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Pithoragarh News: सावन के सोमवार पर आज उमड़ेंगे श्रद्धालु
Mon, 24 Jul 2023 12:50 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 24 Jul 2023 12:50 AM IST
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थल के बालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद
थल (पिथौरागढ़)। यहां बाजार क्षेत्र में सातवीं सदी में बालेश्वर मंदिर की स्थापना हुई थी। ऐसी मान्यता है कि वानरराज बाली ने 20 साल तक एक पांव के सहारे खड़े होकर रामगंगा के त्रिवेणी संगम पर कठिन तप किया था। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने बाल रूप में दर्शन देकर स्वयंभू बाल शिवलिंग में अंतर्ध्यान हो गए थे। इसीलिए यह मंदिर बालेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुआ। बालेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए सोमवार को दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
बताते हैं कि देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने पी लिया था। इससे उनका शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो गया था। उन्हें इस परेशानी से बाहर निकालने के लिए इंद्रदेव ने खूब बारिश कराई थी। यह घटना सावन में ही हुई थी। इस प्रकार शिव ने हलाहल पीकर सृष्टि की रक्षा की थी तभी से उनके शरीर के ताप को कम करने के लिए सावन के हर सोमवार के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक की मान्यता है।
सावन में भगवान शिव को 108 बेलपत्र चढ़ाने से वह बहुत प्रसन्न होते हैं। वह भक्तों को मनवांछित फल देते हैं। किसी भी पर्व में यहां आकर केवल दर्शन मात्र करने से काशी यात्रा के बराबर पुण्य मिलता है। स्कंदपुराण के श्लोक में वर्णित है कि यहां के त्रिवेणी संगम पर नहाने से प्राणी के सब पाप धुल जाते हैं।
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अगले माह शिव महापुराण कराने के लिए बैठक कल
थल (पिथौरागढ़)। बालेश्वर महादेव मंदिर में चार अगस्त से शिव महापुराण कथा होगी। इसका पारायण 14 अगस्त होगा। बागेश्वर जिले के गांव पचार निवासी पंडित राजेंद्र प्रसाद पांडेय व्यास होंगे। कैप्टन बहादुर सिंह रावल ने बताया कि यह आयोजन सभी क्षेत्रवासियों के सहयोग से किया जाएगा। इसकी तैयारी के लिए 25 जुलाई को सुबह 11 बजे से शिव मंदिर थल में बैठक होगी।
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बताते हैं कि देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने पी लिया था। इससे उनका शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो गया था। उन्हें इस परेशानी से बाहर निकालने के लिए इंद्रदेव ने खूब बारिश कराई थी। यह घटना सावन में ही हुई थी। इस प्रकार शिव ने हलाहल पीकर सृष्टि की रक्षा की थी तभी से उनके शरीर के ताप को कम करने के लिए सावन के हर सोमवार के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक की मान्यता है।
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सावन में भगवान शिव को 108 बेलपत्र चढ़ाने से वह बहुत प्रसन्न होते हैं। वह भक्तों को मनवांछित फल देते हैं। किसी भी पर्व में यहां आकर केवल दर्शन मात्र करने से काशी यात्रा के बराबर पुण्य मिलता है। स्कंदपुराण के श्लोक में वर्णित है कि यहां के त्रिवेणी संगम पर नहाने से प्राणी के सब पाप धुल जाते हैं।
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अगले माह शिव महापुराण कराने के लिए बैठक कल
थल (पिथौरागढ़)। बालेश्वर महादेव मंदिर में चार अगस्त से शिव महापुराण कथा होगी। इसका पारायण 14 अगस्त होगा। बागेश्वर जिले के गांव पचार निवासी पंडित राजेंद्र प्रसाद पांडेय व्यास होंगे। कैप्टन बहादुर सिंह रावल ने बताया कि यह आयोजन सभी क्षेत्रवासियों के सहयोग से किया जाएगा। इसकी तैयारी के लिए 25 जुलाई को सुबह 11 बजे से शिव मंदिर थल में बैठक होगी।