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आमबाग और पशुलोग में निर्माण कार्यों पर लगा प्रतिबंध, मचा हड़कंप

Thu, 08 Aug 2019 01:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 08 Aug 2019 01:45 AM IST
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Construction will not be possible in Aambagh and Pashulok
स्थानीय लोगों की शिकायतें सुनते एचआरडीए के सचिव। - फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। आमबाग और पशुलोक क्षेत्र में अब किसी भी तरह का नया निर्माण नहीं हो सकेगा। ये प्रतिबंध हाईकोर्ट के आदेश में लगाया गया है। आदेश की प्रति आने के बाद तत्काल स्थानीय प्रशासन सहित हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) सक्रिय हो उठा। इसी क्रम में बुधवार को अधिकारियों और कर्मचारियों का अमला आमबाग और पशुलोक क्षेत्र के सर्वे को पहुंचा। इस दौरान सैकड़ों निर्माण कार्यों को तत्काल रुकवाया गया। हिदायत दी गई कि निर्माण कार्य न रोका गया तो बिल्डिंग को सील किया जाएगा। ताजा आदेश के बाद बिल्डर लॉबी में भी करोड़ों डूबने की आशंका में खलबली मच गई है।
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हाईकोर्ट के आदेशों पर प्रशासनिक अमल होते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। एचआरडीए सचिव पूरे अमले के साथ मौका का मुआयना करने पहुंचे। इस दौरान दर्जन भर से ज्यादा व्यावसायिक निर्माणों को रुकवाया और काम कर रहे मजदूरों को मौके से खदेड़ा गया। अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में खलबली का माहौल बना रहा। कार्रवाई रुकवाने के लिए कई लोग गिड़गिड़ाते दिखे। उधर, बिना नक्शे के बहुमंजिला व्यवसायिक और रिहायशी भवन बनवा रहे बिल्डर दूरे से ही कार्रवाई की थाह लेते रहे। कई बिल्डरों ने रसूख और पहुंच का इस्तेमाल करते हुए खुद को कार्रवाई से बचाने की कोशिश की। इसके बावजूद कोर्ट के आदेशों पर हो रही कार्रवाई पर कोई सिफारिश काम न आ सकी। इस दौरान एचआरडीए सचिव केके मिश्रा, एसडीएम प्रेमलाल, एचआरडीए सहायक अभियंता एसके चौहान, आईडीपीएच चौकी इंचार्ज सत्येंद्र सिंह सहित स्थानीय प्रशासन के कई कर्मचारी मौजूद रहे।
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मुंह मांगे पैसे दूंगा...जानवर जमीन सब बेच दो
अफसरों की ओर से कार्रवाई और सर्वे के दौरान स्थानीय महिलाओं ने बताया कि बिल्डर उन्हें लगातार धमका रहे हैं। विस्थापितों की ज्यादातर जमीनें बिल्डरों ने औनेपौने दामों पर खरीद ली हैं। जो लोग नहीं बेचना चाह रहे हैं उन्हें बिल्डरों के गुर्गे पहले तो जमीन का मुंह मांगा दाम देने का लालच दे रहे हैं। इस पर भी न मानने वालों को धमकाया जा रहा है। मौके पर मौजूद एचआरडीए सचिव केके मिश्र और एसडीएम प्रेमलाल ने महिलाओं को आश्वासन दिया कि निर्भीक होकर रहें। अब हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद कोई अवैध निर्माण हरगिज नहीं होने दिया जाएगा।
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बिना अनुमति खनन, नहर भी कब्जाई
भौतिक निरीक्षण के दौरान अवैध निर्माणों का अजीबोगरीब जाल अफसरों ने देखा। यहां बिना अनुमति के धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। यही नहीं भूमाफिया ने नगर विभाग की जमीन पर भी कब्जा करके गगनचुंबी इमारत खड़ी कर दी हैं। इस पर एसडीएम प्रेमलाल ने पूरी रिपोर्ट तलब कर नोटिस भेजा है। इसकी प्रति सिंचाई विभाग को भी भेजी गई है।
अब होगी नोटिस जारी करने की कार्रवाई
पशुलोक और आमबाग क्षेत्र में करीब डेढ़ सौ नव निर्माण हो रहे हैं। कोर्ट के आदेशों के बाद इन पर तलवार लटक गई है। सभी नए निर्माणों को रोकने के लिए कोर्ट के आदेश पर एचआरडीए नोटिस जारी करेगा। एचआरडीए सचिव ने बताया कि सभी निर्माणाधीन भवनों पर नोटिस चस्पा करने की तैयारियां हैं। इसके बावजूद कोई निर्माण कार्य नहीं रोकता है तो सील करने की कार्रवाई होगी।
निगरानी समिति गठित
कोर्ट के आदेशों पर हरहाल में अमल करने के लिए एचआरडीए सचिव ने एसडीएम से समन्वय कर एक निगरानी समिति का गठन किया है। सचिव केके मिश्रा ने बताया कि तहसीलदार, पटवारी, एचआरडीए के सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल होंगे। ये टीम रोजाना क्षेत्र का दौरा कर नव निर्माणों की आख्या भेजेगी। एसडीएम प्रेमलाल ने बताया कि टीम का गठन कर दिया गया है। टीम से रोजाना रिपोर्ट लेकर उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया जाएगा।
समिति के संघर्ष ने कर दिया कमाल
जन कंक्रीट को जंगलों को पनपने से शासन प्रशासन भी अंकुश नहीं लगा पाया था उसे विस्थापित संघर्ष समिति की मेहनत ने कर दिखाया है। समिति ने अवैध निर्माणों को रोकने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। समिति के अध्यक्ष जंगवीर सिंह चौहान ने बताया कि हमने लंबी लड़ाई लड़ी है। स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक भूमाफिया के खिलाफ शिकायत की। इसके बावजूद कोई राहत नहीं मिल पाई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जंगबहादुर का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद अब उम्मीद जगी है कि भूमाफियाओं के कहर से राहत मिल पाएगी।

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कोर्ट ने आमबाग और पशुलोक में नव निर्माणों पर रोक लगाने का आदेश पारित किया है। इसी क्रम में बुधवार को क्षेत्र का सर्वे किया गया। चल रहे निर्माणों को तत्काल प्रभाव से रुकवाया गया है। अब नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बावजूद जो निर्माण नहीं रुकेंगे उन्हें सील किया जाएगा। कोर्ट के आदेशों की प्रति डीएम देहरादून और एसएसपी देहरादून को भी भेजी गई है। चूंकि उपरोक्त दोनों क्षेत्र विस्थापित कॉलोनियों में शामिल हैं। यहां एचआरडीए से नक्शा पारित नहीं हो सकता है। इन क्षेत्रों में अभियान चलाकर निर्माणों को रुकवाया जाएगा।
-केके मिश्रा, सचिव, एचआरडीए

 विस्थापित संघर्ष समिति की महिलाओं से जानकारी लेते एचआरडीए के सचिव केके मिश्रा।

विस्थापित संघर्ष समिति की महिलाओं से जानकारी लेते एचआरडीए के सचिव केके मिश्रा। - फोटो : RISHIKESH

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