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Pithoragarh News: 50 लाख के दो सचल चिकित्सा वाहनों को सिस्टम ने बना दिया कबाड़

Tue, 20 May 2025 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Tue, 20 May 2025 10:46 PM IST
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The system turned two mobile medical vehicles worth Rs 50 lakh into junk
पिथौरागढ़। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद धरातल पर इसका असर दिख नहीं रहा है। कनालीछीना और मुनस्यारी ब्लॉक में कबाड़ हो चुके 50 लाख रुपये से खरीदे गए दो सचल चिकित्सा वाहन इसका प्रमाण हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में खड़े दोनों वाहन जंग खा रहे हैं। लोग सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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दुर्गम क्षेत्र के लोगों को घर के पास चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करीब 10 वर्ष पूर्व बीएडीपी योजना के तहत दो सचल चिकित्सा वाहन खरीदे गए थे। ये वाहन एक्स-रे, पैथोलॉजी लैब सहित अन्य सुविधाओं से लैस थे। वाहन तो खरीद लिए गए लेकिन इनके संचालन के लिए चालक, तकनीशियन सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती नहीं हो सकी।
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शुरुआत में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किसी तरह स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती कर इनका संचालन किया गया लेकिन अलग से कर्मियों की तैनाती न होने से कुछ समय बाद ही इनका संचालन रोकना पड़ा और वाहनों को संबंधित सीएचसी में खड़ा कर दिया गया। करीब आठ साल से दोनों वाहन सीएचसी में खड़े-खड़े कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। जंग खा चुके ये वाहन स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों के साथ ही पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहे हैं। संवाद
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रिपेयर करने में खर्च होंगे लाखों रुपये
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दोनों वाहनों को रिपेयर कर इन्हें चलाने लायक बनाया जाएगा। संचालन न होने से इनके टायर जाम हो चुके हैं। इनमें स्थापित स्वास्थ्य उपकरण खराब हो चुके हैं। इनकी मरम्मत कराने में अब लाखों रुपये खर्च होंगे।

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मुवानी के लोगों ने की सचल चिकित्सा सेवा शुरू करने की मांग

मुवानी। घाटी के लोगों ने सचल चिकित्सा वाहन को फिर से संचालित करने की मांग की है। मुवानी के पूर्व ग्राम प्रधान रमेश बम, कमलदीप बिष्ट, सोबन सिंह कार्की, दीपक कार्की, जीवन बोरा और मनोज चंद ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर कहा कि पूर्व में सचल चिकित्सा वाहन के जरिये क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही थीं। अब उन्हें एक्स-रे, रक्त जांच सहित अन्य सेवाओं के लिए जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि लाखों रुपये से खरीदे गए सचल चिकित्सा वाहन का संचालन न होना स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों को हवाई साबित कर रहा है। संवाद


कोट
दोनों सचल चिकित्सा वाहनों के संचालन के प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि यह पहल सार्थक होगी। रिपेयर के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। - डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़


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