फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   pm modi will activated asia largest telescope

बेल्जियम से PM मोदी एक्टीवेट करेंगे एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन

Tue, 29 Mar 2016 09:23 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल Updated Tue, 29 Mar 2016 09:23 AM IST
सार

- 2450 मी. की ऊंचाई पर स्थापित की गई है दूरबीन

- 3.6 मी. व्यास का है देवस्थल में स्थापित टेलीस्कोप

- 360 डिग्री कोण पर घूम कर सकता है विस्तृत अध्ययन

- 7 फीसदी अंशदान टेलीस्कोप की स्थापना में बेल्जियम का

- इसकी स्थापना में जर्मनी, रूस भी खासा योगदान

- धुंधले दिखने वाले तारों के अध्ययन में महत्वपूर्ण

विज्ञापन
pm modi will activated asia largest telescope
PM मोदी एक्टीवेट करेंगे एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन - फोटो : file photo

विस्तार

नैनीताल में ओखलकांडा ब्लॉक के देवस्थल में स्थापित एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन (टेलीस्कोप) को 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेल्जियम से बटन दबाकर एक्टीवेट करेंगे।

विज्ञापन


उत्तराखंड के देवस्थल में इसकी तैयारी शुरू हो गई हैं। एरीज के वैज्ञानिक और इंजीनियरों की टीम ने सोमवार को देवस्थल पहुंचकर टेलीस्कोप को चालू कराने संबंधी तैयारियों का जायजा भी लिया। दूरदर्शन और एनआईसी की टीम भी देवस्थल पहुंच गई है। मंगलवार को एरीज से कुछ और वैज्ञानिक और इंजीनियर देवस्थल पहुंचेंगे।
विज्ञापन


सोमवार को कंप्यूटर इंजीनियर संजीव साहू के साथ देवस्थल पहुंचे एरीज से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि जिस वक्त प्रधानमंत्री दूरबीन को एक्टीवेट करेंगे, उस वक्त के कार्यक्रम का पांच मिनट का देवस्थल में दूरदर्शन के सहयोग से पांच मिनट का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

इंटरनेट कनेक्टिविटी और टेलीस्कोप कंट्रोल की जांच हुई

pm modi will activated asia largest telescope
इंटरनेट कनेक्टिविटी और टेलीस्कोप कंट्रोल की जांच करते वैज्ञानिक - फोटो : amar ujala

सोमवार को देवस्थल में इंटरनेट कनेक्टिविटी और टेलीस्कोप कंट्रोल की जांच की गई। सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से देवस्थल को मनोरा पीक से जोड़ा जा चुका है। मनोरा पीक से कंप्यूटर इंजीनियर मोहित कुमार जोशी इस कार्य में जुटे हुए हैं।  

मालूम हो कि 2450 मीटर की ऊंचाई में स्थित देवस्थल में वर्ष 2007 में इस दूरबीन को लगाने का काम शुरू हुआ था। 3.6 मीटर व्यास का यह टेलीस्कोप 360 डिग्री के कोण पर घूमकर किसी भी बिंदु पर स्थिर होकर आकाश का विस्तृत अध्ययन करने के लिए तैयार है।

इस टेलीस्कोप की स्थापना में जर्मनी, रूस और बेल्जियम का खासा योगदान रहा है। इसके लैंस को तैयार करने में बेल्जियम के वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही। टेलीस्कोप में सात फीसदी अंशदान भी बेल्जियम का है। एरीज के वैज्ञानिक डा. बृजेश कुमार ने बताया कि यह दूरबीन धुंधले नजर आने वाले तारों, नई आकाश गंगाओं और दूरस्थ तारों के समूह के अध्ययन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण साबित होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed