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ईगास पर्व पर खेला भैलो, घरों में बने पकवान

Thu, 26 Nov 2020 12:27 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 26 Nov 2020 12:27 AM IST
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Bhalo played at Egas festival, home-cooked dish
ईगास बग्वाल पर गढ़वाली गीतों पर नृत्य करते विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल। - फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। उत्तराखंड की लोक संस्कृति को संजोए ईगास बग़्वाल पर तीर्थनगरी सहित आसपास के ग्रामीणों क्षेत्रों में पर्व की धूम रही। लोगों ने घरों में पकवान पकाकर और भैलो खेलकर एक-दूसरे को पर्व की बधाई थी। गत वर्षों के मुकाबले इस वर्ष ईगास को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला। इधर, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने तपोवन क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में भैलो खेलकर पर्व को धूमधाम से मनाया।
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विधानसभा अध्यक्ष एवं उपस्थित अन्य लोगों ने गढ़वाली गीतों पर नृत्य किया वहीं, भैलो खेलकर संस्कृति का परिचय दिया। भैलो घुमाकर एक-दूसरे को इगास पर्व की बधाई भी दी। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा पिछले वर्ष सांसद अनिल बलूनी के पैतृक गांव जाकर सांसद संबित पात्रा के साथ ईगास पर्व को मनाया गया था।
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इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह पर्व हम सबको जीवन में सुख, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, एक ऐसा प्रदेश जहां की संस्कृति कई रंगों से भरी हुई है। जहां की बोली में एक मिठास है। जहां हर त्योहार को अनूठे अंदाज में मनाया जाता है। इगास-बग्वाल एक ऐसा ही त्योहार है जो उत्तराखंड की परंपराओं को जीवंत कर देता है। यह पर्व हमारे पूर्वजों की धरोहर व पर्वतीय संस्कृति की विरासत है। उन्होंने कहा कि हमें अपने लोकपर्वो व संस्कृति को संरक्षित रखने की आवश्यकता है। इस अवसर पर पियूष अग्रवाल, राजेश उनियाल, पूरन राणा, रविंद्र रावत, दीपक नेगी, गिरीश रावत, अनिल रयाल, वीरेंद्र रावत, रीना देवी, सरिता बिजलवान, कविता देवी, स्वेता बिजलवान, विशेष कार्याधिकारी ताजेंद्र नेगी, सूचना अधिकारी भारत चौहान, जनसंपर्क अधिकारी राजेश थपलियाल, सहायक जनसंपर्क अधिकारी कौशल बिजलवान सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का प्रतीक है ईगास पर्व
ऋषिकेश। अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा के अध्यक्ष डॉ.राजे सिंह नेगी ने कहा कि ईगास (बूढ़ी दीपावली) का त्योहार लोक संस्कृति से जुड़ा पर्व है। पहाड़ में मनाए जाने वाले इस पारंपरिक त्योहार को जन-जन के बीच दीपावली, होली व अन्य पर्वों की तरह मनाया जाना चाहिए।
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