{"_id":"5c2bd04dbdec22570e7909aa","slug":"11546375245-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बकाया न देने वाले शराब ठेकेदारों पर डीईओ मेहरबान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बकाया न देने वाले शराब ठेकेदारों पर डीईओ मेहरबान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला। ऋषिकेश। बकाया अदा न करने पर आबकारी विभाग की ओर से शराब ठेकों का लाइसेंस निरस्त करने की कई बार संस्तुति की जा चुकी है, लेकिन जिला आबकारी अधिकारी की मेहरबानी के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। सरकारी कोष को चूना लगाने के बावजूद अंग्रेजी शराब की दुकानें धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। ताजा मामला डोईवाला और लालतप्पड़ की शराब की दुकानों का सामने आया है। पिछले तीन महीने से डोईवाला और लालतप्पड़ में खुली अंग्रेजी शराब की दुकानें राजस्व अदा करने में कोताही बरत रही हैं। हाल ये है कि डोईवाला शराब ठेके पर अक्तूबर से लेकर दिसंबर तक 96 लाख और लालतप्पड़ की दुकान पर इसी अवधि का दो करोड़ से अधिक का राजस्व बकाया चल रहा है।
सरकारी कोष को चूना लगा रही उपरोक्त दोनों दुकानों के खिलाफ पूर्व में भी दो बार लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की जा चुकी। तीसरी बार फिर दोनों दुकानें निरस्त करने की संस्तुति हुई है। नियमानुसार राजस्व अदा न करने पर जिला आबकारी अधिकारी उच्चाधिकारियों की सहमति से संस्तुति पर निरस्तीकरण और नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया अपनाते हैं। फिलहाल उपरोक्त दोनों ही दुकानों के मामले में निरस्तीकरण की संस्तुति जिला आबकारी अधिकारी तक पहुंच जाने के बाद भी फाइल दबी पड़ी है।
जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय का कहना है कि जिन दुकानों का राजस्व शेष है, उन्हें विभाग की ओर से कैंसिलेशन के नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद इन दुकानदारों ने थोड़ा-थोड़ा करके राजस्व देना शुरू किया है। इसी कारण कैंसिलेशन की कार्रवाई अभी आगे नहीं बढ़ाई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी कोष को चूना लगा रही उपरोक्त दोनों दुकानों के खिलाफ पूर्व में भी दो बार लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की जा चुकी। तीसरी बार फिर दोनों दुकानें निरस्त करने की संस्तुति हुई है। नियमानुसार राजस्व अदा न करने पर जिला आबकारी अधिकारी उच्चाधिकारियों की सहमति से संस्तुति पर निरस्तीकरण और नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया अपनाते हैं। फिलहाल उपरोक्त दोनों ही दुकानों के मामले में निरस्तीकरण की संस्तुति जिला आबकारी अधिकारी तक पहुंच जाने के बाद भी फाइल दबी पड़ी है।
विज्ञापन
जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय का कहना है कि जिन दुकानों का राजस्व शेष है, उन्हें विभाग की ओर से कैंसिलेशन के नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद इन दुकानदारों ने थोड़ा-थोड़ा करके राजस्व देना शुरू किया है। इसी कारण कैंसिलेशन की कार्रवाई अभी आगे नहीं बढ़ाई जा रही है।
विज्ञापन