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मानदेय पर कार्यरत संस्कृत शिक्षकों की हो नियुक्ति
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16 संस्कृत शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपते शिक्षक संघ के पदाधिकारी
- फोटो : RISHIKESH
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सूबे में अल्प मानदेय पर कार्यरत संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर उत्तराखंड संस्कृत विद्यालय प्रबंधकीय शिक्षक संघ ने संस्कृत शिक्षा निदेशक से मुलाकात की। साथ ही मांगों को लेकर शिक्षक संघ ने ज्ञापन भी सौंपा।
सोमवार को संस्कृत विद्यालय प्रबंधकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष जनार्दन कैरवान के नेतृत्व में समस्त पदाधिकारी संस्कृत शिक्षा निदेशालय, देहरादून पहुंचे। यहां उन्होंने संस्कृत शिक्षा निदेशक के पद पर शिव प्रसाद खाली को मनोनीत होने पर बधाई दी। इस मौके पर जनार्दन कैरवान ने संस्कृत शिक्षकों के मानदेय से संबंधित मुद्दे को निदेशक के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का स्थान प्राप्त है। मगर राज्य स्थापना के इतने वर्ष बाद भी संस्कृत महाविद्यालयों और विद्यालयों की स्थिति दयनीय है।
बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 80 प्रतिशत संस्कृत विद्यालय अल्प मानदेय शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। प्रदेश के सात विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाचार्य का भार भी इन्हीं शिक्षकों के ऊपर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा विनियम संसोधन के लिए विचाराधीन है। इसे देखते हुए मानदेय पर कार्यरत शिक्षकों को नियुक्ति दी जाए। महाविद्यालयों में आवश्यकतानुसार पदों का सृजन किया जाए। इस अवसर पर शिक्षक संघ के महामंत्री सुभाष चंद्र डोभाल, संगठन मंत्री सुशील नौटियाल, कीर्तिचंद कलौनी, विनायक भट्ट, राकेश कंसवाल, विजय जुगरान, जितेंद्र भट्ट, मनोज शर्मा, तुलसीराम लखेड़ा आदि उपस्थित थे।
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सोमवार को संस्कृत विद्यालय प्रबंधकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष जनार्दन कैरवान के नेतृत्व में समस्त पदाधिकारी संस्कृत शिक्षा निदेशालय, देहरादून पहुंचे। यहां उन्होंने संस्कृत शिक्षा निदेशक के पद पर शिव प्रसाद खाली को मनोनीत होने पर बधाई दी। इस मौके पर जनार्दन कैरवान ने संस्कृत शिक्षकों के मानदेय से संबंधित मुद्दे को निदेशक के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का स्थान प्राप्त है। मगर राज्य स्थापना के इतने वर्ष बाद भी संस्कृत महाविद्यालयों और विद्यालयों की स्थिति दयनीय है।
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बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 80 प्रतिशत संस्कृत विद्यालय अल्प मानदेय शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। प्रदेश के सात विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाचार्य का भार भी इन्हीं शिक्षकों के ऊपर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा विनियम संसोधन के लिए विचाराधीन है। इसे देखते हुए मानदेय पर कार्यरत शिक्षकों को नियुक्ति दी जाए। महाविद्यालयों में आवश्यकतानुसार पदों का सृजन किया जाए। इस अवसर पर शिक्षक संघ के महामंत्री सुभाष चंद्र डोभाल, संगठन मंत्री सुशील नौटियाल, कीर्तिचंद कलौनी, विनायक भट्ट, राकेश कंसवाल, विजय जुगरान, जितेंद्र भट्ट, मनोज शर्मा, तुलसीराम लखेड़ा आदि उपस्थित थे।
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