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इस बार पहले ही तैयार हो जाएगी लीची
ब्यूरो/अमर उजाला, जीवन दानू / नाचनी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 08 Feb 2016 10:12 PM IST
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मौसम परिवर्तन के कारण इस बार लोगों को नाचनी क्षेत्र की बेमौसमी लीची खाने को नहीं मिलेगी। तापमान में गिरावट न आने के कारण बेमौसमी लीची में समय से पहले ही बौर आ गए हैं।
नाचनी क्षेत्र में लीची हर साल जुलाई में तैयार होती थी, मार्च में लीची के पेड़ों में बौर आते थे लेकिन इस बार जनवरी में ही लीची में बौर आ गए। इस हिसाब से इस बार बेमौसमी लीची मई में पककर तैयार हो जाएगी।
इलाके में थल, रिंगूनिया, नौलड़ा, नाचनी, हुपली, भैंसखाल, रसियाबगड़, बोरागांव, टिम्टिया, क्वीटी क्षेत्र में बेमौसमी लीची का उत्पादन होता था। इस इलाकों में 5000 से अधिक बेमौसमी लीची के फलदार पेड़ हैं। एक पेड़ एक क्विंटल फल देता था। लीची उत्पादक मोहन सिंह, हरुली देवी, पूरन सिंह, दुर्गा सिंह, गोविंद सिंह, आनंदी देवी, आलम सिंह, त्रिलोक सिंह, हीरा सिंह, रतन सिंह, चंद्रकला दानू कहते हैं कि लीची में समय से पहले बौर आने से लीची उत्पादकों में निराशा है। बेमौसमी लीची के बेहतर दाम मिल जाते थे। कहते हैं कि इस बीच यदि तापमान में कमी आई तो लीची के बौर खराब होने की संभावना भी है।
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नाचनी क्षेत्र में लीची हर साल जुलाई में तैयार होती थी, मार्च में लीची के पेड़ों में बौर आते थे लेकिन इस बार जनवरी में ही लीची में बौर आ गए। इस हिसाब से इस बार बेमौसमी लीची मई में पककर तैयार हो जाएगी।
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इलाके में थल, रिंगूनिया, नौलड़ा, नाचनी, हुपली, भैंसखाल, रसियाबगड़, बोरागांव, टिम्टिया, क्वीटी क्षेत्र में बेमौसमी लीची का उत्पादन होता था। इस इलाकों में 5000 से अधिक बेमौसमी लीची के फलदार पेड़ हैं। एक पेड़ एक क्विंटल फल देता था। लीची उत्पादक मोहन सिंह, हरुली देवी, पूरन सिंह, दुर्गा सिंह, गोविंद सिंह, आनंदी देवी, आलम सिंह, त्रिलोक सिंह, हीरा सिंह, रतन सिंह, चंद्रकला दानू कहते हैं कि लीची में समय से पहले बौर आने से लीची उत्पादकों में निराशा है। बेमौसमी लीची के बेहतर दाम मिल जाते थे। कहते हैं कि इस बीच यदि तापमान में कमी आई तो लीची के बौर खराब होने की संभावना भी है।
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