डॉ. प्रणव पंड्या ने राज्यसभा सदस्यता लेने से किया इनकार
- - कहा, वर्तमान परिस्थितियों में अध्यात्म के जरिये राजनीति का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल
- - पीएम मोदी की पसंद डॉ. पंड्या ने पहले मनोनीत सदस्य बनने पर दी थी सहमति
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शांतिकुंज के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने राष्ट्रपति की ओर से राज्यसभा के लिए किए गए अपने मनोनयन अस्वीकार कर दिया है। शुक्रवार को उन्होंने राष्ट्रपति भवन को इस आशय की सूचना फैक्स से भेज दी। राष्ट्रपति को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि वे राज्यसभा की सदस्यता को विनम्रता पूर्वक अस्वीकार करते हैं।
मनोनीत सदस्य के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत पसंद पंड्या ने ऐसा तब किया है जब दो दिन पूर्व ही उन्होंने अध्यात्म के जरिये राजनीतिज्ञों को बदलने की बात कही थी। अब उनका कहना है कि वह अपने इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएंगे।
हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि राजनीति में जाने के सवाल पर गायत्री परिवार में सहमति नहीं बनने के कारण ही पंड्या ने दो दिन बाद ही राज्यसभा की सदस्यता लेने से इनकार कर दिया।
पीएम मोदी के हैं खास, पीएम ने खुद की थी बात
गौरतलब है कि पंड्या को राज्यसभा में लाने का प्रस्ताव पीएम मोदी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के जरिये भिजवाया था। इस संबंध में खुद पीएम ने भी डॉ. पंड्या से बात की थी।
कुछ टीवी चैनलों को दिए साक्षात्कार में डॉ. पंड्या ने शपथ न लेने की घोषणा की। उन्होंने इसे गायत्री परिवार के 12 करोड़ भक्तों की इच्छा बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में उन्हें नहीं लगता कि वह राज्यसभा की सदस्यता हासिल कर अध्यात्म के जरिये राजनीति और राजनीतिज्ञ को बदल सकेंगे।
ऐसे में वह अपनी विभिन्न संस्थाओं के जरिये ही इस आशय का अभियान जारी रखेंगे। भाजपा ने इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है।