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देश में श्रम शोषण बुद्धिजीवियों का षड़यंत्र रहा
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। भारत में श्रम शोषण बुद्धिजीवियों, पूंजीपतियों का सुविचारित एवं सुनियोजित षड़यंत्र रहा है। एक तरफ जहां शिक्षा को ज्ञान का आधार बताया गया, वहीं समाज में इस भ्रम को भी फैलाया कि देश में बढ़ती हुई बेरोजगारी का कारण सही बेहतर शिक्षा का अभाव है। यह बात बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान के महानिदेशक आचार्य पंकज ने रविवार को संस्थान में आयोजित नियमित ज्ञान यज्ञ में कही। आचार्य पंकज ने कहा कि बुद्धिजीवियों के उक्त कथित तर्कों का ज्ञान, शिक्षा, बेरोजगारी, श्रम शोषण के प्रमुख कारणों से दूर-दूर तक कहीं लेना देना नहीं है।
पूंजीवादी वर्ग इस बात से भली-भांति अवगत हैं कि जब तक श्रम शोषण होगा तब तक उनका अस्तित्व और मजबूत होता रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा लगातार बढ़ती जा रही है जबकि उसके अनुपात में ज्ञान निरंतर घटता जा रहा है। बड़े-बड़े विद्वान इस बात को जानते हुए भी अंजान बनने का प्रयास करते हैं कि ज्ञान और शिक्षा अलग-अलग होते हैं। शिक्षा किसी अन्य से प्राप्त होती है। यह निर्विवाद है कि ज्ञान के 3 स्रोत होते हैं जन्म पूर्व के संस्कार, पारिवारिक वातावरण व सामाजिक परिवेश।
इस अवसर पर बजरंग मुनि ने कहा कि पिछले कई दशकों से एक सुनियोजित साजिश के तहत परिवार व्यवस्था और समाज व्यवस्था को कमजोर करने के कारण पूरी दुनिया में विशेषकर भारत में ज्ञान तेजी से घट रहा है। इसी का लाभ उठाते हुए भारत में बुद्धिजीवियों ने जाति आरक्षण, शिक्षा विस्तार, कृत्रिम ऊर्जा मूल्य नियंत्रण को आधार बनाकर पूंजीपति शहरी बुद्धिजीवी उपभोक्ताओं को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया है। इस अवसर पर संस्थान के कुलसचिव नवीन कुमार शर्मा,अंकित नैथानी, इंद्रकुमार गोदवानी, ललित मोहन मिश्र, प्रमोद कुमार वात्सल्य, दीपक दरगन, रवि शास्त्री, राम चौबे, अभिषेक शर्मा,, मधु असवाल, पुष्पा ध्यानी, अनुसूया प्रसाद, रामावल्लभ भट्ट, प्रेमदत्त डिमरी, पवन कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।
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पूंजीवादी वर्ग इस बात से भली-भांति अवगत हैं कि जब तक श्रम शोषण होगा तब तक उनका अस्तित्व और मजबूत होता रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा लगातार बढ़ती जा रही है जबकि उसके अनुपात में ज्ञान निरंतर घटता जा रहा है। बड़े-बड़े विद्वान इस बात को जानते हुए भी अंजान बनने का प्रयास करते हैं कि ज्ञान और शिक्षा अलग-अलग होते हैं। शिक्षा किसी अन्य से प्राप्त होती है। यह निर्विवाद है कि ज्ञान के 3 स्रोत होते हैं जन्म पूर्व के संस्कार, पारिवारिक वातावरण व सामाजिक परिवेश।
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इस अवसर पर बजरंग मुनि ने कहा कि पिछले कई दशकों से एक सुनियोजित साजिश के तहत परिवार व्यवस्था और समाज व्यवस्था को कमजोर करने के कारण पूरी दुनिया में विशेषकर भारत में ज्ञान तेजी से घट रहा है। इसी का लाभ उठाते हुए भारत में बुद्धिजीवियों ने जाति आरक्षण, शिक्षा विस्तार, कृत्रिम ऊर्जा मूल्य नियंत्रण को आधार बनाकर पूंजीपति शहरी बुद्धिजीवी उपभोक्ताओं को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया है। इस अवसर पर संस्थान के कुलसचिव नवीन कुमार शर्मा,अंकित नैथानी, इंद्रकुमार गोदवानी, ललित मोहन मिश्र, प्रमोद कुमार वात्सल्य, दीपक दरगन, रवि शास्त्री, राम चौबे, अभिषेक शर्मा,, मधु असवाल, पुष्पा ध्यानी, अनुसूया प्रसाद, रामावल्लभ भट्ट, प्रेमदत्त डिमरी, पवन कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।
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