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प्रतिभागियों को बताई आपातकाल में अल्ट्रासाउंड की उपयोगिता
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में दो दिवसीय इमरजेंसी सोनोग्राफी कोर्स शुरू हो गया है। इसके तहत विभिन्न मेडिकल संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आपातकाल में जीवन रक्षा के लिए अल्ट्रासाउंड की उपयोगिता बताई। मंगलवार को एम्स में आयोजित कार्यशाला का संस्थान के निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड बहुत ही उपयोगी मशीन है। पहले इसका इस्तेमाल सिर्फ रेडियोलॉजिस्ट करते थे, अब अन्य सभी चिकित्सक भी इसका उपयोग करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड अब एक विज्वल स्टेथोस्कोप बन गया है।
उन्होंने कहा कि संस्थान के सभी चिकित्सकों व नर्सिग स्टाफ को अल्ट्रासाउंड का उपयोग सिखाकर चिकित्सा का स्तर बढ़ाया जाएगा जिससे रोगियों को इसका लाभ मिल सके। प्रोफेसर संजीव भोई ने प्रतिभागियों को इमरजेंसी एरिया में अल्ट्रासाउंड की उपयोगिता का प्रशिक्षण दिया। बताया कि अल्ट्रासाउंड के उपयोग से कुछ ही क्षणों में मरीज के लिए जानलेवा परिस्थितियों का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड का उपयोग इमरजेंसी, आईसीयू, प्राथमिक उपचार व डिजास्टर में होने लगा है। बताया कि अधिकाधिक लोगों के प्रशिक्षित होने से डिजास्टर की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जल्द से जल्द मदद दी जा सकती है।
आपातकालीन चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि विभाग में एक अल्ट्रासाउंड मशीन पहले से कार्य कर रही है। मरीजों की सुविधा के लिए जल्द ही दो अन्य मशीन भी लगाई जाएगी। इससे इमरजेंसी में ही मरीजों के अल्ट्रासाउंड हो सकेंगे। इस मौके पर प्रो. अजीत बविस्कर, डॉ. तेजप्रकाश सिन्हा, डॉ. मनु अय्यर, डॉ. अजय अमलावत ने भी जानकारी दी। इस अवसर पर डीन सुरेखा किशोर, प्रो. बीना रवि, प्रो. मनोज गुप्ता, डॉ. मोनिका पठानिया, डॉ. कुमार सतीश रवि, डॉ. किम जैकब मैमन, डॉ. कमर आजम, डॉ. मीनाक्षी धर, डॉ. रविकांत, डॉ. भारत भूषण भारद्वाज, डॉ. निधि लेले, डॉ. बलराम जीओमर, डॉ. विशाल मोगो, डॉ. अजय कुमार मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि संस्थान के सभी चिकित्सकों व नर्सिग स्टाफ को अल्ट्रासाउंड का उपयोग सिखाकर चिकित्सा का स्तर बढ़ाया जाएगा जिससे रोगियों को इसका लाभ मिल सके। प्रोफेसर संजीव भोई ने प्रतिभागियों को इमरजेंसी एरिया में अल्ट्रासाउंड की उपयोगिता का प्रशिक्षण दिया। बताया कि अल्ट्रासाउंड के उपयोग से कुछ ही क्षणों में मरीज के लिए जानलेवा परिस्थितियों का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड का उपयोग इमरजेंसी, आईसीयू, प्राथमिक उपचार व डिजास्टर में होने लगा है। बताया कि अधिकाधिक लोगों के प्रशिक्षित होने से डिजास्टर की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जल्द से जल्द मदद दी जा सकती है।
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आपातकालीन चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि विभाग में एक अल्ट्रासाउंड मशीन पहले से कार्य कर रही है। मरीजों की सुविधा के लिए जल्द ही दो अन्य मशीन भी लगाई जाएगी। इससे इमरजेंसी में ही मरीजों के अल्ट्रासाउंड हो सकेंगे। इस मौके पर प्रो. अजीत बविस्कर, डॉ. तेजप्रकाश सिन्हा, डॉ. मनु अय्यर, डॉ. अजय अमलावत ने भी जानकारी दी। इस अवसर पर डीन सुरेखा किशोर, प्रो. बीना रवि, प्रो. मनोज गुप्ता, डॉ. मोनिका पठानिया, डॉ. कुमार सतीश रवि, डॉ. किम जैकब मैमन, डॉ. कमर आजम, डॉ. मीनाक्षी धर, डॉ. रविकांत, डॉ. भारत भूषण भारद्वाज, डॉ. निधि लेले, डॉ. बलराम जीओमर, डॉ. विशाल मोगो, डॉ. अजय कुमार मौजूद थे।
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