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52वीं बार भगवान बदरी के दर्शन को पहुंची 102 साल की चंद्रकली
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। 102 साल की श्रद्धालु चंद्रकली केसरवानी 52वीं बार भगवान बदरी विशाल के दर्शनों को पहुंची हैं। रोशनबाग, इलाहाबाद की रहने वालीं चंद्रकली अपने मोहल्ले की 16 महिलाओं के साथ यात्रा पर पहुंची हैं। उनका जज्बा युवाओं को भी मात करने वाला है। उम्र के सौ से अधिक बसंत देखने के बावजूद बीमारी उन्हें छू तक नहीं गई है।
बीते शुक्रवार की शाम ऋषिकेश पहुंची चंद्रकली केसरवानी पूर्व में अपने पति स्व. बच्चूलाल केसरवानी के साथ तीर्थयात्रा पर आया करती थीं। पति के देहांत के बाद भी उन्होंने तीर्थ पर आने का क्रम टूटने नहीं दिया। चंद्रकली के एक बेटा और बेटी की मृत्यु भी हो चुकी है। इस वक्त उनके परिवार में उनके दो पोते और एक पोती हैं। सभी शादीशुदा हैं। उनके पड़पोते भी हैं। नाती इलाहबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश है। उनका कहना है कि दुनियावी जिम्मेदारियों से वे मुक्त हो चुकी हैं। ईश्वर ने जो उम्र बख्शी है, उसे वह प्रभु सेवा में लीन करने की कोशिश कर रही हैं।
लाइन में नहीं लगने देते पंडित
वर्ष 2013 में आपदा आने से पूर्व वह बदरी भगवान के दर्शन कर चुकी थीं। यात्रा के दौरान ज्यादातर ऋषिकेश स्थित बाबा काली कमली धर्मशाला में रुकने वालीं चंद्रकली के मुताबिक उन्हें बदरीनाथ धाम के पंडित भी जानते हैं। काफी आदर सत्कार से पेश आते है। दर्शन के लिए लाइन में भी नहीं लगने देते।
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बगैर चश्मा साफ नजर आता है
चंद्रकली के साथ भगवान बदरी विशाल के दर्शन को पहुंची मुन्नी देवी, अपर्णा चौहान, शांति देवी, नीलम, गीता और शकुंतला देवी बताती हैं कि केसरवानी दादी गांव में सभी लोगों की प्रेरणा स्त्रोत हैं। बगैर सहारे चलती हैं। बिना चश्मे के साफ देख पाती हैं। सुनने पर भी उम्र का कोई असर नहीं है।
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बीते शुक्रवार की शाम ऋषिकेश पहुंची चंद्रकली केसरवानी पूर्व में अपने पति स्व. बच्चूलाल केसरवानी के साथ तीर्थयात्रा पर आया करती थीं। पति के देहांत के बाद भी उन्होंने तीर्थ पर आने का क्रम टूटने नहीं दिया। चंद्रकली के एक बेटा और बेटी की मृत्यु भी हो चुकी है। इस वक्त उनके परिवार में उनके दो पोते और एक पोती हैं। सभी शादीशुदा हैं। उनके पड़पोते भी हैं। नाती इलाहबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश है। उनका कहना है कि दुनियावी जिम्मेदारियों से वे मुक्त हो चुकी हैं। ईश्वर ने जो उम्र बख्शी है, उसे वह प्रभु सेवा में लीन करने की कोशिश कर रही हैं।
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लाइन में नहीं लगने देते पंडित
वर्ष 2013 में आपदा आने से पूर्व वह बदरी भगवान के दर्शन कर चुकी थीं। यात्रा के दौरान ज्यादातर ऋषिकेश स्थित बाबा काली कमली धर्मशाला में रुकने वालीं चंद्रकली के मुताबिक उन्हें बदरीनाथ धाम के पंडित भी जानते हैं। काफी आदर सत्कार से पेश आते है। दर्शन के लिए लाइन में भी नहीं लगने देते।
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बगैर चश्मा साफ नजर आता है
चंद्रकली के साथ भगवान बदरी विशाल के दर्शन को पहुंची मुन्नी देवी, अपर्णा चौहान, शांति देवी, नीलम, गीता और शकुंतला देवी बताती हैं कि केसरवानी दादी गांव में सभी लोगों की प्रेरणा स्त्रोत हैं। बगैर सहारे चलती हैं। बिना चश्मे के साफ देख पाती हैं। सुनने पर भी उम्र का कोई असर नहीं है।