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कोर्ट के आदेशों के बावजूद निगम ने नहीं हटाए अतिक्रमण
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। कोर्ट के आदेश के बावजूद नगर के अतिक्रमण हट नहीं पाए हैं। सरकारी भूमि से पुराने कब्जे हटाने तो दूर नए अतिक्रमण होते जा रहे हैं। हालात ये हैं कि नगर निगम की 1127 संपत्तियां अतिक्रमण का शिकार हो चुकी हैं। इसके खिलाफ कार्रवाई की बजाए निगम चंद खोखे और टीन की छतें हटवाकर अभियान की औपचारिकता पूरी कर रहा है। मजे की बात तो ये है कि बस अड्डे पर हुए कांजी हाउस की भूमि पर अवैध कब्जे को भी हटवाने में निगम अफसर लाचार दिख रहे हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता अनिल गुप्ता कोर्ट में अवमानना याचिक दायर करने जा रहे हैं।
बुधवार को अनिल गुप्ता ने नगर निगम के स्वर्णजयंती सभागार में अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर एक प्रेसवार्ता की। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल 2010 में एक जनहित याचिका उनकी ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई थी। कोर्ट ने याचिका का संज्ञान लेते हुए 24 अगस्त 2018 को आदेश जारी किया था कि दो सप्ताह के भीतर सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमणों को चिह्नित कर नोटिस जारी किया जाए। पांच हफ्ते में सभी अतिक्रमण हटवाए जाएं। इसमें मुख्य सचिव, आयुक्त गढ़वाल मंडल, जिलाधिकारी देहरादून, सार्वजनिक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड डोईवाला, सार्वजनिक निर्माण विभाग अस्थाई खंड ऋषिकेश, हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण और नगर निगम ऋषिकेश को पक्षकार बनाया गया। नगर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए कोर्ट दी गई मियाद काफी समय पहले बीत चुकी है। इसके बावजूद निगम अतिक्रमण हटाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा।
दी जा रही हैं धमकियां
याचिकाकर्ता अनिल गुप्ता ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव के कारण अफसर अतिक्रमण अभियान असरदार तरीके से संचालित नहीं कर पा रहे हैं। उनके ऊपर भी लगातार दबाव बनाया जा रहा है और धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक नगर के अतिक्रमण पूरी तरह हट नहीं जाते वे पीछे नहीं हटेंगे।
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इन क्षेत्रों में फैला है अतिक्रमण का जाल
चंद्रभागा नदी में करीब 500 झोपड़ियां अवैध तरीके से बसा दी गई हैं। इसके अलावा त्रिवेणी घाट से मायाकुंड जाने वाला तटबंध, संयुक्त बस अड्डा, सरस्वती नाला, शहर भर के नाले, सुलक्खी माई धर्मशाला, मैमो माई धर्मशाला, महिमा भेजनालय के बाहर बनीं दुकानें, घाट रोड पर सरस्वती नाले के ऊपर बने होटल, आशा माई धर्मशाला, जीवनीमाई धर्मशाला, नानकी देवी धर्मशाला की ओर से अतिक्रमण किया गया है। इतना ही नहीं नगर निगम की ओर से आवंटित दुकानें भी खुर्दबुर्द हो चुकी हैं। इनमें जवाहर मार्केट रेलवे रोड, नाभा हाउस घाट रोड, शिवाजी मार्केट देहरादून रोड, त्रिवेणी घाट पर निर्मित फूल वालों की दुकानें भी अपना मूल स्वरूप खो चुकी हैं।
कोट्स
अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई की जा रही है। समय समय पर शहर के अतिक्रमण को हटवाया जाता है। इस समय भी विभिन्न क्षेत्रों में सड़का पर फैले अवैध कब्जे हटवाए जा रहे हैं। कोर्ट के आदेशों का पालन हो रहा है।
- चतर सिंह चौहान, मुख्य नगर आयुक्त, ऋषिकेश
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बुधवार को अनिल गुप्ता ने नगर निगम के स्वर्णजयंती सभागार में अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर एक प्रेसवार्ता की। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल 2010 में एक जनहित याचिका उनकी ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई थी। कोर्ट ने याचिका का संज्ञान लेते हुए 24 अगस्त 2018 को आदेश जारी किया था कि दो सप्ताह के भीतर सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमणों को चिह्नित कर नोटिस जारी किया जाए। पांच हफ्ते में सभी अतिक्रमण हटवाए जाएं। इसमें मुख्य सचिव, आयुक्त गढ़वाल मंडल, जिलाधिकारी देहरादून, सार्वजनिक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड डोईवाला, सार्वजनिक निर्माण विभाग अस्थाई खंड ऋषिकेश, हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण और नगर निगम ऋषिकेश को पक्षकार बनाया गया। नगर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए कोर्ट दी गई मियाद काफी समय पहले बीत चुकी है। इसके बावजूद निगम अतिक्रमण हटाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा।
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दी जा रही हैं धमकियां
याचिकाकर्ता अनिल गुप्ता ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव के कारण अफसर अतिक्रमण अभियान असरदार तरीके से संचालित नहीं कर पा रहे हैं। उनके ऊपर भी लगातार दबाव बनाया जा रहा है और धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक नगर के अतिक्रमण पूरी तरह हट नहीं जाते वे पीछे नहीं हटेंगे।
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इन क्षेत्रों में फैला है अतिक्रमण का जाल
चंद्रभागा नदी में करीब 500 झोपड़ियां अवैध तरीके से बसा दी गई हैं। इसके अलावा त्रिवेणी घाट से मायाकुंड जाने वाला तटबंध, संयुक्त बस अड्डा, सरस्वती नाला, शहर भर के नाले, सुलक्खी माई धर्मशाला, मैमो माई धर्मशाला, महिमा भेजनालय के बाहर बनीं दुकानें, घाट रोड पर सरस्वती नाले के ऊपर बने होटल, आशा माई धर्मशाला, जीवनीमाई धर्मशाला, नानकी देवी धर्मशाला की ओर से अतिक्रमण किया गया है। इतना ही नहीं नगर निगम की ओर से आवंटित दुकानें भी खुर्दबुर्द हो चुकी हैं। इनमें जवाहर मार्केट रेलवे रोड, नाभा हाउस घाट रोड, शिवाजी मार्केट देहरादून रोड, त्रिवेणी घाट पर निर्मित फूल वालों की दुकानें भी अपना मूल स्वरूप खो चुकी हैं।
कोट्स
अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई की जा रही है। समय समय पर शहर के अतिक्रमण को हटवाया जाता है। इस समय भी विभिन्न क्षेत्रों में सड़का पर फैले अवैध कब्जे हटवाए जा रहे हैं। कोर्ट के आदेशों का पालन हो रहा है।
- चतर सिंह चौहान, मुख्य नगर आयुक्त, ऋषिकेश