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एम्स में इंटर्नशिप ओरिएंटेशन कोर्स शुरू
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बुधवार से एमबीबीएस के वर्ष 2014 बैच के विद्यार्थियों का इंटर्नशिप ओरिएंटेशन कोर्स शुरू हो गया। साल भर चलने वाली इस इंटर्नशिप में एमबीबीएस छात्र छात्राओं को संस्थान के विभिन्न विभागों में कार्य करने का अवसर मिलेगा।
बुधवार को एम्स निदेशक रवि कांत ने सात दिवसीय स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम का शुभारंभ किया। प्रो. रवि कांत ने कहा कि मेडिकल प्रैक्टिस साक्ष्य आधारित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एक अच्छे चिकित्सक में मरीजों के लिए उपलब्धता, मिलनसार और चिकित्सा क्षेत्र की अच्छी योग्यता जैसे गुणों का होना जरूरी है। एमबीबीएस स्टूडेंट्स का प्रयास सिर्फ डॉक्टर बनने का नहीं, बल्कि अच्छा डॉक्टर बनने का होना चाहिए। उन्होंने इंटर्नस् को बताया कि चिकित्सक का मरीज के साथ पारिवारिक सदस्यों की तरह व्यवहार होना चाहिए। डॉ. शालिनी राव ने बताया गया कि प्रशिक्षण में इंटर्न स्टूडेंट्स को हैंड हाईजीन, स्ट्रेस मैनेजमेंट, बायोमेडिकल वेस्ट, बेसिक लाइफ सपोर्ट आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद प्रशिक्षु चिकित्सकों को विभिन्न विभागों में तैनात किया जाएगा, जहां वह एक वर्ष तक व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस बैच में करीब 97 विद्यार्थी शामिल हैं। इस अवसर पर प्रोफेसर बीना रवि, प्रो. बिनय कुमार बस्तिया, डॉ. फरहान उल हुदा, डॉ. राजेश कथरोटिया आदि मौजूद रहे।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बुधवार से एमबीबीएस के वर्ष 2014 बैच के विद्यार्थियों का इंटर्नशिप ओरिएंटेशन कोर्स शुरू हो गया। साल भर चलने वाली इस इंटर्नशिप में एमबीबीएस छात्र छात्राओं को संस्थान के विभिन्न विभागों में कार्य करने का अवसर मिलेगा।
बुधवार को एम्स निदेशक रवि कांत ने सात दिवसीय स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम का शुभारंभ किया। प्रो. रवि कांत ने कहा कि मेडिकल प्रैक्टिस साक्ष्य आधारित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एक अच्छे चिकित्सक में मरीजों के लिए उपलब्धता, मिलनसार और चिकित्सा क्षेत्र की अच्छी योग्यता जैसे गुणों का होना जरूरी है। एमबीबीएस स्टूडेंट्स का प्रयास सिर्फ डॉक्टर बनने का नहीं, बल्कि अच्छा डॉक्टर बनने का होना चाहिए। उन्होंने इंटर्नस् को बताया कि चिकित्सक का मरीज के साथ पारिवारिक सदस्यों की तरह व्यवहार होना चाहिए। डॉ. शालिनी राव ने बताया गया कि प्रशिक्षण में इंटर्न स्टूडेंट्स को हैंड हाईजीन, स्ट्रेस मैनेजमेंट, बायोमेडिकल वेस्ट, बेसिक लाइफ सपोर्ट आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद प्रशिक्षु चिकित्सकों को विभिन्न विभागों में तैनात किया जाएगा, जहां वह एक वर्ष तक व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस बैच में करीब 97 विद्यार्थी शामिल हैं। इस अवसर पर प्रोफेसर बीना रवि, प्रो. बिनय कुमार बस्तिया, डॉ. फरहान उल हुदा, डॉ. राजेश कथरोटिया आदि मौजूद रहे।
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