फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Radhe-Radhe self-help group is earning lakhs of rupees from garbage in Roorkee

कूड़े से कमाई: बेलडा की महिलाओं का अनोखा कारनामा, 1800 घरों को स्वच्छता मुहिम से जोड़ा; कमा रहीं लाखों रुपये

Mon, 21 Apr 2025 08:07 AM IST
श्याम जी. अंकित गर्ग, अमर उजाला, देहरादून
अंकित गर्ग, अमर उजाला, देहरादून Published by: श्याम जी. Updated Mon, 21 Apr 2025 08:07 AM IST
सार

रुड़की के बेलडा गांव में राधे-राधे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कूड़ा संग्रह से सालाना साढ़े छह लाख रुपये कमा रही हैं। यह मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रहा है।

विज्ञापन
Radhe-Radhe self-help group is earning lakhs of rupees from garbage in Roorkee
कूड़े से कमाई (AI) - फोटो : freepik.com

विस्तार

रुड़की शहर के पास बेलडा गांव में कूड़े से लाखों कमाने वाला महिला स्वयं सहायता समूह पूरे प्रदेश के लिए नजीर बन गया है। घर-घर कूड़ा एकत्रीकरण योजना संचालित करने वालीं महिलाएं गांव के 1800 परिवारों से प्रतिमाह 30-30 रुपये की रसीद काट रही हैं। यही नहीं अब एक कदम और बढ़ाते हुए महिला समूह ने एक स्कूल से सालाना 50 हजार रुपये में कूड़ा उठाने के लिए अनुबंध किया है।
विज्ञापन


राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत रुड़की ब्लॉक में राधे-राधे स्वयं सहायता समूह रजिस्टर्ड है। ब्लॉक मिशन मैनेजर रोमा सैनी इस समूह को गांव में घर-घर जाकर कूड़ा एकत्र करने के लिए प्रेरित किया। महिला समूह से जुड़ीं गीता, कविता और शबाना ने बताया कि दो साल पहले जब उन्होंने घर-घर जाकर 30 रुपये लेने की बात कही तो कोई राजी नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कूड़ा एकत्र करने लगे तो धीरे-धीरे लोग पैसे देने लगे। अब दो साल के अंतराल में पैसा देने वाले परिवारों की संख्या 700 से बढ़कर 1800 हो गई है। 
विज्ञापन


सालाना करीब साढ़े छह लाख रुपये प्राप्त हो रहे
महिलाएं ग्लब्स आदि पहनकर कूड़ा एकत्र करती हैं। इन्होंने एक ट्रैक्टर और एक चालक भी किराये पर ले रखा है। महिलाएं कूड़े को ट्रॉली में डालती हैं और ग्राम प्रधान की ओर से निर्धारित किए गए स्थल पर ले जाती हैं, जहां इसका निस्तारण कराया जाता है। फिलहाल प्रतिमाह करीब 54 हजार रुपये के हिसाब से समूह को सालाना करीब साढ़े छह लाख रुपये प्राप्त हो रहे हैं। इसमें से 20 प्रतिशत खर्च हो जाता है। कमाई का कुछ अंश समूह के बैंक एकाउंट में भी जमा किया जाता है। वहीं अब महिलाओं के बेहतर काम को देखते हुए मोंटफोर्ट स्कूल ने भी कूड़ा उठान के लिए अनुबंध किया है। जबकि एक होटल से भी अनुबंध की बात चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
मॉडल को अन्य जगह लागू करने की तैयारी
ब्लॉक मिशन मैनेजर रोमा सैनी ने बताया कि सीडीओ हरिद्वार ने इस योजना की सराहना की है। उन्होंने प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी मॉडल को लागू करने का आश्वासन दिया है। साथ ही इस पूरे काम की एक वीडियो भी तैयार की गई है, ताकि महिलाओं को उनके इस कार्य के लिए सम्मान दिलाया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed