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वर्षों से बंद पड़े रैन बसेरे होंगे पर्यटकों से गुलजार

Tue, 09 Aug 2016 01:28 AM IST
naveen nautiyal
naveen nautiyal Updated Tue, 09 Aug 2016 01:28 AM IST
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Buzzing night shelter will be closed over the years, tourists
रैन बसेरे - फोटो : amar ujala

वर्षों से बंद पड़े करोड़ों रुपये की लागत से बने रैन बसेरे उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से गुलजार होंगे। खाली पड़े रैन बसेरों के संचालन के लिए पर्यटन विभाग टेंडर प्रक्रिया अपनाने जा रहा है। अब पर्यटन विभाग ने टीजीएच (पर्यटन अतिथि गृहों) का संचालन पीपीपी मोड में करने का अपना इरादा बदल दिया है।

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चार धाम यात्रा मार्ग पर अलग-अलग सात स्थानों पर वर्षों पहले टीजीएच (पर्यटन अतिथि गृहों) का निर्माण किया गया था। मैसर्स अखिल भारतीय रचनात्मक कार्य संस्थान लखनऊ को वर्ष 1995-96 से 1998-99 की अवधि तक 24 सुलभ शौचालयों, रैन बसेरों और स्पा केंद्रों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। तत्कालीन निदेशक पर्यटन (पर्वतीय) ने इस एनजीओ को दो करोड़ 68 लाख रुपये निर्माण के लिए दिए। लेकिन, 47 लाख 55 हजार रुपये का काम करने के बाद उक्त एनजीओ ने काम नहीं किया। 
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राज्य गठन के बाद उक्त एनजीओ को लगातार नोटिस भेजे गए। इसके बाद उक्त एनजीओ को उत्तराखंड सरकार ने ब्लैक लिस्ट कर दिया। अधूरे पड़े कार्य को सरकार ने किसी तरह पूरा करवाया। इसके बाद से कुछ रैन बसेरों को वर्ष 2002 में पर्यटन अतिथि गृह के संचालन की जिम्मेदारी गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग को सौंपी गई। वर्ष 2013 में पर्यटन विभाग ने टीजीएच का जिम्मा पर्यटन प्रशिक्षित छात्रों को लीज में दिया। प्रशिक्षित छात्रों ने खंडहर हो चुके रैन बसेरों की हालात सुधारने के लिए कमाई गई रकम को खर्च किया। लेकिन, लंबे समय से कुछ रैन बसेरों को विभागीय उदासीनता के कारण उपयोग में नहीं लाया जा सका। बहरहाल, अब जाकर पर्यटन विभाग की नींद टूटी है।
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विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पिछले माह रैन बसेरों को चलाने के लिए आवेदन मांगे गए थे। रैन बसेरों को चलाने के लिए कम ही आवेदन आए हैं। लेकिन, विभाग अन्य रैन बसेरों के संचालन के लिए दोबारा से टेंडर प्रक्रिया निकालेगी। खाली पड़े रैन बसेरों को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ही चलाया जाएगा। खाली पड़े रैन बसेरों के संचालन से जहां एक ओर सरकार को राजस्व प्राप्त होगा। वहीं, दूसरी ओर रैन बसेरों के संचालन से पर्यटकों को सस्ते दाम में ठहरने की व्यवस्था मिलेगी।  

यहां खाली पड़े हैं रैन बसेरे
नीलकंठ पौड़ी, सतपुली, दुगड्डा, ढुंगरी पंत, डांडा नागराज, देवप्रयाग, कुंजापुरी आदि जगहों पर लाखों रुपये की लागत से बने रैन बसेरे बंद पड़े हैं। इनमें ज्यादातर रैन बसेेरे पौड़ी जिले में खाली पड़े हैं। जिला पर्यटन विकास अधिकारी पौड़ी विवेक नौटियाल ने बताया कि उक्त रैन बसेरों में से ज्यादातर  जीएमवीएन के पास हैं। जिन्हे पर्यटन विभाग में लेने की प्रक्रिया जारी है। जल्द ही सभी रैन बसेरों को पर्यटन विभाग के अधीन कर दिया जाएगा। 

पर्यटन प्रशिक्षित छात्रों के लिए खुशखबरी
पर्यटन अतिथि गृह को सरकार फिलहाल पीपीपी मोड पर चलाने के मूड में नहीं है। पर्यटन विभाग रैन बसेरों का संचालन पर्यटन प्रशिक्षित छात्रों को लीज पर ही देगा। इससे पहले पर्यटन विभाग उक्त रैन बसेरों का संचालन पीपीपी मोड में चलाने के मूड़ में था। रैन बसेरों का पीपीपी मोड में संचालन करने को लेकर पर्यटन प्रशिक्षित छात्रों में भारी रोष था। 8 जुलाई 2016 को अमर उजाला ने छात्रों पर लटकी बेरोजगारी की तलवार शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। 


खाली पड़े पर्यटन अतिथि गृह को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से जल्द संचालन किया जाएगा। सभी रैन बसेरों का संचालन पहले की तरह लीज पर किया जाएगा। पीपीपी मोड में रैन बसेरों का संचालन फिलहाल संभव नहीं है। - एके द्विवेदी, अपर निदेशक पर्यटन विभाग 

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