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Rishikesh News: 96 पेड़ कटे, 42 तस्कर पकड़े... फिर कार्रवाई करने में सबके कदम ठिठके
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रानीपोखरी के शांतिनगर गांव में 96 आम के पेड़ों को काटे जाने की घटना पर जिस नाटकीय ढंग से पर्दा डालने की कोशिश हुई वह वन और उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर वन विभाग ने पेड़ काटने वाले तस्करों को पकड़ने के बाद छोड़ दिया कि मामला उद्यान विभाग के अधिकार क्षेत्र का है। वहीं उद्यान विभाग घटना की जानकारी होने से ही इन्कार कर रहा है।
करीब रात दो बजे वन विभाग की उड़नदस्ता टीम को इस घटना की जानकारी मिली और विभाग की टीम सभी तस्करों को पकड़ कर रेंज कार्यालय ले आती है। यहां कुछ ऐसा नाटकीय घटनाक्रम होता है कि वन विभाग पकड़े गए सभी तस्करों को यह कहकर छोड़ देता है कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। मामले में कार्रवाई करने का अधिकार उद्यान विभाग को है। जबकि वन विभाग पकड़े गए इन तस्करों को उद्यान विभाग के सुपुर्द कर सकता था। अब वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि हमने मामले की सूचना तत्काल उद्यान विभाग को दे दी है। उद्यान विभाग के अधिकारी इस प्रकार की किसी भी सूचना से साफ इन्कार कर रहे हैं। उद्यान विभाग का कहना है कि न तो उन्होंने किसी को आम के पेड़ काटने की अनुमति दी है और न ही किसी व्यक्ति या विभाग ने ऐसी किसी घटना की जानकारी दी है। वन विभाग और उद्यान विभाग की इस कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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इस तरह हुआ घटनाक्रम
शांतिनगर में लगभग दस बीघा से अधिक जमीन पर करीब डेढ़ सौ पेड़ खड़े हैं। करीब चार दर्जन तस्करों ने त्योहार की रात आम के बगीचे से पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटना शुरू किया। देखते ही देखते 96 हरे पेड़ों को काटकर नीचे गिरा दिया। सूचना पाकर बड़कोट वन विभाग की टीम ने तड़के करीब तीन बजे पूरे बगीचे को घेर लिया। इसके बाद 42 लोगों को धर दबोचा। पकड़े गए सभी लोगों को बड़कोट वन रेंज लाया गया। यहां मामला उद्यान विभाग से जुड़ा बताकर सभी को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
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हर घंटे काटे 16 पेड़, 42 पेशेवर आए कहां से
रविवार रात रानीपोखरी के शांतिनगर गांव में पेड़ काट रहे 42 लोगों को वन विभाग ने रात दो बजे घेर लिया। बताया जा रहा है के तस्करों ने रात नौ बजे से पेड़ काटना शुरू किया था। मात्र छह घटों में 96 पेड़ काटे गए। इस तरह देखा जाए तो प्रति घंटा 16 पेड़ काटे गए। इससे स्पष्ट होता है कि पेड़ काटने वाले सभी लोग पेशेवर थे। रानीपोखरी क्षेत्र या जिले में पेड़ काटने वाले इतने पेशेवर लोग होना किसी को भी हजम नहीं हो रहा है। आशंका है कि तस्करों ने पेड़ काटने के लिए बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों से लोग बुलाए थे। इतनी बड़ी संख्या में तस्करों का क्षेत्र में पहुंचना और स्थानीय प्रशासन को भनक तक नहीं लगना स्थानीय अभिसूचना ईकाई पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
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रानी पोखरी और जौलीग्रांट क्षेत्र में सक्रिय हैं तस्कर
क्षेत्र में लगभग हर सप्ताह पेड़ काटने की घटनाएं हो रही हैं। कुछ दिन पहले जौलीग्रांट क्षेत्र में चंदन के आधा दर्जन पेड़ों पर आरियां चली थीं। इससे पहले भी यहां पेड़ों की कटने की घटनाएं हुई है, लेकिन कोई आरोपी नहीं पकड़ा गया। वहीं एक स्कूल प्रशासन ने स्कूल परिसर बगल वाले खेत में खड़े सूखे तुन के पेड़ को खेत स्वामी की सहमति पर कटवा लिया था। सूखे पेड़ से स्कूल को खतरा बना हुआ था। इस पर वन विभाग की उड़न दस्ता टीम तत्काल मौके पर पहुंची चालान की कार्रवाई की। लेकिन वन विभाग की इस उड़न दस्ता टीम को रातभर बड़ी संख्या में पेड़ों के कटने की भनक तक नहीं लगी।
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थानो वन रेंज की टीम ने नागाघेर में पूरा रात डेला डाला
रानीपोखरी में पेड़ तस्करों के सक्रिय होने की सूचना पर थानो रेंज एनएल डोभाल ने अपनी पूरी टीम के साथ नागाघेर में बगीचो के आसपास डेरा डाल लिया। वन विभाग को सूचना मिली थी कि नागाघेर में एक बगीचा रातों रात काटा जाना है। जिस पर पूरी टीम ने पहरा देकर बगीचे को कटने से बचा लिया। कहा कि त्योहारों या बारिश वाली रात तस्कर जंगलों और अन्य क्षेत्रों में पेड़ काटने की फिराक में रहते हैं।
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फ्लाइंग टीम सोती रही
वन विभाग की एक फ्लाइंग टीम भी है। जो अवैध खनन और तस्करों पर नजर रखती है। कुछ ही दिन पहले एक टीम ने एक स्कूल और निजी खेत की बाउंड्री पर खड़े तुन के एक सूखे हुए पेड़ काटने पर बड़ी कार्रवाई की थी। लेकिन शांतिनगर में इस टीम को भनक तक नही लगी। वन सुरक्षा दल शिवालिक वृत्त के प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी गणेश उनियाल ने कहा कि शांतिनगर में पेड़ काटे जाने की सूचना बाद में लगी। तब तक बड़कोट रेंज अधिकारियों ने कार्रवाई कर दी थी।
करीब रात दो बजे वन विभाग की उड़नदस्ता टीम को इस घटना की जानकारी मिली और विभाग की टीम सभी तस्करों को पकड़ कर रेंज कार्यालय ले आती है। यहां कुछ ऐसा नाटकीय घटनाक्रम होता है कि वन विभाग पकड़े गए सभी तस्करों को यह कहकर छोड़ देता है कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। मामले में कार्रवाई करने का अधिकार उद्यान विभाग को है। जबकि वन विभाग पकड़े गए इन तस्करों को उद्यान विभाग के सुपुर्द कर सकता था। अब वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि हमने मामले की सूचना तत्काल उद्यान विभाग को दे दी है। उद्यान विभाग के अधिकारी इस प्रकार की किसी भी सूचना से साफ इन्कार कर रहे हैं। उद्यान विभाग का कहना है कि न तो उन्होंने किसी को आम के पेड़ काटने की अनुमति दी है और न ही किसी व्यक्ति या विभाग ने ऐसी किसी घटना की जानकारी दी है। वन विभाग और उद्यान विभाग की इस कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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इस तरह हुआ घटनाक्रम
शांतिनगर में लगभग दस बीघा से अधिक जमीन पर करीब डेढ़ सौ पेड़ खड़े हैं। करीब चार दर्जन तस्करों ने त्योहार की रात आम के बगीचे से पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटना शुरू किया। देखते ही देखते 96 हरे पेड़ों को काटकर नीचे गिरा दिया। सूचना पाकर बड़कोट वन विभाग की टीम ने तड़के करीब तीन बजे पूरे बगीचे को घेर लिया। इसके बाद 42 लोगों को धर दबोचा। पकड़े गए सभी लोगों को बड़कोट वन रेंज लाया गया। यहां मामला उद्यान विभाग से जुड़ा बताकर सभी को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
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हर घंटे काटे 16 पेड़, 42 पेशेवर आए कहां से
रविवार रात रानीपोखरी के शांतिनगर गांव में पेड़ काट रहे 42 लोगों को वन विभाग ने रात दो बजे घेर लिया। बताया जा रहा है के तस्करों ने रात नौ बजे से पेड़ काटना शुरू किया था। मात्र छह घटों में 96 पेड़ काटे गए। इस तरह देखा जाए तो प्रति घंटा 16 पेड़ काटे गए। इससे स्पष्ट होता है कि पेड़ काटने वाले सभी लोग पेशेवर थे। रानीपोखरी क्षेत्र या जिले में पेड़ काटने वाले इतने पेशेवर लोग होना किसी को भी हजम नहीं हो रहा है। आशंका है कि तस्करों ने पेड़ काटने के लिए बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों से लोग बुलाए थे। इतनी बड़ी संख्या में तस्करों का क्षेत्र में पहुंचना और स्थानीय प्रशासन को भनक तक नहीं लगना स्थानीय अभिसूचना ईकाई पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
रानी पोखरी और जौलीग्रांट क्षेत्र में सक्रिय हैं तस्कर
क्षेत्र में लगभग हर सप्ताह पेड़ काटने की घटनाएं हो रही हैं। कुछ दिन पहले जौलीग्रांट क्षेत्र में चंदन के आधा दर्जन पेड़ों पर आरियां चली थीं। इससे पहले भी यहां पेड़ों की कटने की घटनाएं हुई है, लेकिन कोई आरोपी नहीं पकड़ा गया। वहीं एक स्कूल प्रशासन ने स्कूल परिसर बगल वाले खेत में खड़े सूखे तुन के पेड़ को खेत स्वामी की सहमति पर कटवा लिया था। सूखे पेड़ से स्कूल को खतरा बना हुआ था। इस पर वन विभाग की उड़न दस्ता टीम तत्काल मौके पर पहुंची चालान की कार्रवाई की। लेकिन वन विभाग की इस उड़न दस्ता टीम को रातभर बड़ी संख्या में पेड़ों के कटने की भनक तक नहीं लगी।
थानो वन रेंज की टीम ने नागाघेर में पूरा रात डेला डाला
रानीपोखरी में पेड़ तस्करों के सक्रिय होने की सूचना पर थानो रेंज एनएल डोभाल ने अपनी पूरी टीम के साथ नागाघेर में बगीचो के आसपास डेरा डाल लिया। वन विभाग को सूचना मिली थी कि नागाघेर में एक बगीचा रातों रात काटा जाना है। जिस पर पूरी टीम ने पहरा देकर बगीचे को कटने से बचा लिया। कहा कि त्योहारों या बारिश वाली रात तस्कर जंगलों और अन्य क्षेत्रों में पेड़ काटने की फिराक में रहते हैं।
फ्लाइंग टीम सोती रही
वन विभाग की एक फ्लाइंग टीम भी है। जो अवैध खनन और तस्करों पर नजर रखती है। कुछ ही दिन पहले एक टीम ने एक स्कूल और निजी खेत की बाउंड्री पर खड़े तुन के एक सूखे हुए पेड़ काटने पर बड़ी कार्रवाई की थी। लेकिन शांतिनगर में इस टीम को भनक तक नही लगी। वन सुरक्षा दल शिवालिक वृत्त के प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी गणेश उनियाल ने कहा कि शांतिनगर में पेड़ काटे जाने की सूचना बाद में लगी। तब तक बड़कोट रेंज अधिकारियों ने कार्रवाई कर दी थी।