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बढ़ती जनसंख्या हम सबके लिए बड़ी चुनौती
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । लगातार बढ़ रही जनसंख्या हम सबके लिए एक चुनौती बन गई है। यदि समय रहते इस समस्या पर अंकुश न लगाया गया तो इसका परिणाम गंभीर देखने को मिल सकते हैं। सीमित संसाधनों पर बढ़ रहा आबादी का बोझ भुखमरी और महंगाई को बढ़ावा दे रहा है। शुक्रवार को श्यामपुर में अमर उजाला की ओर से मिशन अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत जनसंख्या वृद्धि पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम प्रधान शाकुंबरी बिष्ट ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की जनसंख्या 125 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है, जो हम सब के लिए चुनौती का विषय है।
वर्तमान में काफी हद तक जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए महिलाओं की सोच बदली है। फिर भी जन जागरुकता के अभाव में अब भी काफी लोग इसके असर से अनभिज्ञ हैं। सरकारेें जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए काफी प्रचार प्रसार तो कर रही है लेकिन जागरुकता के अभाव में जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव कम ही देखने को मिल रहा है। पढ़ी लिखी महिलाएं अब काफी जागरूक हो चुकी हैं। हम दो हमारे दो का जो स्लोगन है वह सच साबित हो रहा है। अक्सर देखने को मिलता है कि झोपड़ पट्टी में रहने वाले लोग मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। जानकारी के अभाव में उनके पांच से अधिक बच्चे पैदा हो रहे हैं। खास कर ऐसे लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
वर्तमान में जिस प्रकार जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है वह देश ही नहीं हम सब के लिए एक चुनौती है। इस पर नियंत्रण पाने के लिए हम सब को सामूहिक प्रयास करना होगा। इसके लिए समय-समय पर जन जागरुकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है।
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- कुसुम तोमर, गृहणी
सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर कानून बनाने की आवश्यकता है। हमें बेटी और बेटे के बीच भेदभाव खत्म करना होगा। कानून को धर्म से परे रखकर क्रियान्वयन किया जाएगा तभी जनसंख्या नियंत्रण पर प्रभावी नतीजे सामने आएंगे।
- सीमा रावत, गृहणी
वर्तमान में महिलाएं जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए महिलाएं काफी जागरूक हो रही हैं। अब भी कुछ लोगों की मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है। जनजागरुकता के माध्यम से ही ऐसे लोगों की सोच को बदला जा सकता है।
- रुचिता पंवार, गृहणी
- आज भी कई परिवारों में बेटा और बेटी में फर्क किया जा रहा है। जिससे जनसंख्या में वृद्धि हो रही है। जिस दिन ऐसे लोगों की सोच बदल जाएगी उस दिन जनसंख्या वृद्धि पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
- पिंकी चतुर्वेदी, गृहणी
आज देश के सामने जनसंख्या वृद्धि एक विस्फोटक का रूप धारण कर रही है। इसको नियंत्रित करने की नितांत आवश्यकता है। इसी रफ्तार से जनसंख्या वृद्घि होती रही तो एक दिन दुनिया में हाहाकार मच जाएगा।
- माया देवी गृहणी
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वर्तमान में काफी हद तक जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए महिलाओं की सोच बदली है। फिर भी जन जागरुकता के अभाव में अब भी काफी लोग इसके असर से अनभिज्ञ हैं। सरकारेें जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए काफी प्रचार प्रसार तो कर रही है लेकिन जागरुकता के अभाव में जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव कम ही देखने को मिल रहा है। पढ़ी लिखी महिलाएं अब काफी जागरूक हो चुकी हैं। हम दो हमारे दो का जो स्लोगन है वह सच साबित हो रहा है। अक्सर देखने को मिलता है कि झोपड़ पट्टी में रहने वाले लोग मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। जानकारी के अभाव में उनके पांच से अधिक बच्चे पैदा हो रहे हैं। खास कर ऐसे लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
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वर्तमान में जिस प्रकार जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है वह देश ही नहीं हम सब के लिए एक चुनौती है। इस पर नियंत्रण पाने के लिए हम सब को सामूहिक प्रयास करना होगा। इसके लिए समय-समय पर जन जागरुकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है।
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- कुसुम तोमर, गृहणी
सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर कानून बनाने की आवश्यकता है। हमें बेटी और बेटे के बीच भेदभाव खत्म करना होगा। कानून को धर्म से परे रखकर क्रियान्वयन किया जाएगा तभी जनसंख्या नियंत्रण पर प्रभावी नतीजे सामने आएंगे।
- सीमा रावत, गृहणी
वर्तमान में महिलाएं जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए महिलाएं काफी जागरूक हो रही हैं। अब भी कुछ लोगों की मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है। जनजागरुकता के माध्यम से ही ऐसे लोगों की सोच को बदला जा सकता है।
- रुचिता पंवार, गृहणी
- आज भी कई परिवारों में बेटा और बेटी में फर्क किया जा रहा है। जिससे जनसंख्या में वृद्धि हो रही है। जिस दिन ऐसे लोगों की सोच बदल जाएगी उस दिन जनसंख्या वृद्धि पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
- पिंकी चतुर्वेदी, गृहणी
आज देश के सामने जनसंख्या वृद्धि एक विस्फोटक का रूप धारण कर रही है। इसको नियंत्रित करने की नितांत आवश्यकता है। इसी रफ्तार से जनसंख्या वृद्घि होती रही तो एक दिन दुनिया में हाहाकार मच जाएगा।
- माया देवी गृहणी