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सड़क पर गिर रहे झरने ने छह घंटे तक रोकी रेस्क्यू को जा रहे जवानों की राह
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बरम बलमरा के पास रोड बंद होने से मरीज को ऐसे लाया गया।
- फोटो : PITHORAGARH
बंगापानी (पिथौरागढ़)। चारों ओर मची तबाही के बाद मंगलवार सुबह खोज बचाव के लिए जा रही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवानों की टीम भी रास्ते में फंस गई। रतपतिया नामक स्थान पर पहाड़ी से गिर रहे झरने के कारण लगभग पांच घंटे तक बचाव दल आगे नहीं बढ़ सका।
टीम के सदस्यों के साथ मदद के लिए जा रहे बंगापानी क्षेत्र के युवा मनोज कुमार और मनोज महर ने बताया कि झरने का पानी कुछ कम होने के बाद वह लोग आपदा प्रभावित मोरी गांव की ओर पैदल ही रवाना हुए। मोरी गांव में जाकर हालात देखे और गांव की ओर जा रही नदी का रुख मोड़ा।
रात में मलबा आता तो होती भारी जनहानि
बंगापानी। मोरी गांव पहुंचे बंगापानी के युवा मनोज कुमार और सिलिंग के प्रधान चंचल महर ने बताया कि नदी ने मोरी गांव को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। वहां पर मंगलवार सुबह 5.17 बजे अचानक घरों के आसपास पानी बहता नजर आया। कुछ लोगों ने स्थिति भांपते हुए शोर मचाना शुरू किया और सभी लोग घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। इसके कुछ ही समय बाद पानी के साथ मलबा और बोल्डर घरों में घुस गया। मलबे में एक मकान को छोड़कर बाकी सभी मकानों में मलबा घुसा है। उन्होंने बताया कि देव सिंह की बोलेरो कार और पदम सिंह की पिकप सहित तीन वाहन मलबे में दबे हैं। उन्होंने बताया कि उमरगड़ा और सिलिंग में भी खतरा बना हुआ है। संवाद
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बारिश ने बंगापानी क्षेत्र को किया दुनियां से अलग-थलग
मुनस्यारी/मदकोट/बंगापानी। ारिश ने बंगापानी क्षेत्र को शेष दुनिया से अलग-थलग कर दिया। जौलजीबी-मदकोट के बीच एनएच का पुल बहने से यहां की दस हजार से अधिक की आबादी के दूसरे क्षेत्र में जाने के सभी रास्ते बंद हो गए हैं। लोगों में खौफ का माहौल है। ऐसे में प्रभावितों तक मदद पहुंचाना प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकता है।
जारा जिबली, मेतली, चामी, मोरी सहित क्षेत्र के तमाम गांवों में मलबा घुसने से भारी तबाही मची है। लोगों के खेत खलिहान बह गए। नदी के पानी ने गांव और खेती वाली भूमि को रोखड़ में तब्दील कर दिया। सुबह होने पर चारों ओर तबाही का मंजर नजर आया। एनएच में बीआरओ का पुल बहने से बंगापानी के लोगों के लिए जौलजीबी या धारचूला जाने के लिए भी रास्ता नहीं है। मदकोट और मुनस्यारी के बीच में कुछ दिन पूर्व एक पुल बह गया था। अब बरम की ओर भी पुल बहने से बरसात में आवाजाही के लिए कोई साधन नहीं है। बंगापानी और बरम के बीच में मलबा हटाने में देरी होने पर लोगों ने बीआरओ के अधिकारियों के समक्ष नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आपदा में भी बीआरओ ने छोटी मशीन यहां पर लगाई है।
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टीम के सदस्यों के साथ मदद के लिए जा रहे बंगापानी क्षेत्र के युवा मनोज कुमार और मनोज महर ने बताया कि झरने का पानी कुछ कम होने के बाद वह लोग आपदा प्रभावित मोरी गांव की ओर पैदल ही रवाना हुए। मोरी गांव में जाकर हालात देखे और गांव की ओर जा रही नदी का रुख मोड़ा।
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रात में मलबा आता तो होती भारी जनहानि
बंगापानी। मोरी गांव पहुंचे बंगापानी के युवा मनोज कुमार और सिलिंग के प्रधान चंचल महर ने बताया कि नदी ने मोरी गांव को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। वहां पर मंगलवार सुबह 5.17 बजे अचानक घरों के आसपास पानी बहता नजर आया। कुछ लोगों ने स्थिति भांपते हुए शोर मचाना शुरू किया और सभी लोग घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। इसके कुछ ही समय बाद पानी के साथ मलबा और बोल्डर घरों में घुस गया। मलबे में एक मकान को छोड़कर बाकी सभी मकानों में मलबा घुसा है। उन्होंने बताया कि देव सिंह की बोलेरो कार और पदम सिंह की पिकप सहित तीन वाहन मलबे में दबे हैं। उन्होंने बताया कि उमरगड़ा और सिलिंग में भी खतरा बना हुआ है। संवाद
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बारिश ने बंगापानी क्षेत्र को किया दुनियां से अलग-थलग
मुनस्यारी/मदकोट/बंगापानी। ारिश ने बंगापानी क्षेत्र को शेष दुनिया से अलग-थलग कर दिया। जौलजीबी-मदकोट के बीच एनएच का पुल बहने से यहां की दस हजार से अधिक की आबादी के दूसरे क्षेत्र में जाने के सभी रास्ते बंद हो गए हैं। लोगों में खौफ का माहौल है। ऐसे में प्रभावितों तक मदद पहुंचाना प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकता है।
जारा जिबली, मेतली, चामी, मोरी सहित क्षेत्र के तमाम गांवों में मलबा घुसने से भारी तबाही मची है। लोगों के खेत खलिहान बह गए। नदी के पानी ने गांव और खेती वाली भूमि को रोखड़ में तब्दील कर दिया। सुबह होने पर चारों ओर तबाही का मंजर नजर आया। एनएच में बीआरओ का पुल बहने से बंगापानी के लोगों के लिए जौलजीबी या धारचूला जाने के लिए भी रास्ता नहीं है। मदकोट और मुनस्यारी के बीच में कुछ दिन पूर्व एक पुल बह गया था। अब बरम की ओर भी पुल बहने से बरसात में आवाजाही के लिए कोई साधन नहीं है। बंगापानी और बरम के बीच में मलबा हटाने में देरी होने पर लोगों ने बीआरओ के अधिकारियों के समक्ष नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आपदा में भी बीआरओ ने छोटी मशीन यहां पर लगाई है।

जारा जिबली गांव में लोगों के आंगन बोल्डर और मलबे से पट गए।- फोटो : PITHORAGARH