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चोटिल महिला को चार घंटे पैदल चलने के बाद डोली से सड़क तक लाए ग्रामीण
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बंगापानी के शिलिंग गांव की चोटिल महिला को सड़क तक लाते ग्रामीण।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। बंगापानी तहसील क्षेत्र के शिलिंग गांव की एक चोटिल महिला को ग्रामीण कुर्सी की डोली बनाकर चार घंटे पैदल चलने के बाद सड़क तक लेकर आए। यहां से महिला को वाहन से पिथौरागढ़ अस्पताल उपचार के लिए लाया गया।
शनिवार को शिलिंग गांव की महिला सीता देवी पत्नी खुशाल सिंह गांव के समीप जंगल में एक पेड़ पर चढ़कर मवेशियों के लिए घास काट रही थी। इसी दौरान पेड़ से गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई। अन्य महिलाओं ने ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। इसके बाद ग्रामीणों ने कुर्सी, डंडे की मदद से डोली बनाई और चोटिल महिला को दस से अधिक लोग चार घंटे की पैदल यात्रा के बाद सड़क तक पहुंचे।
यहां से चोटिल महिला को 100 किमी दूर जिला अस्पताल उपचार के लिए लाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने बताया कि उनके सिर और कमर में काफी चोटें आई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता उमेश सिंह महर ने बताया कि गांव के लिए सड़क 2016 में ही स्वीकृत हो चुकी थी। 2017 में जॉब पिलर का कार्य हुआ, लेकिन वर्तमान समय तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि इसी तरह लोग बीमार, घायल लोगों को सड़क तक लाते हैं। घायल महिला को विनोद सिंह, धीरज सिंह, देवेंद्र सिंह, इंदर सिंह, होशियार सिंह, जगत सिंह, लक्ष्मण सिंह, लक्ष्मण, पुष्कर सिंह, छत्तर सिंह अपने कंधों पर लेकर आए।
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शनिवार को शिलिंग गांव की महिला सीता देवी पत्नी खुशाल सिंह गांव के समीप जंगल में एक पेड़ पर चढ़कर मवेशियों के लिए घास काट रही थी। इसी दौरान पेड़ से गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई। अन्य महिलाओं ने ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। इसके बाद ग्रामीणों ने कुर्सी, डंडे की मदद से डोली बनाई और चोटिल महिला को दस से अधिक लोग चार घंटे की पैदल यात्रा के बाद सड़क तक पहुंचे।
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यहां से चोटिल महिला को 100 किमी दूर जिला अस्पताल उपचार के लिए लाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने बताया कि उनके सिर और कमर में काफी चोटें आई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता उमेश सिंह महर ने बताया कि गांव के लिए सड़क 2016 में ही स्वीकृत हो चुकी थी। 2017 में जॉब पिलर का कार्य हुआ, लेकिन वर्तमान समय तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि इसी तरह लोग बीमार, घायल लोगों को सड़क तक लाते हैं। घायल महिला को विनोद सिंह, धीरज सिंह, देवेंद्र सिंह, इंदर सिंह, होशियार सिंह, जगत सिंह, लक्ष्मण सिंह, लक्ष्मण, पुष्कर सिंह, छत्तर सिंह अपने कंधों पर लेकर आए।
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