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कोरोना की आड़ में हमला बोल सकता है डेंगू
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ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स (एम्स) के मुताबिक डेंगू का संक्रमण कोरोना को ओवरलैप कर सकता है। कोरोना और डेंगू के अधिकांश लक्षण एक जैसे हैं। पैथोलॉजिकल जांच के बाद ही संक्रमण का पता चल पाता है। ऐसे में कोरोनाकाल में डेंगू को लेकर भी सावधानी बरतना बेहद जरुरी है। एम्स ने स्कूलों और कॉलेज में संक्रमण के खतरे को लेकर भी चेताया है।
एम्स ऋषिकेश निदेशक प्रोफेसर रविकांत का कहना है कि कोरोना और डेंगू दोनों ही संक्रमण घातक है। उन्होंने बताया कि डेंगू एक मौसमी बीमारी है। जुलाई से अक्टूबर के बीच का समय डेंगू का संक्रमण काल होता है। मादा एडिज एजिप्टी मच्छर के काटने से व्यक्ति संक्रमित होता है। डेंगू संक्रमित व्यक्ति की प्लेटलेट्स तेजी से कम होना शुरू कर देती है। संक्रमित व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। खासकर कम आयु के बच्चों, डायबिटीज, अस्थमा तथा हृदय रोगियों को संक्रमण की चपेट में आने का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने बताया कि डेंगू के इलाज का अब तक कोई कारगर टीका बाजार में उपलब्ध नहीं है।
एम्स ऋषिकेश के सामुदायिक एवं फेमिली मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और आउटरीच सेल के नोडल अफसर डॉ.संतोष कुमार ने बताया कि तेज बुखार की शिकायत पर तुरंत चिकित्सक का परामर्श लेना बहुत जरूरी है। समय पर इलाज शुरू होने से रोग के गंभीर लक्षणों की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि खांसी और बुखार जैसे लक्षणों वाले मरीजों को अनिवार्य रूप से मास्क पहनना चाहिए।
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तीसरा और चौथा स्ट्रेन घातक
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि डेंगू वायरस के चार स्ट्रेन होते हैं। पहले से ही किसी एक स्ट्रेन से संक्रमित व्यक्ति यदि वायरस के तीसरे या चौथे स्ट्रेन से भी संक्रमित हो जाए तो मरीज रक्तस्रावी बुखार से ग्रसित हो जाता है। अत्याधिक रक्तस्त्राव से मरीज की जान को खतरा पैदा हो जाता है।
कोरोना और डेंगू में अंतर समझें
कोरोना सांस के जरिए से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह उस दशा में फैलता है, जब कोई कोविड संक्रमित व्यक्ति खांसता है, छींकता है या किसी दूसरे से एकदम करीब से बातचीत करता है। कोरोना में तीव्र बुखार आता है। लेकिन नाक से खून आने की समस्या नहीं होती है। जबकि डेंगू का कारण एक प्रकार का वायरस है, जो मच्छर से फैलता है। शरीर में प्रवेश करने के बाद डेंगू का वायरस तीन से 10 दिनों के भीतर लक्षण पैदा करता है। अगर शरीर में तेज बुखार के साथ लाल रंग के चकत्ते या रक्तस्राव होने लगे तो यह डेंगू का रक्तस्रावी बुखार है।
डेंगू के लक्षण
- सामान्य बुखार से शुरु होने बाद तापामन 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। सिर दर्द, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना, बेचैनी, आंखों के पीछे दर्द, यकृत में फैलाव होना, ग्रंथियों में सूजन और त्वचा पर लाल चकत्ते होना डेंगू के लक्षण हैं। इसका बुखार तीन प्रकार का होता है। हल्का डेंगू बुखार, डेंगू रक्तस्रावी बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम।
बचाव -
- पानी के बर्तन या टंकी को हर समय ढककर रखें।
- साफ और स्वच्छ पानी का ही सेवन करें।
- खाली बर्तनों की सतहों को अच्छी तरह साफ करने के बाद उन्हें उल्टा करके रखना चाहिए।
- बरसात के दिनों में फुल बाजू के कपड़े पहनने व मच्छरदानी का उपयोग करने से मच्छरों के प्रकोप से बचा जा सकता है।
- बरसात के मौसम में अपने आसपास पानी जमा नहीं होने दें।
- ठहरे हुए पानी में कीटनाशक दवा का नियमित तौर पर छिड़काव करें
- लक्षण नजर आने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श से रक्त की जांच करानी चाहिए।
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एम्स ऋषिकेश निदेशक प्रोफेसर रविकांत का कहना है कि कोरोना और डेंगू दोनों ही संक्रमण घातक है। उन्होंने बताया कि डेंगू एक मौसमी बीमारी है। जुलाई से अक्टूबर के बीच का समय डेंगू का संक्रमण काल होता है। मादा एडिज एजिप्टी मच्छर के काटने से व्यक्ति संक्रमित होता है। डेंगू संक्रमित व्यक्ति की प्लेटलेट्स तेजी से कम होना शुरू कर देती है। संक्रमित व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। खासकर कम आयु के बच्चों, डायबिटीज, अस्थमा तथा हृदय रोगियों को संक्रमण की चपेट में आने का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने बताया कि डेंगू के इलाज का अब तक कोई कारगर टीका बाजार में उपलब्ध नहीं है।
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एम्स ऋषिकेश के सामुदायिक एवं फेमिली मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और आउटरीच सेल के नोडल अफसर डॉ.संतोष कुमार ने बताया कि तेज बुखार की शिकायत पर तुरंत चिकित्सक का परामर्श लेना बहुत जरूरी है। समय पर इलाज शुरू होने से रोग के गंभीर लक्षणों की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि खांसी और बुखार जैसे लक्षणों वाले मरीजों को अनिवार्य रूप से मास्क पहनना चाहिए।
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तीसरा और चौथा स्ट्रेन घातक
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि डेंगू वायरस के चार स्ट्रेन होते हैं। पहले से ही किसी एक स्ट्रेन से संक्रमित व्यक्ति यदि वायरस के तीसरे या चौथे स्ट्रेन से भी संक्रमित हो जाए तो मरीज रक्तस्रावी बुखार से ग्रसित हो जाता है। अत्याधिक रक्तस्त्राव से मरीज की जान को खतरा पैदा हो जाता है।
कोरोना और डेंगू में अंतर समझें
कोरोना सांस के जरिए से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह उस दशा में फैलता है, जब कोई कोविड संक्रमित व्यक्ति खांसता है, छींकता है या किसी दूसरे से एकदम करीब से बातचीत करता है। कोरोना में तीव्र बुखार आता है। लेकिन नाक से खून आने की समस्या नहीं होती है। जबकि डेंगू का कारण एक प्रकार का वायरस है, जो मच्छर से फैलता है। शरीर में प्रवेश करने के बाद डेंगू का वायरस तीन से 10 दिनों के भीतर लक्षण पैदा करता है। अगर शरीर में तेज बुखार के साथ लाल रंग के चकत्ते या रक्तस्राव होने लगे तो यह डेंगू का रक्तस्रावी बुखार है।
डेंगू के लक्षण
- सामान्य बुखार से शुरु होने बाद तापामन 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। सिर दर्द, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना, बेचैनी, आंखों के पीछे दर्द, यकृत में फैलाव होना, ग्रंथियों में सूजन और त्वचा पर लाल चकत्ते होना डेंगू के लक्षण हैं। इसका बुखार तीन प्रकार का होता है। हल्का डेंगू बुखार, डेंगू रक्तस्रावी बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम।
बचाव -
- पानी के बर्तन या टंकी को हर समय ढककर रखें।
- साफ और स्वच्छ पानी का ही सेवन करें।
- खाली बर्तनों की सतहों को अच्छी तरह साफ करने के बाद उन्हें उल्टा करके रखना चाहिए।
- बरसात के दिनों में फुल बाजू के कपड़े पहनने व मच्छरदानी का उपयोग करने से मच्छरों के प्रकोप से बचा जा सकता है।
- बरसात के मौसम में अपने आसपास पानी जमा नहीं होने दें।
- ठहरे हुए पानी में कीटनाशक दवा का नियमित तौर पर छिड़काव करें
- लक्षण नजर आने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श से रक्त की जांच करानी चाहिए।