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हम नहीं बोलें झूठ पलट जा...

Fri, 27 Oct 2017 10:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़/अस्कोट/डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़/अस्कोट/डीडीहाट Updated Fri, 27 Oct 2017 10:53 PM IST
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We will not lie, lie ...
डीडीहाट की रामलीला में परशुराम-लक्ष्मण संवाद - फोटो : अमर उजाला

जिला मुख्यालय के नजदीक बांस की रामलीला में राम वनवास हो गया है। मोस्टामानू की रामलीला में राम वियोग में दशरथ के प्राण त्यागने की लीला का मंचन किया गया, जबकि अस्कोट की रामलीला में लंका दहन और डीडीहाट की रामलीला में धनुष यज्ञ का मंचन किया गया।

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बांस की रामलीला में कैकेई के कोप भवन में बैठने के बाद वहां पहुंचे राजा दशरथ कहतें हैं-सुमुखि सलोचनि प्रिय वचनी, क्या दुख मोहे जनाव। रानी कैकेई देवासुर संग्राम में दिए गए दो वरदान देने को कहती हैं। राजा दशरथ कहते हैं-हम नहीं बोलें झूठ पलट जाए चाहे जमीं सारी, उलट जाए चाहे मही सारी। रानी कैकेई राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को राजगद्दी देने का वर मांगती है। राजा दशरथ बहुत समझाते हैं पर कैकेई नहीं मानती। राजा दशरथ दोनों वरदान दे देते हैं। राम का कैकेई, कौशल्या, सीता, लक्ष्मण के साथ संवाद होता है। वन को जाते समय राम के पात्र अभिषेक कलखुड़िया के अभिनय से लोगों की आंखें भर आई। दशरथ की भूमिका में सीबी जोशी और कैकेई जगदीश डसीला थे।
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मोस्टामानू की रामलीला में सुमंत के लौटने के बाद राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। ननिहाल से लौटे भरत माता कैकेई को खरीखोटी सुनाते हैं। मुख्य अतिथि व्यापार मंडल अध्यक्ष शमशेर महर, विशिष्ट अतिथि उपाध्यक्ष आशीष सौन, सचिव दिनेश कापड़ी थे। उधर, अस्कोट की रामलीला में सीता की खोज में लंका गए हनुमान फल खाने से रोकने पर रावण पुत्र अक्षय कुमार को मार डालते हैं। मेघनाद उन्हें बंदी बना लेता है। राज दरबार में हनुमान की पूंछ में आग लगाई जाती है तो हनुमान लंका जला देते हैं। मुख्य अतिथि शिक्षक विनोद पंत थे।
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विशिष्ट अतिथि राजनारायण धामी थे। डीडीहाट की रामलीला में धनुष यज्ञ का सुंदर मंचन किया गया। धनुष टूटने के बाद जनक दरबार पहुंचे परशुराम और लक्ष्मण के बीच संवाद होता है। अंत में परशुराम भगवान राम को पहचान जाते हैं। अपना धनुष राम को सौंपकर हिमालय की ओर प्रस्थान कर जाते हैं।

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