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अविस्मरणीय रहा अमृत स्नान : स्वतंत्रता तिलक
Fri, 14 Feb 2025 01:03 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 14 Feb 2025 01:03 AM IST
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सनातन धर्म को अपनाकर विदेशी साधक देश-विदेश में इसका प्रचार कर रहे हैं। ऐसे ही स्पेन की एक साधक अपने गुरु के आदेश से प्रयागराज महाकुंभ में स्नान के लिए पहुंची। स्नान के बाद साधक नगर पालिका मुनि की रेती ढालवाला स्थित वैदिक फाउंडेशन हिमालय योगालय आश्रम गंगा वाटिका पहुंची और महाकुंभ का अनुभव साझा किया।
विदेशी साधक स्वतंत्रता तिलक ने बताया कि वह अपने गुरु स्वामी शंकर तिलक के आदेश में स्पेन से प्रयागराज महाकुंभ में स्नान के लिए पहुंची। उन्होंने बताया कि वह दो फरवरी को प्रयागराज पहुंचीं। वसंत पंचमी के दिन अमृत स्नान करने के बाद वह मुनि की रेती स्थित अपने आश्रम गंगा वाटिका में पहुंचीं।
वह कहती हैं कि सनातन धर्म पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। भारत में आध्यात्मिक जीवन है। विदेश में आध्यात्मिक जीवन के अलावा बाकी सब कुछ है। लेकिन फिर भी विदेश में सब खाली है। इसको भरने के लिए आध्यात्मिक होना जरूरी है। अगर व्यक्ति को जीवन में मोक्ष चाहिए तो उन्हें सनातन धर्म अपनाना होगा।
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ये महाकुंभ उसी सनातन धर्म का संदेश है। महाकुंभ में उमड़ी भीड़ हमें एकजुटता का संदेश देती है। सनातन धर्म में संतों का आशीर्वाद बहुत जरूरी है। बिना आशीर्वाद कुछ नहीं है। हमारे सनातन में गुरु शिष्य परंपरा है। इसमें गुरु आपकी ज्ञान ज्योति को खोलता है, उसके बाद ही आप ध्यान, जप, मंत्र, आसन, प्रणायाम करते हैं। हम भी गुरु आदेश का पालन करने के लिए स्पेन से प्रयागराज महाकुंभ में स्नान के लिए पहुंचे। यह पहला स्नान मेरे लिए अविस्मरणीय रहा।
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विदेशी साधक स्वतंत्रता तिलक ने बताया कि वह अपने गुरु स्वामी शंकर तिलक के आदेश में स्पेन से प्रयागराज महाकुंभ में स्नान के लिए पहुंची। उन्होंने बताया कि वह दो फरवरी को प्रयागराज पहुंचीं। वसंत पंचमी के दिन अमृत स्नान करने के बाद वह मुनि की रेती स्थित अपने आश्रम गंगा वाटिका में पहुंचीं।
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वह कहती हैं कि सनातन धर्म पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। भारत में आध्यात्मिक जीवन है। विदेश में आध्यात्मिक जीवन के अलावा बाकी सब कुछ है। लेकिन फिर भी विदेश में सब खाली है। इसको भरने के लिए आध्यात्मिक होना जरूरी है। अगर व्यक्ति को जीवन में मोक्ष चाहिए तो उन्हें सनातन धर्म अपनाना होगा।
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ये महाकुंभ उसी सनातन धर्म का संदेश है। महाकुंभ में उमड़ी भीड़ हमें एकजुटता का संदेश देती है। सनातन धर्म में संतों का आशीर्वाद बहुत जरूरी है। बिना आशीर्वाद कुछ नहीं है। हमारे सनातन में गुरु शिष्य परंपरा है। इसमें गुरु आपकी ज्ञान ज्योति को खोलता है, उसके बाद ही आप ध्यान, जप, मंत्र, आसन, प्रणायाम करते हैं। हम भी गुरु आदेश का पालन करने के लिए स्पेन से प्रयागराज महाकुंभ में स्नान के लिए पहुंचे। यह पहला स्नान मेरे लिए अविस्मरणीय रहा।