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बेटियों के पंख मजबूत, उड़ान के लिए चाहिए खुला आसमान
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
जागरुकता से ही दहेज हत्या, भ्रूणहत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों पर अंकुश लगया जा सकता है। महिला जागरुकता के लिए अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे मिशन अपराजिता-100 मिलियन स्माइल अभियान महिला सशक्तिकरण के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
यह बातें समाजसेवी ममता नेगी ने बुधवार को मीरा नगर में आयोजित अमर उजाला के मिशन अपराजिता-100 मिलियन स्माइल के कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि जागरुकता से ही दहेज हत्या, भ्रूणहत्या और दुष्कर्म जैसे महिला अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। इसके लिए महिलाओं को शिक्षित होने के साथ ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की नितांत आवश्यकता है। अशिक्षा और जागरुकता के अभाव में अक्सर महिलाएं अपने ऊपर हो रहे जुर्म को सहने के लिए विवश हो जाती हैं। इससे अपराधियों के हौंसले और मजबूत हो जाते हैं। वर्तमान में लड़कियां शिक्षा के क्षेत्र में मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं। अपने अधिकारों के प्रति काफी हद तक सजग हो रही हैं। लड़कियां शिक्षित होकर देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही हैं। इसके बावजूद अभी पिछड़े इलाकों ओर झोपण पट्टी में रहने वाले लोग लड़कियों की शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों के घर-घर जाकर बालिका शिक्षा के लिए लोगों को जागरूक करे। सरकार ने सबको शिक्षित करने के लिए सर्वशिक्षा अभियान तो चलाया है, लेकिन जमीनी स्तर इसका पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है। इस अवसर पर आशा रौथाण, सुषमा बिष्ट, हेमलता चौहान, दुर्गा देवी, सुनिता बिष्ट, मीरा रौथाण, संगीता रावत, देवेश्वरी बिष्ट, भावना देवी, राजी नेगी, कैलाशवती, सरिता चौहान, सरोजनी देवी, जानकी देवी, सीता देवी आदि मौजूद रहीं।
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दहेज प्रथा, बाल विवाह, बेटियों की अशिक्षा, यौन शोषण और समाज में बराबरी का हिस्सा न होना जैसे अनेक बुराइयों ने बेटियों को असुरक्षित कर दिया है। बीते कुछ वर्षों में लैंगिक विषमता दूर करने के प्रयासों में तेजी आई है। फिलहाल अभी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।
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-सुंदरी कंडवाल, समाजसेविका
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सामाजिक उत्थान और देश के अर्थिक विकास के लिए महिलाओं को हर स्तर पर सशक्त होने की आवश्यकता है। महिलाओं ने अपने अधिकारों और कर्तव्यों को सही मायने में पहचानना शुरू किया है। अब नारी अबला नहीं सबला बन चुकी है।
-नंदनी चौहान गृहणी
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वर्तमान में बदलाव दिख रहा है। बेटियां आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। वह काम का हर क्षेत्र चुन रही हैं, जहां पुरुषों का एकाधिकार था। हमारी बेटियों के पंख मजबूत हैं उन्हें उड़ने के लिए खुला आसमान चाहिए।
-शोभा कोठियाल गृहणी
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समाज में महिलाओं को एकजुटता दिखानी चाहिए। यदि एक महिला चाहे तो दूसरी महिला को बहुत आगे पहुंचा सकती है। बेटियों को जिम्मेदारी मिलने पर अपनी योग्यता के जरिए विकास का नया मुहावरा गढ़ सकती हैं। बेटियों को अपना रास्ता चुनने की आजादी होनी चाहिए।
-प्रमिला त्रिवेदी, गृहिणी
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जागरुकता से ही दहेज हत्या, भ्रूणहत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों पर अंकुश लगया जा सकता है। महिला जागरुकता के लिए अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे मिशन अपराजिता-100 मिलियन स्माइल अभियान महिला सशक्तिकरण के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
यह बातें समाजसेवी ममता नेगी ने बुधवार को मीरा नगर में आयोजित अमर उजाला के मिशन अपराजिता-100 मिलियन स्माइल के कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि जागरुकता से ही दहेज हत्या, भ्रूणहत्या और दुष्कर्म जैसे महिला अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। इसके लिए महिलाओं को शिक्षित होने के साथ ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की नितांत आवश्यकता है। अशिक्षा और जागरुकता के अभाव में अक्सर महिलाएं अपने ऊपर हो रहे जुर्म को सहने के लिए विवश हो जाती हैं। इससे अपराधियों के हौंसले और मजबूत हो जाते हैं। वर्तमान में लड़कियां शिक्षा के क्षेत्र में मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं। अपने अधिकारों के प्रति काफी हद तक सजग हो रही हैं। लड़कियां शिक्षित होकर देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही हैं। इसके बावजूद अभी पिछड़े इलाकों ओर झोपण पट्टी में रहने वाले लोग लड़कियों की शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों के घर-घर जाकर बालिका शिक्षा के लिए लोगों को जागरूक करे। सरकार ने सबको शिक्षित करने के लिए सर्वशिक्षा अभियान तो चलाया है, लेकिन जमीनी स्तर इसका पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है। इस अवसर पर आशा रौथाण, सुषमा बिष्ट, हेमलता चौहान, दुर्गा देवी, सुनिता बिष्ट, मीरा रौथाण, संगीता रावत, देवेश्वरी बिष्ट, भावना देवी, राजी नेगी, कैलाशवती, सरिता चौहान, सरोजनी देवी, जानकी देवी, सीता देवी आदि मौजूद रहीं।
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दहेज प्रथा, बाल विवाह, बेटियों की अशिक्षा, यौन शोषण और समाज में बराबरी का हिस्सा न होना जैसे अनेक बुराइयों ने बेटियों को असुरक्षित कर दिया है। बीते कुछ वर्षों में लैंगिक विषमता दूर करने के प्रयासों में तेजी आई है। फिलहाल अभी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।
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-सुंदरी कंडवाल, समाजसेविका
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सामाजिक उत्थान और देश के अर्थिक विकास के लिए महिलाओं को हर स्तर पर सशक्त होने की आवश्यकता है। महिलाओं ने अपने अधिकारों और कर्तव्यों को सही मायने में पहचानना शुरू किया है। अब नारी अबला नहीं सबला बन चुकी है।
-नंदनी चौहान गृहणी
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वर्तमान में बदलाव दिख रहा है। बेटियां आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। वह काम का हर क्षेत्र चुन रही हैं, जहां पुरुषों का एकाधिकार था। हमारी बेटियों के पंख मजबूत हैं उन्हें उड़ने के लिए खुला आसमान चाहिए।
-शोभा कोठियाल गृहणी
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समाज में महिलाओं को एकजुटता दिखानी चाहिए। यदि एक महिला चाहे तो दूसरी महिला को बहुत आगे पहुंचा सकती है। बेटियों को जिम्मेदारी मिलने पर अपनी योग्यता के जरिए विकास का नया मुहावरा गढ़ सकती हैं। बेटियों को अपना रास्ता चुनने की आजादी होनी चाहिए।
-प्रमिला त्रिवेदी, गृहिणी