{"_id":"6adb9c13d574c2196b0dc631","slug":"widow-of-a-water-department-employee-receives-nothing-but-scorn-in-return-for-18-years-of-service-pithoragarh-news-c-230-1-pth1022-148206-2026-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: जलसंस्थान कर्मी की विधवा को 18 साल की सेवा के बदले मिली दुत्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: जलसंस्थान कर्मी की विधवा को 18 साल की सेवा के बदले मिली दुत्कार
Fri, 23 Oct 2026 11:10 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 23 Oct 2026 11:10 PM IST
विज्ञापन
अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट क्षेत्र में जल संस्थान की एक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा सामने आई है। पति की मौत के बाद अनुकंपा पर रखी गई एक विधवा महिला से 18 साल तक लगातार काम कराने के बाद संस्थान ने उसे बिना मानदेय दिए बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
वर्षों सेवा के बदले इस तरह एक विधवा के अनकहे संघर्षों के बंजर जीवन को वीभत्स सिला मिला है। वर्ष 2008 में जल संस्थान कर्मी पुष्कर सिंह पाल निवासी गर्जिया के निधन के बाद उनकी पत्नी निर्मला देवी को चमलेख पेयजल योजना में पीटीसी के रूप में रखा गया था। तब से वह पानी खोलने-बंद करने, झाड़ू-पोछा और बिल बांटने जैसे सभी काम मात्र 4500 रुपये मासिक मानदेय पर करती आ रही थीं।
जल संस्थान ने उन्हें पक्की नौकरी देने के बजाय जनवरी 2026 से अगस्त 2026 तक का रुका हुआ मानदेय भी नहीं दिया और घर बैठने का फरमान सुना दिया। इतने लंबे समय तक सेवा देने के बाद अचानक बेरोजगार हुई निर्मला देवी के सामने अब परिवार पालने का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्षों सेवा के बदले इस तरह एक विधवा के अनकहे संघर्षों के बंजर जीवन को वीभत्स सिला मिला है। वर्ष 2008 में जल संस्थान कर्मी पुष्कर सिंह पाल निवासी गर्जिया के निधन के बाद उनकी पत्नी निर्मला देवी को चमलेख पेयजल योजना में पीटीसी के रूप में रखा गया था। तब से वह पानी खोलने-बंद करने, झाड़ू-पोछा और बिल बांटने जैसे सभी काम मात्र 4500 रुपये मासिक मानदेय पर करती आ रही थीं।
विज्ञापन
जल संस्थान ने उन्हें पक्की नौकरी देने के बजाय जनवरी 2026 से अगस्त 2026 तक का रुका हुआ मानदेय भी नहीं दिया और घर बैठने का फरमान सुना दिया। इतने लंबे समय तक सेवा देने के बाद अचानक बेरोजगार हुई निर्मला देवी के सामने अब परिवार पालने का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन