{"_id":"5cf97322bdec22074b0aad6a","slug":"15598518047-rishikesh-news179","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचायत अधिकारियों की शह पर चल रही अवैध पार्किंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचायत अधिकारियों की शह पर चल रही अवैध पार्किंग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। तपोवन स्थित अवैध पार्किंग के मामले में जिला पंचायत की भूमिका भी उजागर हुई है। व्यावसायिक कर के नाम पर पंचायत अफसर हर माह 10 हजार रुपये वसूल रहे हैं। इसके एवज में रूप पत्र जारी नहीं किया जा रहा है। निजी अवैध पार्किंग का संचालन बिना किसी अनुमति के हो रहा है। तपोवन और लक्ष्मणझूला के स्थानीय लोगों के साथ ग्राम पंचायत की ओर से जिला पंचायत को पार्किंग की भूमि उपलब्ध कराने को कई बार पत्राचार हो चुका है।
स्थायी समाधान की बजाए जिला पंचायत के अफसर सुविधा शुल्क को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। सारे नियमों को दरकिनार कर मिलीभगत से जिला पंचायत ने यहां पर निजी अवैध पार्किंग खुलवा दी है। यह पार्किंग न तो मानकों को पूरा करती है न ही वैधानिकता की कोई शर्त पूरी कर रही है। पार्किंग के लिए परमिशन न होना और शौचालय न होना पार्किंग को अवैध दर्शाते हैं। इसके बाद भी जिला पंचायत विभाग पार्किंग से व्यवसाय टैक्स वसूल रहा है और रूप पत्र भी नहीं दे रहा है।
पार्किंग कर्मी के अनुसार भूमि का मालिक इस अवैध कारोबार से अठारह लाख रुपये सालाना उगाही कर रहा है। प्रतिदिन यहां करीब पचास से साठ वाहन खड़े होते हैं और उनका शुल्क 200 से लेकर 300 रुपये तक वसूला जा रहा है। इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की बजाए जिम्मेदार अफसर खुद भी बहती गंगा में हाथ धोने में जुटे हैं।
विज्ञापन
यदि बिना अनुमति निजी भूमि पर पार्किंग हो रही है और पंचायत स्तर पर व्यवसाय शुल्क वसूलकर रूप पत्र भी जारी नहीं किया जा रहा है तो दोनों पक्ष गलत हैं। यह मामला सब डिवीजन स्तर का है। मुझे जानकारी नहीं है कि यह मामला एसडीएम स्तर पर संज्ञान में है कि नहीं। मैं एसडीएम को बोल देती हूं कि प्रकरण का संज्ञान लेकर जांच करें।
- सोनिका, जिलाधिकारी, टिहरी
विज्ञापन
स्थायी समाधान की बजाए जिला पंचायत के अफसर सुविधा शुल्क को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। सारे नियमों को दरकिनार कर मिलीभगत से जिला पंचायत ने यहां पर निजी अवैध पार्किंग खुलवा दी है। यह पार्किंग न तो मानकों को पूरा करती है न ही वैधानिकता की कोई शर्त पूरी कर रही है। पार्किंग के लिए परमिशन न होना और शौचालय न होना पार्किंग को अवैध दर्शाते हैं। इसके बाद भी जिला पंचायत विभाग पार्किंग से व्यवसाय टैक्स वसूल रहा है और रूप पत्र भी नहीं दे रहा है।
विज्ञापन
पार्किंग कर्मी के अनुसार भूमि का मालिक इस अवैध कारोबार से अठारह लाख रुपये सालाना उगाही कर रहा है। प्रतिदिन यहां करीब पचास से साठ वाहन खड़े होते हैं और उनका शुल्क 200 से लेकर 300 रुपये तक वसूला जा रहा है। इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की बजाए जिम्मेदार अफसर खुद भी बहती गंगा में हाथ धोने में जुटे हैं।
विज्ञापन
यदि बिना अनुमति निजी भूमि पर पार्किंग हो रही है और पंचायत स्तर पर व्यवसाय शुल्क वसूलकर रूप पत्र भी जारी नहीं किया जा रहा है तो दोनों पक्ष गलत हैं। यह मामला सब डिवीजन स्तर का है। मुझे जानकारी नहीं है कि यह मामला एसडीएम स्तर पर संज्ञान में है कि नहीं। मैं एसडीएम को बोल देती हूं कि प्रकरण का संज्ञान लेकर जांच करें।
- सोनिका, जिलाधिकारी, टिहरी