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महाकुंभ से पूर्व नए लक्ष्मणझूला पुल का निर्माण असंभव
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आगामी कुंभ से पूर्व नए लक्ष्मणझूला पुल का निर्माण पूरा हो पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। लोक निर्माण विभाग, नरेंद्रनगर अभी तक पुल की डीपीआर तक तैयार नहीं कर पाया है। हालांकि मुख्यमंत्री ने महाकुंभ से पूर्व पुल को तैयार करने के लिए आला अधिकारियों को निर्देशित किया है। लेकिन विभाग की सुस्त कार्यशैली से तय लक्ष्य पर निर्माण पूरा हो पाना लगभग मुश्किल नजर आ रहा है।
लोनिवि के अवर सहायक अभियंता रत्नेश सक्सेना ने बताया कि नए लक्ष्मणझूला पुल का डिजाइन काफी हाईटेक है। इसके तहत नए पुल के दोनों ओर केदारनाथ मंदिर का प्रतिरूप बनाया जाना है। अगर यह साधारण पुल होता तो इसकी इसकी डीपीआर और निर्माण शुरू होने में समय नहीं लगता। अभी तक नए पुल का जियो टेक्नीकल और टोपोलॉजिकल सर्वे के अलावा डिजाइन पूरा हो पाया है। जियो टेक्नीकल में मिट्टी का परीक्षण और टोपोलॉजिकल में एरिया का निरीक्षण होता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में डीपीआर तैयार करने में कुछ इलेक्ट्रिकल आईटम छूट गए हैं। इसलिए अभी तक नए पुल की डीपीआर तैयार नहीं हो पाई है। सोमवार तक डीपीआर भेजे जाने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने बताया कि नए पुल की संभावित लागत करीब 40 करोड़ रुपये है। इसमें पैदल डेकों पर कांच भी लगाया जाना है।
यह है मामला
ऋषिकेश। गौरतलब है कि नौ दशक पुराने लक्ष्मणझूला पुल की मियाद खत्म होने पर लोक निर्माण विभाग ने बीते 14 जुलाई को उस पर आवागमन बंद कर दिया था। इससे पूर्व आला अधिकारियों को यहां आवागमन बंद करने को लेकर स्थानीय लोगों का भारी विरोध भी झेलना पड़ा था। इस दौरान लोनिवि और स्थानीय लोगों के बीच बढ़ते विवाद यह मामला मुख्यमंत्री की टेबल तक जा पहुंचा था। इसके बाद लक्ष्मणझूला पुल को तत्काल बंद करने और कुंभ से पूर्व नए लक्ष्मणझूला पुल के निर्माण के लिए विशेष रूप से मुख्यमंत्री ने लोनिवि के आला अधिकारियों को निर्देशित किया था। इस बीच लक्ष्मणझूला पुल के दोनों ओर लोहे का दरवाजा लगाकर उस पर आवाजाही पूर्ण रूप से बंद कर दी गई। मगर स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को देखते पुल पर सीमित संख्या में आवाजाही चालू रखी गई।
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लोनिवि के अवर सहायक अभियंता रत्नेश सक्सेना ने बताया कि नए लक्ष्मणझूला पुल का डिजाइन काफी हाईटेक है। इसके तहत नए पुल के दोनों ओर केदारनाथ मंदिर का प्रतिरूप बनाया जाना है। अगर यह साधारण पुल होता तो इसकी इसकी डीपीआर और निर्माण शुरू होने में समय नहीं लगता। अभी तक नए पुल का जियो टेक्नीकल और टोपोलॉजिकल सर्वे के अलावा डिजाइन पूरा हो पाया है। जियो टेक्नीकल में मिट्टी का परीक्षण और टोपोलॉजिकल में एरिया का निरीक्षण होता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में डीपीआर तैयार करने में कुछ इलेक्ट्रिकल आईटम छूट गए हैं। इसलिए अभी तक नए पुल की डीपीआर तैयार नहीं हो पाई है। सोमवार तक डीपीआर भेजे जाने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने बताया कि नए पुल की संभावित लागत करीब 40 करोड़ रुपये है। इसमें पैदल डेकों पर कांच भी लगाया जाना है।
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यह है मामला
ऋषिकेश। गौरतलब है कि नौ दशक पुराने लक्ष्मणझूला पुल की मियाद खत्म होने पर लोक निर्माण विभाग ने बीते 14 जुलाई को उस पर आवागमन बंद कर दिया था। इससे पूर्व आला अधिकारियों को यहां आवागमन बंद करने को लेकर स्थानीय लोगों का भारी विरोध भी झेलना पड़ा था। इस दौरान लोनिवि और स्थानीय लोगों के बीच बढ़ते विवाद यह मामला मुख्यमंत्री की टेबल तक जा पहुंचा था। इसके बाद लक्ष्मणझूला पुल को तत्काल बंद करने और कुंभ से पूर्व नए लक्ष्मणझूला पुल के निर्माण के लिए विशेष रूप से मुख्यमंत्री ने लोनिवि के आला अधिकारियों को निर्देशित किया था। इस बीच लक्ष्मणझूला पुल के दोनों ओर लोहे का दरवाजा लगाकर उस पर आवाजाही पूर्ण रूप से बंद कर दी गई। मगर स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को देखते पुल पर सीमित संख्या में आवाजाही चालू रखी गई।
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