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जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंच रहे हैं दो हजार बच्चे

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Aug 2022 11:25 PM IST
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Two thousand children are reaching school with their lives on their palms
पिथौरागढ़। पहाड़ पर बरसात का मौसम आफत लेकर आता है। नदी-नाले उफनाने के साथ ही रास्ते भी बंद हो जाते हैं। इसकी सर्वाधिक मार स्कूली बच्चों पर पड़ती है। उन्हें या तो नदी-नालों पर जान हथेली पर रखकर स्कूल जाना पड़ता है या फिर उन्हें स्कूल जाने से वंचित होना पड़ता है। ऐसे में अगर बच्चे स्कूल जाएं तो जान का खतरा और अगर नहीं जाएं तो भविष्य अंधकारमय होने का खतरा पैदा हो जाता है।
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इधर जिले के आठ विकासखंडों के ऐसे 165 विद्यालयों को शिक्षा विभाग ने चिन्हित किया है जहां के बच्चे जान हथेली पर रखकर स्कूल जाते हैं। इन बच्चों की संख्या दो हजार के करीब है जबकि करीब 60 बच्चे ऐसे हैं जो आपदा में ध्वस्त पैदल रास्तों और सड़कों के कारण स्कूल नहीं जा पाते। इनके लिए शिक्षा विभाग ने घर पर ही वर्कशीट भिजवाने की व्यवस्था की है।
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पिथौरागढ़ जिले में 165 विद्यालय ऐसे हैं जहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को वर्षाकाल में स्कूल पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। बच्चों को भूस्खलन संभावित क्षेत्र, उफनाते नदी-नालों और ट्राली के सहारे जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है। अभिभावक वर्षाकाल में खतरे की आशंका को देखते हुए छोटे बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं। कई अभिभावक अपना काम छोड़कर बच्चों को स्कूल पहुंचाते हैं और उन्हें छुट्टी होने पर घर लाते हैं। संवाद
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इन स्कूलों के बच्चों को मानसूनकाल में हो रही है दिक्कत
आदर्श बालिका इंटर कॉलेज मूनाकोट, जीआईसी झूलाघाट, जीआईसी दोबांस, जीआईसी मानले, जीआईसी कमलेश्वर, जीआईसी क्वीतड़, जीआईसी बड़ाबे, जीआईसी सल्ला चिंगरी, जीआईसी सेल, जीआईसी डुंगराकोट, जीआईसी पत्थरखानी, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धुर्चू, गाड़गांव, तड़ेमिया, हल्दू्, शिलिंगिया, सौनगांव भाटीगांव, इंटर कॉलेज बीसाबजेड़, प्राथमिक विद्यालय शिलिंग्या, पूर्व माध्यमिक ग्यालपानी, लटौड़, माध्यमिक विद्यालय सिलौनी, चामा, खेत पटोली, सल्लाचिंगरी, जाजरचिंगरी और विण विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय राड़ीखूटी, भल्या, निसनी, कुंडार, झूणी, पुरान, डुंगरी, जीआईसी चमाली, जीआईसी बांस, राउमावि नैनीसेनी, झूणी, हिमतड़, भल्या और धारचूला विकासखंड के जीआईसी पय्यापौड़ी, जीआईसी खुमती, बरम, तीजम, जीजीआईसी धारचूला,पांगू, गुईयां, खेत, बरम, जौलाड़, पोखरी, लेकसल्ला बजानी, सिन्याखोला, गलाती, रांथी सहित कई अन्य स्कूलों के बच्चे और कनालीछीना विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय उड़मा, औलतड़ी, सिलौनी, लोहारखेत, सांगड़ी, बगना, ख्वांकोट, ऊंचाकोट, मलान, मानीछीना सहित गंगोलीहाट, मुनस्यारी, बेड़ीनाग विकासखंड के कई कई अन्य विद्यालय शामिल हैं। संवाद
ट्राली पर बैठकर स्कूल जाते हैं टांगा के बच्चे
पिथौरागढ़। बंगापानी तहसील क्षेत्र के टांगा गांव के लोगों का कहना है कि उनके गांव को जोड़ने के लिए अब तक पुल नहीं बन पाया है। इस कारण स्कूली बच्चे और अन्य लोग रोज उफनती नदी में ट्राली के सहारे आवागमन करने को मजबूर रहते हैं। वहीं आपदा संभावित धारचूला के धार, बजानी, बसीधार, सीपलथोर और मल्लाधुरा गांवों के राजकीय इंटर कॉलेज खुमती में पढ़ने वाले 60 से अधिक बच्चों को स्कूल पहुंचने में दिक्कत हो रही है। संवाद

165 ऐसे विद्यालयों को चयनित किया गया है जिनमें पढ़ने के लिए आने वाले बच्चे भूस्खलन संभावित क्षेत्र, नदी, नाले, बदहाल रास्ते ट्राली के सहारे पार कर विद्यालय पहुंचते हैं जो बच्चे विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं उन्हें शिक्षक वर्कशीट बनाकर दे रहे हैं। शिक्षक उनका घर-घर जाकर मूल्यांकन भी कर रहे हैं।
- अशोक कुमार जुकरिया, मुख्य शिक्षा अधिकारी पिथौरागढ़।
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