़ की जिंदगी व अनियमित दिनचर्या के चलते आबादी का एक बड़ा हिस्सा कुछ ऐसी बीमारियों से ग्रसित है जिनका उपचार किसी एक चिकित्सा पद्धति से कारगर नहीं है। ऐसे मरीजों की चिकित्सा के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धति भी महत्वपूर्ण होती है। दोनों पद्धतियों के समागम से बेहतर उपचार की संभावनाएं बनती है।
इसी सब को देखते हुए एम्स में इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग की स्थापना की गई है। एम्स के आयुष विभाग में इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग का उद्घाटन बीते वर्ष 13 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डाॅ. भरती प्रवीण पवार ने की थी। आयुष विभाग में आर्युवेद, योगा, सिद्धा (दक्षिण भारत की चिकित्सा पद्धति), होम्योपैथी व यूनानी चिकित्सा पद्धति की सेवाएं उपलब्ध हैं।
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यहां एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के अलावा चार चिकित्साधिकारी तैनात हैं। इसके अलावा 8 पैरामेडिकल स्टाफ भी है। आयुष विभाग के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. श्रीलॉय मोहंती ने बताया कि विभाग में प्रतिदिन 30 से 40 ओपीडी होती हैं। प्राकृतिक चिकित्सा में जल चिकित्सा व मसाज चिकित्सा की सुविधा भी उपलब्ध है।
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Iएम्स में मरीजों को पारंपरिक चिकित्सा पद्धति भी उपलब्ध कराई जा रही है। भविष्य में एम्स में अंतर राष्ट्रीय होलिस्टिक हेल्थ सेंटर बनाए जाने की योजना है। - प्रो. मीनू सिंह, निदेशक, एम्स ऋषिकेशI
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एम्स ऋषिकेश में मरीजों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ ही पारंपरिक चिकित्सा (आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी ) पद्धति उपलब्ध करा रहा है। जिससे मरीजों को स्वास्थ्य लाभ लेने में दोहरा फायदा हो रहा है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के लिए एम्स के आयुष विभाग में इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग की स्थापना की गई है।
वर्तमान में भागदौड़ की जिंदगी व अनियमित दिनचर्या के चलते आबादी का एक बड़ा हिस्सा कुछ ऐसी बीमारियों से ग्रसित है जिनका उपचार किसी एक चिकित्सा पद्धति से कारगर नहीं है। ऐसे मरीजों की चिकित्सा के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धति भी महत्वपूर्ण होती है। दोनों पद्धतियों के समागम से बेहतर उपचार की संभावनाएं बनती है।
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इसी सब को देखते हुए एम्स में इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग की स्थापना की गई है। एम्स के आयुष विभाग में इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग का उद्घाटन बीते वर्ष 13 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डाॅ. भरती प्रवीण पवार ने की थी। आयुष विभाग में आर्युवेद, योगा, सिद्धा (दक्षिण भारत की चिकित्सा पद्धति), होम्योपैथी व यूनानी चिकित्सा पद्धति की सेवाएं उपलब्ध हैं।
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यहां एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के अलावा चार चिकित्साधिकारी तैनात हैं। इसके अलावा 8 पैरामेडिकल स्टाफ भी है। आयुष विभाग के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. श्रीलॉय मोहंती ने बताया कि विभाग में प्रतिदिन 30 से 40 ओपीडी होती हैं। प्राकृतिक चिकित्सा में जल चिकित्सा व मसाज चिकित्सा की सुविधा भी उपलब्ध है।
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Iएम्स में मरीजों को पारंपरिक चिकित्सा पद्धति भी उपलब्ध कराई जा रही है। भविष्य में एम्स में अंतर राष्ट्रीय होलिस्टिक हेल्थ सेंटर बनाए जाने की योजना है। - प्रो. मीनू सिंह, निदेशक, एम्स ऋषिकेशI