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ड्रैगन भी हारा रामपाल के हौसले के आगे
rishikesh
Updated Wed, 26 Oct 2016 01:16 AM IST
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रामपाल
- फोटो : amar ujala
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रामपाल के हौसले को सलाम। यह वह नाम है, जिसके आगे ड्रैगन भी हार गया। 70 साल के रामपाल बीते 21 साल से लोगों को ईको फ्रेंडली दीपावली मनाने का संदेश देते आ रहे हैं। वह 1995 से मिट्टी के बर्तन और दीये बना रहे हैं। इस दौरान मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने वाले अन्य लोगों की तरह ड्रैगन ने उनके कारोबार पर भी हमला किया। लेकिन, अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते उन्होंने उसे परास्त कर दिया।
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ऐसा नहीं है कि उनके सामने चुनौती नहीं थी। एक समय यह भी आया, जब उन्होंने नुकसान के चलते कारोबार छोड़ने का मन बना लिया। लेकिन, उनकी अंतरात्मा ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया। अब फिर से लोगों का रुझान मिट्टी के दीयों की ओर बढ़ने से रामपाल गदगद हैं। जिस उत्साह के साथ लोग उनके पास दीयों की डिमांड लेकर पहुंच रहे हैं। उससे उन्हें दीपावली तक अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है।
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हीरालाल मार्ग परशुराम चौक निवासी रामपाल बताते हैं कि उन्होंने ग्राहकों को लुभाने के लिए तमाम तरह के दीये तैयार किए हैं।
यादों में डूबते हुए बताते हैं कि जब मिट्टी के दीये बनाने शुरू किए थे, तब आधा किलो अनाज में 20-25 दीये बेचता था। कुछ वर्षों बाद 10 रुपये में 25-30 दीये बेचने शुरू कर दिए। फिर कहते हैं कि अब स्थिति यह हो गई है कि 10 रुपये में 12 दीये बेचने पड़ रहे हैं। अब लोगों में फिर से मिट्टी के दीयों का क्रेज बढ़ रहा है। अभी एक दिन में औसतन 400 से 500 दीये बिक रहे हैं।
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दीपावली में करें मिट्टी के दीये का उपयोग
कुम्हार रामपाल दीपावली त्योहार में लोगों को चाइना वस्तुओं को छोड़ मिट्टी के दिए जलाने का संदेश दे रहे हैं। अपनी दुकान के बाहर ग्राहकों को पोस्टर और बैनर के माध्यम से स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने का आह्वान कर रहे हैं।
मिट्टी के दिए जलाने से पर्यावरण शुद्ध रहता है। दीपावली के दिन जिन घरों में मिट्टी के दिए जलते हैं, मां लक्ष्मी उसी घर में अपना निवास स्थान ढूंढती हैं। मिट्टी के दीप जलाने से घर का वातावरण सुगंधमय हो जाता है। शास्त्रों में भी इस बात का उल्लेख है कि जब भगवान राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या पहुंचे तो लोगों ने खुशी में मिट्टी के दीये जलाए थे। जब भी उत्साह का अवसर आए तो घर में मिट्टी के दीये जरूर जलाने चाहिए। - पं. सुमित कपरूवान