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योग के प्रति विश्व में जिज्ञासा व जागरुकता बढ़ी : विश्वपाल
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ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती । पर्यटन विकास परिषद के अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के दूसरे दिन योग साधकों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। इस दौरान योग साधकों को आसन, नियम, प्राणायाम, मर्म चिकित्सा, हठ योग क्रियाओं से होने वाले लाभ की जानकारी दी गई। गढ़वाल विकास निगम (जीएमवीएन) के गंगा रिजॉर्ट में आयोजित अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव पर योगीराज विश्वपाल ने कहा कि योग के प्रति भारत ही नहीं पूरे विश्व में जिज्ञासा और जागरूकता बढ़ी है। महर्षि पतंजलि ने अपने अनुभव के आधार पर योग को विभिन्न नाम दिए हैं। इनमें हठ योग, सहज योग, कुंडलिनी योग शामिल हैं।
योग का लाभ प्राप्त करने के लिए यम, नियम, आसन, प्राणायाम, धारणा, ध्यान, समाधि को अपनाया जाना महत्वपूर्ण है। समाधि तक पहुंचने के लिए इन नियमों का पालन ही वास्तविक योग है। अपने 50 साल के अनुभव के आधार पर कठिन साधना के फलस्वरूप आधुनिक भीम की उपाधि प्राप्त की है। प्राणायाम से मन, इंद्रियों पर नियंत्रण किया जा सकता है। इस मौके पर निगम प्रबंध निदेशिका ज्योति नीरज खैरवाल, महाप्रबंधक बीएल राणा, भगवती प्रसाद पुरोहित, सरोज कुकरेती, मनमोहन चौधरी, इंद्रमोहन नेगी, कृष्ण उप्रेती, अजय कांत, संजय शर्मा, ओम प्रकाश भट्ट, नरेंद राणा आदि मौजूद रहे।
आधुनिक योग से रूबरू हुए साधक
मुनिकीरेती। योग महोत्सव के दूसरे दिन हठ योग, प्राकृतिक चिकित्सा, संजीवनी शुद्धि क्रिया, पंचकर्म थेरेपी कोर्स, पंचकर्म चिकित्सा, स्वर योग सहित मर्म शिक्षा, सुदर्शन क्रिया, ओशो ध्यान साधना आदि का ज्ञान योग साधकों को दिया गया। योग गुरु जयदेवन ने प्राणायाम, योगी जितानंद ने परंपरागत योग, नितिन वीरखरे ने मुद्रा विन्यास, सौरभ शेलर ने साउ योग, सुभाष पात्री जी ने कास्मिक मेडिटेशन, मोहन बधानी ने हठ योगासन, गोकुल चंद्रा ने विन्यास योग, डॉ. संजीव पांडे ने प्राणायाम, स्वामी बोधि वर्तमान ने कुंडलनी ध्यान, टीम जोंस ने योग व मेडिटेशन सहित उषा माता ने आयंगर योग की विधा बताई। इसके अलावा योगी विश्वपालजयंति ने योग एंड न्यूरोपैथी, कर्मजीत सिंह ने योगथेरेपी फॉर स्पिनल डिसऑर्डर, चेतन महेश ने प्रीनेटल योग, राजीव तिवाड़ी ने योगिक मेडिशियशन, डॉ. लक्ष्मी नारायण जोशी ने नाड़ी विज्ञान, गोकुलचंद्र ने योग फिलासफी, रजनीश ने ट्रेडिशनल योग, सुशील ने पंच द्रव्य चिकित्सा, चरत सिंह ने क्लासिकल कुंडलिनी योग, स्ट्रोबल आशुतोष ने मैकेनिज्म ऑफ वर्ल्ड पीस बाय योग, संजय नौटियाल ने योग एंड लाइफ, व्हाट इज योग के महत्व पर प्रतिभागियों को ज्ञान दिया। धीरेंद्र भंडारी ने अष्टांग विन्यास से रूबरू कराया।
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योग का लाभ प्राप्त करने के लिए यम, नियम, आसन, प्राणायाम, धारणा, ध्यान, समाधि को अपनाया जाना महत्वपूर्ण है। समाधि तक पहुंचने के लिए इन नियमों का पालन ही वास्तविक योग है। अपने 50 साल के अनुभव के आधार पर कठिन साधना के फलस्वरूप आधुनिक भीम की उपाधि प्राप्त की है। प्राणायाम से मन, इंद्रियों पर नियंत्रण किया जा सकता है। इस मौके पर निगम प्रबंध निदेशिका ज्योति नीरज खैरवाल, महाप्रबंधक बीएल राणा, भगवती प्रसाद पुरोहित, सरोज कुकरेती, मनमोहन चौधरी, इंद्रमोहन नेगी, कृष्ण उप्रेती, अजय कांत, संजय शर्मा, ओम प्रकाश भट्ट, नरेंद राणा आदि मौजूद रहे।
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आधुनिक योग से रूबरू हुए साधक
मुनिकीरेती। योग महोत्सव के दूसरे दिन हठ योग, प्राकृतिक चिकित्सा, संजीवनी शुद्धि क्रिया, पंचकर्म थेरेपी कोर्स, पंचकर्म चिकित्सा, स्वर योग सहित मर्म शिक्षा, सुदर्शन क्रिया, ओशो ध्यान साधना आदि का ज्ञान योग साधकों को दिया गया। योग गुरु जयदेवन ने प्राणायाम, योगी जितानंद ने परंपरागत योग, नितिन वीरखरे ने मुद्रा विन्यास, सौरभ शेलर ने साउ योग, सुभाष पात्री जी ने कास्मिक मेडिटेशन, मोहन बधानी ने हठ योगासन, गोकुल चंद्रा ने विन्यास योग, डॉ. संजीव पांडे ने प्राणायाम, स्वामी बोधि वर्तमान ने कुंडलनी ध्यान, टीम जोंस ने योग व मेडिटेशन सहित उषा माता ने आयंगर योग की विधा बताई। इसके अलावा योगी विश्वपालजयंति ने योग एंड न्यूरोपैथी, कर्मजीत सिंह ने योगथेरेपी फॉर स्पिनल डिसऑर्डर, चेतन महेश ने प्रीनेटल योग, राजीव तिवाड़ी ने योगिक मेडिशियशन, डॉ. लक्ष्मी नारायण जोशी ने नाड़ी विज्ञान, गोकुलचंद्र ने योग फिलासफी, रजनीश ने ट्रेडिशनल योग, सुशील ने पंच द्रव्य चिकित्सा, चरत सिंह ने क्लासिकल कुंडलिनी योग, स्ट्रोबल आशुतोष ने मैकेनिज्म ऑफ वर्ल्ड पीस बाय योग, संजय नौटियाल ने योग एंड लाइफ, व्हाट इज योग के महत्व पर प्रतिभागियों को ज्ञान दिया। धीरेंद्र भंडारी ने अष्टांग विन्यास से रूबरू कराया।
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