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थल का पुल गंभीर खतरे से घिरा
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Sun, 05 Feb 2017 11:03 PM IST
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थल पुल पर प्रतिबंध के बावजूद गुजरती पोकलैंड मशीन
- फोटो : अमर उजाला
थल बाजार में रामगंगा पर 55 साल पहले बना 68 मीटर लंबा स्टील गार्डर पुल खतरों से घिर गया है। अब पुल के गिरने का खतरा बना है। न्योलियासेरा के मोटर पुल के गिरने के बाद हरकत में आए लोनिवि ने थल के पुल में एक समय में एक ही वाहन के गुजरने का नियम बना दिया है। ओवरलोड वाहन और भारी मशीनों को पुल से ले जाने पर रोक लगा दी है, लेकिन विभाग की इस सजगता की धज्जियां उड़ रही हैं। पुल से पोकलैंड जैसी मशीनें भी गुजर रही हैं। नियमों का पालन कराने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं।
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वर्ष 1962 में अस्कोट-बेड़ीनाग सड़क पर बना यह पुल वाहनों के गुजरने पर हिलता है। पुल पर लगे लोहे के स्तंभों में जंग लग गया है। कई सालों से पुल के पार्ट्स में ग्रीसिंग तक न करने के आरोप लगते रहे हैं। बरसात का पानी पुल में जमा होता है। 126 क्विंटल भार क्षमता वाले पुल की हालत काफी जर्जर हो गई है। थल के व्यापारी और जनता कई सालों से पुल की मरम्मत करने की मांग कर रही है, लेकिन विभाग और शासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। एक फरवरी को गणाईगंगोली के न्योलियासेरा में मोटर पुल गिरने के बाद विभाग थोड़ा हरकत में अवश्य आया है। 4 फरवरी को प्रांतीय खंड लोनिवि डीडीहाट के अधिशासी अभियंता की ओर से थल के मोटर पुल के दोनों ओर एक बार में एक ही वाहन धीरे-धीरे ले जाने, ओवरलोड वाहन और मशीन पुल से न ले जाने का बोर्ड लगाया। सुबह 11 बजे बोर्ड लगाया गया। उसके कुछ घंटे बाद ही लोनिवि के आदेशों की धज्जियां उड़नी शुरू हो गई। पुल से जेसीबी, पोकलैंड मशीन गुजरते दिखी।
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लोनिवि डीडीहाट के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी मानते हैं कि वाहन चलने पर पुल कंपन करता है। बताते हैं कि छह महीने पहले आईआईटी रुड़की और पंतनगर को जांच के लिए पत्र लिखा। जांच के लिए टीम नहीं आई। फिर से रिमाइंडर भेजा जा रहा है। पुल पर ओवरलोड वाहनों का गुजरना बंद न होने के सवाल पर वह कहते हैं कि इस संबंध में पुलिस को लिखा जाएगा।
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थल पुल की जानकारी हासिल की जाएगी। पुल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। -डा. रंजीत कुमार सिन्हा, जिलाधिकारी पिथौरागढ़।