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एक्ट के विरोध में चिकित्सकों ने दी बंद की चेतावनी
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के विरोध में निजी चिकित्सालयों को मंगलवार से अनिश्चितकाल के लिए बंद की चेतावनी दी है। एसोसिएशन की ऋषिकेश इकाई के अध्यक्ष हरिओम प्रसाद ने बताया कि सीईए एक्ट के मानकों के अव्यवहारिक होने के कारण निजी अस्पताल इस कानून के तहत पंजीकृत होने में असमर्थ हैं। सरकारी आदेशानुसार गैर पंजीकृत अस्पतालों को तुरंत शील किया जाना है। सीलिंग से बचने के लिए निजी अस्पताल संचालक स्वत: ही बंद करने के लिए मजबूर हैं।
आईएमए को आरोप है कि प्रदेश सरकार सभी निजी अस्पतालों पर जबरन जन विरोधी कठोर कानून थोप रही है। एसोसिएशन की दलील है कि सीईए कानून लागू होने से मरीजों का 40 प्रतिशत तक इलाज महंगा हो जाएगा। प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये व उच्च न्यायालय के आदेश के तहत सीलबंदी की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
क्यों गले की फांस बना है एक्ट
क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट देश के कई राज्यों में लागू है। उत्तराखंड में भी इस एक्ट को लागू करने की कवायद शुरू हुई है। इस एक्ट के तहत व्यवस्था की गई है कि निजी अस्पताल खोलने से पहले नए नियमों के मुताबिक अस्पताल का क्षेत्रफल, चिकित्सीय उपकरण और शुल्क समान रूप से लागू करने होंगे। अस्पताल में चिकित्सकों की सूची भी सरकार को सौंपनी होगी। नए मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही पंजीकृत किया जाएगा। बाकी अस्पताल अवैध घोषित कर दिए जाएंगे। एक्ट लागू होने के बाद समान चिकित्सीय सुविधाओं के लिए सरकार की ओर से तय फीस पर ही सुविधा उपलब्ध कराने की बाध्यता होगी। इतना ही नहीं कई अस्पताल तो घरों से संचालित हो रहे हैं।
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आईएमए को आरोप है कि प्रदेश सरकार सभी निजी अस्पतालों पर जबरन जन विरोधी कठोर कानून थोप रही है। एसोसिएशन की दलील है कि सीईए कानून लागू होने से मरीजों का 40 प्रतिशत तक इलाज महंगा हो जाएगा। प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये व उच्च न्यायालय के आदेश के तहत सीलबंदी की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
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क्यों गले की फांस बना है एक्ट
क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट देश के कई राज्यों में लागू है। उत्तराखंड में भी इस एक्ट को लागू करने की कवायद शुरू हुई है। इस एक्ट के तहत व्यवस्था की गई है कि निजी अस्पताल खोलने से पहले नए नियमों के मुताबिक अस्पताल का क्षेत्रफल, चिकित्सीय उपकरण और शुल्क समान रूप से लागू करने होंगे। अस्पताल में चिकित्सकों की सूची भी सरकार को सौंपनी होगी। नए मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही पंजीकृत किया जाएगा। बाकी अस्पताल अवैध घोषित कर दिए जाएंगे। एक्ट लागू होने के बाद समान चिकित्सीय सुविधाओं के लिए सरकार की ओर से तय फीस पर ही सुविधा उपलब्ध कराने की बाध्यता होगी। इतना ही नहीं कई अस्पताल तो घरों से संचालित हो रहे हैं।
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