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गड़बड़ियों के खिलाफ जांच का झुनझुना बजा, कार्रवाई सिफर

Mon, 18 Feb 2019 12:44 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 18 Feb 2019 12:44 AM IST
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गड़बड़ियों के खिलाफ जांच का झुनझुना बजा, कार्रवाई सिफर
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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नगर निगम ऋषिकेश को अस्तित्व में आए करीब ढाई महीने हो गए हैं। इस छोटी सी अवधि में विकास के कार्य भले ही जमीन पर न उतर पाए हों, गड़बड़ियां बेतहाशा सामने आई हैं। इस ढाई महीने की अवधि में अब तक कुल 34 मामले ऐसे सामने आए हैं जिनमें घोर अनियमितता हुई है। इन सभी मामलों में घपला स्वीकारते हुए जांच का झुनझुना भी बजा, लेकिन नतीजा सिफर है।
निकाय चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से मेयर प्रत्याशी रहीं अनिता ममगाईं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया था। प्रदेश सरकार की तर्ज पर भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस का रुख अख्तियार करने की बात कही थी। मेयर बनने के बाद अनिता ममगाईं के सामने भ्रष्टाचार के कई मामले आ गए हैं।
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कुछ प्रमुख मामले
बीते ढाई महीने के कार्यकाल में जिन मामलों का खुलासा हुआ उनमें से कुछ इस प्रकार है। सूची में 187 दुकानों को खुर्दबुर्द करने का मामला, नियम विरुद्ध दुकानों का स्वरूप और आवंटन, मनमाने तरीके से टैक्स वसूली, कांजी हाउस की जमीन पर चहेतों को दुकान खैरात में देना, गंगा सभा को निगम की संपत्ति मुफ्त में आवंटित करना, 2014 के शासनादेश के मुताबिक कर वसूली न करना, अहम दस्तावेजों को गुपचुप तरीके से जलाना, नियम विरुद्ध संपत्तियों का नामांतरण, निगम कर्मचारियों के परिजनों के नाम पर नियम विरुद्ध दुकानें आवंटित करवाना, संपत्तियों की फाइलों से अहम दस्तावेज फाड़कर गायब करना जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
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ये वो मामले हैं जो कि पालिका प्रबंधन की कार्यप्रणाली से जुड़े हैं। इसके अलावा दो नए मामले सामने आए। इनमें आदर्श सोसायटी की संपत्ति का नियम विरुद्ध नामांकन और एक ही व्यक्ति को दो-दो बार हाउस टैक्स का बिल थमाने का मामला शामिल है।
विकास योजनाओं से ज्यादा घपलों का जखीरा
जितने भी घपले उजागर हुए हैं उन्हें बोर्ड बैठक के लिए धकेला जा रहा है। हालत ये है कि विकास कार्य से जुड़ी योजनाओं से ज्यादा घपलों का जखीरा जमा हो चुका है। आला से अदना तक इस फिराक में हैं कि जितना हो सके घपलों से जनता का ध्यान खींचा जा सके। हालात ये हैं कि जो अफसर जांच और कार्रवाई के लिए मियाद तय कर चुके थे वे भी गले में घंटी बांधने से बच रहे हैं। यही वजह है कि सारा मामला बोर्ड बैठक में रखने के नाम पर फाइलों को दरबदर किया जा रहा है।
आदर्श सोसायटी घोटाला भी लचर कार्यप्रणाली की भेंट चढ़ा
अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद सामने आया आदर्श सोसायटी घोटाला भी निगम प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली की भेंट चढ़ सकता है। मेयर से लेकर मुख्य नगर आयुक्त तक के सामने खुलासा हुआ कि नियम विरुद्घ तरीके से गुपचुप संपत्ति का नामांतरण किया गया। इतना ही नहीं फाइलों से अहम दस्तावेज भी फाड़कर गायब कर दिए गए। इस मामले में मेयर ने मुख्य नगर आयुक्त प्रेमलाल को जांच के आदेश भी दिए हैं। इसके बावजूद हफ्तेभर से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन जांच शुरू नहीं हो पाई है। मेयर की दलील है कि मुख्य नगर आयुक्त को जांच के लिए कह दिया गया है। वह अपने स्तर से मामले की पड़ताल करवाएंगे।
उधर, पार्षद अजीत सिंह गोल्डी का कहना है कि बीते बृहस्पतिवार को राजीव सिंघल की ओर से आदर्शनगर सोसायटी मामले में संपत्ति नामांतरण के खिलाफ आपत्ति पत्र नगर आयुक्त को सौंप दिया गया था। अपत्ति से संबंधित एक प्रति मेयर को भी दी गई थी। उधर, मेयर अनिता ममगाईं का कहना है कि अभी तक आदर्श नगर सोसायटी मामले में नामांतरण के खिलाफ कोई आपत्ति पत्र मुझे नहीं दिया गया है।

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ढाई महीने में 34 घोटालों का प्रकरण सामने आना बेहद गंभीर है। निगम प्रशासन यदि जांच कर पा रहा है तो बेहतर रहेगा, वरना शासन को भेजें हम पूरी पड़ताल कराकर सख्त कार्रवाई करवाएंगे। फाइलों से अहम कागज तक फाड़ दिए जा रहे हैं तो बेहद संगीन मामला है। यदि निगम खुद समय रहते ऐसे मामलों को संभालने में सक्षम हुआ तो ठीक है, अन्यथा हम ऐसे प्रकरण को दिखवाएंगे।
-मदन कौशिक, शहरी विकास मंत्री
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