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Pithoragarh News: ट्रैकर और पर्यटक अब हेलीकॉप्टर से पहुंचेंगे रालम ग्लेशियर तक

Sat, 17 Jan 2026 10:42 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sat, 17 Jan 2026 10:42 PM IST
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Trekkers and tourists will now be able to reach Ralam Glacier by helicopter.
मुनस्यारी विकासखंड में स्थित विश्व प्रसिद्ध रालम ग्ले​शियर। संवाद
पिथौरागढ़/मुनस्यारी। जल्द ही विश्व प्रसिद्ध रालम ग्लेशियर तक पर्यटक और ट्रैकर हेलीकॉप्टर से पहुंचेंगे। रालम ग्लेशियर को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए वहां हेलीपैड बनाया जएगा जिसमें 80.06 लाख रुपये खर्च होंगे। इसकी स्वीकृति मिल चुकी है। हेलीकॉप्टर से ट्रैकरों और पर्यटकों का सफर बेहद आसान हो जाएगा और उन्हें रालम पहुंचने के लिए 40 किमी का पैदल सफर नहीं करना पड़ेगा।
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मुनस्यारी विकासखंड में 3130 मीटर की ऊंचाई पर रालम गांव और वहां का ग्लेशियर पर्यटन की दृष्टि से मनमोहक स्थल है। यहां पहुंचने के लिए ब्लॉक मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर लीलम तक वाहन से और फिर वहां से 40 किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है। हर साल ट्रैकिंग के लिए देश-विदेश के ट्रैकर और पर्यटक यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। सभी को यहां पहुंचने के लिए तीन दिन का कठिन सफर करना मजबूरी है।
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अब जल्द ही ट्रैकर और पर्यटक यहां तक हेलीकॉप्टर से पहुंच सकेंगे। ऐसा इसलिए कि रालम गांव में इस कठिन सफर को आसान बनाने और विश्व प्रसिद्ध इस ग्लेशियर को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए 80.06 लाख से हेलीपैड बनेगा। इसकी स्वीकृति मिल चुकी है। इसकी जिम्मेदारी ग्रामीण निर्माण विभाग को दी गई है। हेलीपैड बनने से दुर्गम रालम गांव और ग्लेशियर का सफर बेहद आसान हो जाएगा जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी एयर कनेक्टिविटी
रालम गांव चीन सीमा के नजदीक बसा है। इस गांव के आसपास सैनिक सीमा सुरक्षा में मुस्तैद हैं। रालम गांव में हेलीपैड बनने से सीमा की निगरानी करना आसान होगा जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
बीमारों को मिलेगा काफी फायदा
रालम गांव की 500 से अधिक की आबादी छह महीने इस गांव तो छह महीने माइग्रेशन पर पातों गांव में निवास करती है। रालम गांव में जीवन बेहद कठिन है। खासकर बीमारों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती रहता है। यदि गांव में कोई बीमार हुआ तो उसे तीन दिन बाद ही अस्पताल नसीब होता है। गांव में हेलीपैड बनने से बीमारों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू करना बेहद आसान हो जाएगा। समय पर अस्पताल पहुंचने से बीमारों और गर्भवतियों की जान आफत में नहीं फंसेगी।

कोट
रालम में हेलीपैड के निर्माण की योजना को स्वीकृति मिली है। जल्द ही इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। हेलीपैड बनने से यहां तक कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी जिससे पर्यटन गतिविधियों का भी विस्तार होगा। - नितिन पांडेय, ईई, ग्रामीण निर्माण विभाग, डीडीहाट
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