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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Two hundred meters left the work of Hotmix on the road

दो सौ मीटर सड़क पर हॉटमिक्स का काम छोड़ा

Wed, 03 May 2017 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,थल
ब्यूरो/अमर उजाला,थल Updated Wed, 03 May 2017 10:35 PM IST
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Two hundred meters left the work of Hotmix on the road
थल के पास इस हालत में है सड़क - फोटो : अमर उजाला

थल-सातशिलिंग मार्ग पर थल बाजार के पास 200 मीटर सड़क पर हॉटमिक्स का काम छोड़ने से स्थानीय लोग और वाहन चालक भारी परेशानी में हैं। एशियन डेवलपमेंट बैंक की निर्माण शाखा ने सड़क की मरम्मत के नाम पर अब तक 35 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर दी है, लेकिन कस्बों और नगरों में हॉटमिक्स का काम नहीं किया। वहीं, थल बाजार से सटी सड़क पर हॉटमिक्स तो नहीं किया गया, लेकिन सुधारीकरण के नाम पर सड़क को बुरी तरह खोद दिया गया। अब बारिश के समय कीचड़ और धूप के समय धूल से चलना मुश्किल हो रहा है।

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थल के लोगों का कहना है कि यदि 15 दिन के भीतर सड़क पर हॉटमिक्स नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मामले में एडीबी कंस्ट्रक्शन डिवीजन के अधिशासी अभियंता डीपी आर्या का कहना है कि सड़क सुधारीकरण का काम गाजियाबाद की पीआरएल कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने भौड़ी के पास हॉटमिक्स प्लांट लगाया था, लेकिन लोगों के विरोध और मानक पूरे न होने के कारण शासन ने इस प्लांट को बंद करा दिया है। अब यह तलाश की जा रही है कि यदि आसपास कहीं पर हॉटमिक्स प्लांट लगा हो तो वहां से सामग्री लाकर थल बाजार में मुवानी बाजार में हॉटमिक्स किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बारिश का मौसम शुरू होने से पहले सारा काम पूरा कर लिया जाएगा। 
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ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच हो
समाजसेवी रामसिंह जंगपांगी का कहना है कि अनुबंध के अनुसार काम पूरा न करने वाले विभागों और ठेकेदारों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब निर्माण कंपनी को काम पूरा नहीं करना था तो उसे काम ही हाथ में नहीं लेना चाहिए था। अब सरकार को चाहिए कि काम पूरा कराने के साथ मामले की जांच भी कराए। 
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अब आंदोलन का ही रास्ता बचा
सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश पाठक का कहना है कि दो साल से लोग मुसीबत झेल रहे हैं। अब सड़क की दशा सुधारने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। वह कहते हैं कि आयुक्त की जांच के आदेश के बाद भी किसी के खिलाफ कार्रवाई न होना गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे तो सरकारी धन को मिट्टी में मिलाने की परंपरा चल जाएगी। 

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