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एम्स ऋषिकेश नौकरी फर्जीवाड़ा: परिसर से चल रहा था फर्जी नियुक्ति का खेल,आउटसोर्स एजेंसी मैनेजर जांच के घेरे में

Fri, 18 Sep 2026 10:21 AM IST
Renu Saklani राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश।
राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश। Published by: Renu Saklani Updated Fri, 18 Sep 2026 10:21 AM IST
सार

एम्स के किच्छा में निर्माणाधीन सेटेलाइट सेंटर में नियुक्ति के नाम पर पैसे लेने और फर्जीवाड़े संबंधी मामले में पुलिस ने भाई-बहन व एम्स के आउटसोर्स कर्मचारी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। एम्स के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सेटेलाइट सेंटर में आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़े के आरोप में बीते बुधवार शाम को पुलिस ने भाई बहन और एम्स के आउटसोर्स कर्मचारी सहित पांच के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

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AIIMS Rishikesh Fake Recruitment Scam Fraudulent Job Appointment Racket Operated From Within AIIMS Campus
एम्स ऋषिकेश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

एम्स के सेटेलाइट सेंटर किच्छा में नियुक्ति के नाम पर फर्जीवाड़े की जांच अब एम्स में काम कर रही आउटसोर्स एजेंसी राजदीप इंटर प्राइजेज के मैनेजर पर केंद्रित हो गई है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में आउटसोर्स एजेंसी के मैनेजर सहित दो लोगों की भूमिका मुख्य मानी जा रही है।

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शुरु से ही किच्छा सेटेलाइट सेंटर में भर्ती फर्जीवाड़े में शुरु से ही एम्स में काम कर रही आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका संदिग्ध थी। आरोपियों के पास नियुक्ति पत्र उक्त एजेंसी के ही मिले थे, नियुक्ति पत्रों पर एजेंसी की मोहर बताई जा रही थी। प्रकरण सामने आने पर एजेंसी के अधिकारी पुलिस से शिकायत करने के बावजूद मूक दर्शक बने हुए थे।
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अब पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी दीपक गुसाईं ने नौकरी लगवाने के नाम पर विभिन्न व्यक्तियों से धनराशि प्राप्त किए जाने तथा उसमें से 2,40,000 रूपये शिवा सिंह को दिए जाने की बात बताई है। वहीं दूसरे आरोपी सुब्रत बछाड़ ने भी अपने सहित अन्य व्यक्तियों की नौकरी लगवाने के लिए धनराशि दिए जाने तथा संबंधित व्यक्तियों को शिवा सिंह और राजदीप इंटरप्राइजेज के मैनेजर विनायक से मिलाए जाने की बात बताई।
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प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका से भी नहीं नकारा जा सकता
अब इन तथ्यों के आधार पर पुलिस की पूरी जांच आउटसोर्स एजेंसी के मैनेजर विनायक और दूसरे व्यक्ति शिवा पर केंद्रित हो गई है। बताया जा रहा है कि शिवा भी पूर्व में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से एम्स में नौकरी कर चुका है। जबकि दूसरा मुख्य आरोपी दीपक गुसाई वर्तमान में एम्स की आयुष्मान योजना में आउटसोर्स के माध्यम से तैनात है।

इन तीनों के आउटसोर्स एजेंसी से कनेक्शन से स्पष्ट हो रहा है कि नियुक्ति का सारा गोरखधंधा एम्स परिसर से ही संचालित हो रहा था, अब यह भी आशंका उठने लगी है कि यह नियुक्तियां फर्जी नहीं बल्कि मोटी रकम लेकर वास्तविक रूप से तो नहीं की जा रही थी। यदि यह नियुक्तियां वास्तविक रूप से गुपचुप तरीके से की जा रही थी तो इसमें एम्स के किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका से भी नहीं नकारा जा सकता है।

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मोहर लगाने के मिले थे निर्देश

बताया जा रहा है कि आउटसोर्स कंपनी की किसी महिला कर्मचारी ने पुलिस को दिए बयान मे बताया कि नियुक्ति पत्रों पर कंपनी की मोहर लगाई गई है। नियुक्ति प्रमाण पत्रों पर मोहर लगाने के लिए आउटसोर्स कंपनी के ही किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने निर्देश दिए थे। हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं है। फिर भी यदि यह तथ्य सत्य है तो स्पष्ट है कि पूरे प्रकरण में आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारी ही मुख्य भूमिका में हैं।

अमर उजाला ने पहले की जताई थी आशंका

अमर उजाला में प्रकाशित संवाद न्यूज एजेंसी की खबर एम्स और आउटसोर्स एजेंसी सवालों के घेरे में प्रकाशित हुई थी। जिस पर अब पुलिस जांच ने मुहर लगा दी है।

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