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Pithoragarh News: गुमशुदा युवक का शव 11 दिन बाद मंगोली के जंगल में मिला
Fri, 02 Oct 2026 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 02 Oct 2026 11:09 PM IST
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लोहाघाट (चंपावत)। ग्राम पंचायत मंगोली के बटोली तोक निवासी लापता युवक का शव करीब 11 दिन बाद जंगल में मिला। शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में शोक की लहर है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और इसके बाद परिजनों को सौंप दिया।
बटोली निवासी भुवन चंद्र (38) पुत्र महेश चंद्र बीते 21 सितंबर को घर से काम के लिए निकले थे लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 26 सितंबर को परिजनों ने थाना लोहाघाट में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस टीम ने वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से भुवन चंद्र की तलाश शुरू की। बृहस्पतिवार एक अक्तूबर को तलाश अभियान के दौरान टीम को मंगोली के जंगल में पहाड़ी पर उनका शव पड़ा मिला। थानाध्यक्ष ओमप्रकाश ने बताया कि प्रथम दृष्टया रास्ते से पैर फिसलने के कारण पहाड़ी से गिरने से मौत होने की आशंका है। हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया। शुक्रवार को मृतक युव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक के दो छोटे बच्चे हैं। वह मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। ग्रामीणों ने सरकार से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
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बटोली निवासी भुवन चंद्र (38) पुत्र महेश चंद्र बीते 21 सितंबर को घर से काम के लिए निकले थे लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 26 सितंबर को परिजनों ने थाना लोहाघाट में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस टीम ने वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से भुवन चंद्र की तलाश शुरू की। बृहस्पतिवार एक अक्तूबर को तलाश अभियान के दौरान टीम को मंगोली के जंगल में पहाड़ी पर उनका शव पड़ा मिला। थानाध्यक्ष ओमप्रकाश ने बताया कि प्रथम दृष्टया रास्ते से पैर फिसलने के कारण पहाड़ी से गिरने से मौत होने की आशंका है। हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया। शुक्रवार को मृतक युव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक के दो छोटे बच्चे हैं। वह मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। ग्रामीणों ने सरकार से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
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