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पहले कुंभ नहा कर आएं राधे मां, तब मिलेगी गद्दी!
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 11 Sep 2013 07:28 PM IST
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पिछले वर्ष राधे मां और इस वर्ष दक्षिण के संत नित्यानंद क्रमश: जूना और निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर तो बन गए। लेकिन दोनों के हरिद्वार आने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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जूना अखाड़े के वरिष्ठ संतों ने राधे मां को हरिद्वार आने से एक बार फिर रोक दिया है। चूंकि अखाड़ों की राजनीति में सर्वाधिक बवाल हरिद्वार में ही मचता है, अत: जूना अखाड़े के वरिष्ठ संत चाहते हैं कि राधे मां नासिक और उज्जैन कुंभ में स्नान करने के बाद ही हरिद्वार आएं।
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गौरतलब है कि एक वर्ष पहले महामंडलेश्वर बनने के साथ ही निलंबित की गई राधे मां को हाल ही में जूना अखाड़े ने बहाल कर दिया है।
राधे मां को हरिद्वार लाकर गंगा स्नान कराया
जांच समिति के वरिष्ठ सदस्य महामंडलेश्वर पंचानंद गिरि के दिन-रात किए प्रयासों के कारण 11 सदस्यीय समिति झुक गई और राधे मां का निलंबन वापस ले लिया।
पंचानंद गिरि निलंबन वापस लेते ही प्रयास कर रहे थे कि राधे मां को हरिद्वार लाकर गंगा स्नान कराया जाए और इसी हरिद्वार में उन पर आरोप लगाने वालों को सबक सिखाया जाए।
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नासिक कुंभ से पहले ना
किंतु विचार विमर्श के बाद अखाड़े के वरिष्ठ संतों ने राधे मां को बहाल तो कर दिया, पर नासिक कुंभ से पहले उनके हरिद्वार आने के प्रयत्नों पर पानी फेर दिया। श्रीमहंतों ने स्पष्ट कर दिया अब नए सिरे से कोई विवाद खड़ा हो जाए, इसके लिए अखाड़ा तैयार नहीं है।
उधर, प्रयाग कुंभ में महमंडलेश्वर बने कर्नाटक के संत स्वामी नित्यानंद भी सीधे नासिक कुंभ जाएंगे। महानिर्वाणी अखाड़े ने भी उन्हें हरिद्वार बुलाने से इंकार कर दिया है। दोनों चर्चित संत महामंडलेश्वर तो बन गए लेकिन गंगा नहीं नहा पाएंगे।
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इनकी भी सुनिए
राधे मां को अखाड़े के श्रीमहंतों ने काशी में बैठक कर बहाल कर दिया है। उन पर लगा कोई आरोप सत्य नहीं पाया गया। किसी ने लिखित आरोप लगाए भी नहीं थे। बहाली के बाद कुछ संतों की राय थी कि राधे मां को हरिद्वार के जूना अखाड़ा लाया जाए, जहां वे महामंडलेश्वर पद पर आसीन हुई थी। व्यापक विचार विमर्श के बाद इसे खारिज कर दिया गया है। अब राधे मां नासिक कुंभ के बाद हरिद्वार आएंगी। हरिद्वार में उनके अभिनंदन का कोई कार्यक्रम नहीं हैं।
- श्रीमहंत हरि गिरि, राष्ट्रीय संरक्षक-जूना अखाड़ा
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