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गर्ब्यांग में सेब उत्पादन का प्रयोग सफल

Fri, 22 Sep 2017 10:46 PM IST
संजू पंत/अमर उजाला, डीडीहाट
संजू पंत/अमर उजाला, डीडीहाट Updated Fri, 22 Sep 2017 10:46 PM IST
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The use of apple production in Grabang is successful
3250 मीटर की ऊंचाई पर गर्ब्यांग में लगे सेब के फल - फोटो : अमर उजाला

समुद्र सतह से 3250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गर्ब्यांग में भारत तिब्बत सीमा पुलिस ने दस वर्ष पहले सेब उगाने का जो प्रयास किया था, उसके अब बेहतर परिणाम सामने आ गए हैं। गर्ब्यांग में सेब को अनुकूल तापमान मिल रहा है। इस समय 150 पेड़ों में सेब के फल लगे हैं। आईटीबीपी अगले चरण में अब गांव के लोगों को सेब उत्पादन के लिए प्रेरित करेगी।

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वर्ष 2007 में आईटीबीपी सातवीं वाहिनी के तत्कालीन सेनानी एपीएस निंबाडिया ने गर्ब्यांग, गुंजी, छियालेख और कालापानी में हिमाचल से मंगाकर सेब के 50-50 पौधों का रोपण किया। उसके बाद हर साल पौधों के रोपण का क्रम चलता रहा। गर्ब्यांग में सबसे अच्छी प्रगति देखने को मिली। वहां पर आईटीबीपी की अग्रिम चौकी परिसर में इस समय सेब के 300 पेड़ मौजूद हैं, इनमें से 150 पेड़ फल देने लगे हैं। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी के वर्तमान सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि गर्ब्यांग में पैदा हो रहा सेब बेहतरीन स्वाद वाला है, क्योंकि सेब को इस स्थान पर पर्याप्त ठंडा मौसम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि गर्ब्यांग में पैदा होने वाले फलों को हिमवीर महिला एसोसिएशन के माध्यम से दिल्ली तक पहुंचाया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि लगभग समान ऊंचाई पर होने के बावजूद गुंजी, छियालेख और कालापानी में सेब के पौधों की प्रगति ज्यादा संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि अब एक अभियान के तौर पर उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांव के लोगों को सेब उत्पादन के प्रति प्रेरित किया जाएगा, उनको पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे और देखरेख के तरीके बताए जाएंगे। यदि आईटीबीपी का यह प्रयास सफल होता है तो आने वाले समय में सेब उत्पादन की नई पट्टी विकसित हो जाएगी।
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बोना, मिलम के सेब उजड़ गए
उच्च हिमालयी क्षेत्र में बोना और मिलम के सेब अब उजड़ गए हैं। पहले इन इलाकों में सेब का उत्पादन बहुत होता था। अब इन इलाकों में सेब के बागान उजड़ गए हैं। अब जो पेड़ बचे हैं, उनमें फल बहुत कम मात्रा में आते हैं। उनका स्वाद भी पहले जैसा नहीं है।

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